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लंबी चोंच वाले पक्षी के जीवाश्म ने खोले पक्षियों के इतिहास के राज

आज के पक्षियों (Modern Birds) की चोंच (Beak) इस जीवाश्म (Fossil) वाले पक्षी से काफी मेल खाती है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)
आज के पक्षियों (Modern Birds) की चोंच (Beak) इस जीवाश्म (Fossil) वाले पक्षी से काफी मेल खाती है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)

दशकों पहले मिले जीवाश्म (Fossil) के अध्ययन के बाद शोधकर्ताओं के लंबी चोंच (Big Beak) वाले पक्षी (Bird) और उसके उद्भव (Evolution) के इतिहास की रोचक जानकारी मिली.

  • News18Hindi
  • Last Updated: November 27, 2020, 12:56 PM IST
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जीवाश्म विज्ञान (Palanteology) कई बार चौंकाने वाली जानकारी दे देता है. लाखों करोड़ों साल पहले ऐसे जीव (Organisms) रहा करते थे जिनके शरीर गतिविधियां और क्षमताएं आज देखने को तो मिलती ही नहीं है, उनमें से तो कुछ हैरान करने वाली भी पाई गई. हाल ही में ऐसे ही एक जीवाश्म की खोज हुई है. उत्तर क्रटेशियस ( Late Cretaceous) काल के एक विशाल चोंच (Massive Beak) वाले पक्षी की खोज उद्भवकाल इतिहास (Evolutionary history) की एक नई कहानी बता रही है.

चोंच ने किया हैरान
हाल ही में नेचर जर्नल में प्रकाशित अध्ययन में शोधकर्ताओं ने इस अनोखे पक्षी की प्रजाति के बारे में बताया है. अब तक अज्ञात रही इस पुरातन पक्षी प्रजाति का नाम फाल्काटेक्ले फॉर्स्टेरे है. इस पक्षी की बड़ी और लंबी चोंच है जो आज के टूकेन पक्षियों की चोंच से मिलती है. यह समानता बहुत ही असमान्य बात है.

दशकों पहले यहां मिला था जीवाश्म
इस अज्ञात प्रजाति का पक्षी दशकों पहले मैडागास्कर में पाया गया था. लेकिन यह जीवाश्म नमूना बहुत ही नाजुक था और उसमें बहुत सारी छोटी हड्डियां थी जिसकी वजह से इसके विश्लेषण में इतना ज्यादा समय लग गया. एक बार जब शोधकर्ताओं ने इन छोटे छोटे टुकड़ों का अध्ययन कर लिया तब उन्हें पता चला कि उन्होंने कुछ खास ही खोज लिया है.



क्यों लगा इतना समय
ओहियो यूनिवर्सिटी ऑफ एनॉटमिकल साइंसेस  के प्रोफेसर और इस अध्ययन के प्रमुख लेखक पैट्रिक ओकॉर्नर ने बताया कि जैसे ही उन्होंने बहुत सावधानी से इन नाजुक हड्डियों के पास से पत्थर के टुकड़े हटाने शुरू किए उन्होंने पाया की उन्हें कुछ खास लेकिन बहुत स्पष्ट मिल गया है.
खोपड़ी की प्रतिकृतिपत्थर हटाने के बाद वैज्ञानिकों ने माइक्रो कम्प्यूटेड टोमोग्राफी स्कैनर का उपयोग आंकड़े जमा करने में किया जिससे इस जीव की खोपड़ी का थ्री डी आकार बना सकें. इसके लिए शोधकर्ताओं ने थ्री डी प्रिंटिंग से इस पक्षी की खोपड़ी की प्रतिकृति बनाई.छिपकली की तरह अपने कटी पूंछ फिर से बना सकता है ये जानवरअपने समय के पक्षियों से बहुत अलगइस प्रजाति का नाम फाल्काटेक्ले दिया जिसका मतलब होता है छोटे उड़ने वाले हंसिये. शोधकर्ताओं ने यह नाम पक्षी के अनोखे चेहरे के आकार को देखते हुए दिया. फाल्काटेक्ले को एनेन्टियोर्निथाइन पक्षी की श्रेणी में रखा गया है जो ऐसे पक्षियों का समूह है जो डायनासोर के युग में पाए जाते थे. उस समय के पक्षियों में प्रायः दांत और पंखों में नाखून पाए जाते थे. उस समय की सभी ज्ञात प्रजातियां अब विलुप्त हो चुकी हैं.


काफी लंबे समय तक रही यह प्रजाति
शोधकर्ताओं का कहना है कि फाल्काटेक्ले विलक्षण पक्षी थे और अपने तरह के दूसरे जीवों के मुकाबले 6.5 से 25 करोड़ साल पहले तक जिंदा रहे. क्रिटेशियस काल के इस युग की पक्षियों के आकार और प्रकार में काफी विविधताएं रहा करती थीं, लेकिन चेहरे में उनके बहुत समानताएं होती थीं. लेकिन फाल्काटेक्ले की बहुत ही लंबी चोंच उसे बाकियों से अलग करती थी. यह लंबी चोंच आज के बहुत से पक्षियों से मेल खाती है. आधुनिक पक्षियों के चेहरों  में पुराने पक्षियों की तुलना में बहुत ही अधिक विविधता है.

हड्डी की भूमिका
इस पहलु में खोपड़ी की एक हड्डी की भूमिका होती है जिसे प्रिमैक्सिला हड्डी कहते हैं. यह हड्डी पक्षी की चोंच के शीर्ष पर होती है. पुराने समय के पक्षी इसका उपयोग खाने के लिए नहीं करते थे, जबकि आधुनिक पक्षी ऐसा करते हैं. ओकॉर्नर का कहना है कि आधुनिक पक्षियों के चेहरों में विविधता का कारण ही यह प्रिमैक्सिला हड्डी है.

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शोधकर्ताओं ने पाया कि फाल्काटेक्ले और आधुनिक पक्षियों के बीच यह समानता अभिसारी उद्भव (Convergent Evolution) के कारण आई होगी जिसमें दो प्रजाति, जिनमें आपस में कोई संबंध नहीं हो एक ही तरह से एक ही तरह के गुण विकसित कर लेते हैं. फाल्काटेक्ले वे आधुनिक पक्षियों के विपरीत मैक्सिलरी हड्डी के जरिए अपनी बड़ी चोंच विकसित की थी जो कि खोपड़ी की ही एक दूसरी हड्डी है.
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