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जानें भारतीय कानून में क्या है रेप की कड़ी सजा, क्यों विधायक सेंगर को मिली उम्रकैद

News18Hindi
Updated: December 20, 2019, 3:30 PM IST
जानें भारतीय कानून में क्या है रेप की कड़ी सजा, क्यों विधायक सेंगर को मिली उम्रकैद
उन्नाव रेप (unnao gang rape) मामले में बीजेपी विधायक कुलदीप सिंह सेंगर (BJP MLA Kuldeep Singh Sengar) को दिल्ली की तीस हजारी कोर्ट (Tis Hazari Court) ने उम्रकैद की सजा सुनाई गई है. वो बलात्कार (Rape) के मामले धारा 376 ई के साथ पास्को (POSCO) दंड संहिता भी लागू की गई है. इसलिए अदालत ने सेंगर को ये सजा दी है. रेप के अलग अलग मामलों में कोर्ट अलग तरह की सजाएं देती है

उन्नाव रेप (unnao gang rape) मामले में बीजेपी विधायक कुलदीप सिंह सेंगर (BJP MLA Kuldeep Singh Sengar) को दिल्ली की तीस हजारी कोर्ट (Tis Hazari Court) ने उम्रकैद की सजा सुनाई गई है. वो बलात्कार (Rape) के मामले धारा 376 ई के साथ पास्को (POSCO) दंड संहिता भी लागू की गई है. इसलिए अदालत ने सेंगर को ये सजा दी है. रेप के अलग अलग मामलों में कोर्ट अलग तरह की सजाएं देती है

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  • Last Updated: December 20, 2019, 3:30 PM IST
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जानते हैं कि भारतीय दंड संहिता के अनुसार रेप मामलों में किस तरह की सजाएं होती हैं. महिला से बलात्कार किया जाना भारतीय कानून के तहत गंभीर श्रेणी में आता है. इस अपराध को अंजाम देने वाले दोषी को कड़ी सजा का प्रावधान है. इस अपराध के लिए भारत दंड संहिता में धारा 376 व 375 के तहत सजा का प्रावधान है. इसमें अदालत मौत या उम्रकैद की सजा भी सुना चुकी है.


किसी भी महिला के साथ बलात्कार करने के आरोपी पर धारा 376 के तहत मुकदमा चलाया जाता है, जिसमें अपराध सिद्ध होने की दशा में दोषी को कम से कम पांच साल तक की सजा दिए जाने का प्रावधान है. लेकिन कई संगीन मामलों में अदालत उम्रकैद की सजा सुना सकती है, जैसा उन्नाव के बीजेपी विधायक कुलदीप सिंह सेंगर के मामलेे में अदालत ने किया है. कई बार अदालत गैंगरेप और हत्या के मामले में मौत की सजा भी सुनाती है.




2012 के दिल्ली के निर्भया कांड के बाद संविधान संशोधन के जरिए आईपीसी की धारा 376 (ई) के तहत बार-बार बलात्कार के दोषियों को उम्रक़ैद या मौत की सज़ा का प्रावधान किया गया था. यही धारा विधायक कुलदीप सिंह सेंगर के मामले में लागू हुई है. सेंगर ने ना केवल इस केस को खत्म करने के लिए पीड़ित परिवार को धमकाया बल्कि उन्हें झूठे मामलों में भी फंसाया. सेंगर पर पास्को भी लागू हुआ है, इसमें भी नाबालिग के साथ बलात्कार के मामले में कड़ी सजा का प्रावधान है.


भारतीय दंड सहिता की धारा 376 (ई) में संशोधन के तहत बार-बार बलात्कार का अपराध करने वाले दोषी को उम्रकैद या मौत की सजा हो सकती है. मुंबई अदालत के जस्टिस बीपी. धर्माधिकारी और जस्टिस रेवती मोहिते डेरे ने शक्ति मिल्स सामूहिक बलात्कार कांड के तीन दोषियों की याचिका पर सुनवाई करते हुए मौत की सजा सुनाई थी. धारा 376(ई) कहती है कि पहले अगर धारा 376, 376(ए), 376(डी) के तहत आरोपियों को दोषी पाया जा चुका है. बाद में अगर फिर से उन्हें इनमें से किसी एक धारा में दोषी पाया जाता है तो सजा के तौर पर उन्हें उम्रकैद या मौत की सजा दी जाएगी.


रेप के अपराध को अलग-अलग हालात और श्रेणी के हिसाब से धारा 375, 376, 376क, 376ख, 376ग, 376घ के रूप में विभाजित किया गया है. ये है धारा 375 यदि कोई व्यक्ति किसी महिला की इच्छा के विरुद्ध, उसकी सहमति के बिना, उसे डरा धमका कर, दिमागी रूप से कमजोर या पागल महिला को धोखा देकर और उसके शराब या पदार्थ के कारण होश में नहीं होने पर उसके साथ संभोग करता है तो वो बलात्कार की श्रेणी में ही आएगा.


अगर अदालत में रेप का आरोप साबित हो जाता है तो दोषियों को कठोर कारावास की अधिकतम सजा हो सकती है. आमतौर पर दोषी को कम से कम दस साल की सजा दी जाती है.
376(क) धारा कहती है कि पति और पत्नी के अलग रहने के दौरान अगर पुरुष पत्नी के साथ संभोग करता है तो वो भी ये बलात्कार की श्रेणी में आता है. जिसके लिए दो वर्ष तक की सजा और जुर्माना देना पड़ेगा. 376(ख) धारा के तहत आपके संरक्षण में रहने वाली किसी स्त्री के साथ संभोग भी इसी अपराध की श्रेणी में आएगा, जिसके लिए पांच वर्ष तक की जेल के साथ जुर्माना भी देना पड़ेगा.


376(ग) धारा कहती है कि जेल में अधिकारी द्वारा किसी महिला बंदी से संभोग करना भी बलात्कार की श्रेणी में आता है. जिसमें पांच साल तक की सजा का प्रावधान है.


धारा 376(घ) अस्पताल के प्रबंधक या कर्मचारी आदि से किसी सदस्य द्वारा उस अस्पताल में किसी स्त्री के साथ संभोग करेगा तो वो भी बलात्कार की श्रेणी में आएगा. जिसकी सजा अवधि पांच साल तक हो सकती है.

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First published: December 20, 2019, 3:03 PM IST
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