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नए अध्ययन ने खोले यूरेनस की अजीब सी कक्षा और उसके कई रहस्य

यूरेनस ग्रह (Uranus) की कक्षा इतनी मुड़ी है कि इसके इसके दिन रात घूर्णन से अप्रभावित रहते हैं. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)

यूरेनस ग्रह (Uranus) की कक्षा इतनी मुड़ी है कि इसके इसके दिन रात घूर्णन से अप्रभावित रहते हैं. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)

सौरमंडल (Solar System) के छठे ग्रह यूरेनस (Uranus) की टेढ़े अक्ष (Tilting Axis) की व्याख्या करना खगोलविदों के लिए लंबे ...अधिक पढ़ें

हाइलाइट्स

यूरेनस और नेप्च्यून ग्रह में बहुत सारी समानताएं हैं.
फिर भी यूरेनस की धुरी बहुत ही ज्यादा टेढ़ी है.
यूरेनस के अन्य गुण प्रभावित हुए बिना यह कैसे हुआ यह बड़ी पहेली है.

सौरमंडल में नेप्च्यून ग्रह से समानताएं होने के बाद भी यूरेनस ग्रह (Uranus) अपने आप में बहुत ही अनोखा है. इसमें सबसे अनोखी विशेषता उसकी घूर्णन की धुरी का टेढ़ापन (Tilting of Axis of Rotation)  है जो उनकी सूर्य की परिक्रमा की कक्षा के तल से 98 डिग्री तक का कोण बनाती है इतना ही नहीं इसका घूर्णन घड़ी की सुई की दिशा (Clockwise Rotation) में होता है, जबकि सौरमंडल के बाकी सभी ग्रह इसके विपरीत दिशा में ही घूमते हैं. लेकिन अभी खगोलविद इसकी सही और स्पष्ट कारण पता नहीं लगा सके थे. नए अध्ययन में इस अजीब बर्ताव की एक विश्सनीय व्याख्या की है.

टकराव ने बदला हाल?
इस अध्ययन में बताया गया है कि एक चंद्रमा यूरेनस से दूर चला गया जिसकी वजह वह उसकी दिशा में खिंचने लगा. यह कोई बहुत बड़ा चंद्रमा नहीं रहा होगा. इसका भार हमारी पृथ्वी के चंद्रमा के भार से आधा ही रहा होगा. लेकिन उससे भी बड़ा चंद्रमा भी इसका कारण हो सकता है.

कई प्रतिमानों से अध्ययन
फ्रांस के नेशनल सेंटर फॉर साइंटिफिक रिसर्चके खगोलविद मेलेन सैलेनफेस्ट की अगुआई में तैयार हुए शोधपत्र में इन कारणों की व्याख्या की गई है. फिलहाल यह शोधपत्र आर्काइव में प्रीप्रिंट के लिए उपलब्ध है और एस्ट्रोनॉमी एंड एस्ट्रॉफिजिक्स के लिए स्वीकर कर लिया गया है. शोधकर्ताओं ने इस व्याख्या के लिए कुछ प्रतिमानों का उपयोग किया.

सबसे करीब नतीजों वाली व्याख्या
इन प्रतिमानों में यूरेनस से विशाल पिंड के टकारव जैसे कई विकल्पों का अध्ययन किया, लेकिन उनमें सबसे अच्छी व्याख्या बहुत सारे छोटे पिंडों के टकराव ने दी. लेकिन इससे एक समस्या आई कि शोधकर्तों के लिए यूरेनस की नेप्च्यून से अनोखी  समानताओं की व्याख्या करना जरूर मुश्किल हो गया. जो खगोलविदों को शुरू से हैरान करती रही हैं.

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हैरानी की बात है कि यूरेनस (Uranus) की धुरी मोड़ने वाली घटना ने यूरेनस नेप्चूयन की समानता वाली विशेषताओं को प्रभावित नहीं किया. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)

समानताओं की समस्या
दोनों ग्रहों का भार, त्रिज्या, घूर्णन की गति, वायुमडंलीय गतिकी एवं संरचनाएं और यहां तक कि मैग्नेटिक फील्ड भी एक समान पाई जाती हैं. ये समानताएं साफ तौर पर सुझाती हैं कि ये दोनों ही ग्रह एक ही साथ पैदा हुए होंगे. फिर भी हैरानी की बात यही है कि जब एक ग्रह से किसी टकराव ने उसकी धुरी बदली होगी तब भी उनमें ये समानताएं कैसे कामय हैं.

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दूसरे पहलुओं का भी अध्ययन
इस वजह से वैज्ञानिकों को सौरमंडल के इतिहास के शुरुआत समय में एक विशाल छल्ले के तंत्र या फिर विशाल चंद्रमा के कारण ग्रह का डगमगाने, जैसी और भी कुछ व्याख्याएं खोजने का प्रयास करना पड़ा. लेकिन फिर सैनेलफेस्ट और उनके साथियों ने गुरु ग्रह पर कुछ अजीब लेकिन रोचक खोज की.

गुरु और शनि की मदद
गुरु के चंद्रमाओं के कारण उसका धुरी पिछले कुछ अरब सालों में 3 से 37 प्रतिशत तक टेड़ी हो सकती थी लेकिन चंद्रमाओं के दूर जाने की प्रक्रियाओं के कारण ऐसा नहीं हो सका. इसी तरह से उन्होंने शनि ग्रह की धुरी का अध्ययन किया जो अभी 26.7 डिग्री झुकाव लिए है. इसकी वजह शनि के चंद्रमा का तेजी से दूर जाना हो सकता है. उन्होंने पाया कि इस सब का ग्रह के घूर्णन की गति पर कोई असर नहीं होता है.

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शोधकर्ताओं ने गुरु ग्रह (Jupiter) की धुरी पर उसके चंद्रमा के प्रभावों का अध्ययन कर इस समस्या काहल निकला. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)

गुरु और शनि की मदद
गुरु के चंद्रमाओं के कारण उसका धुरी पिछले कुछ अरब सालों में 3 से 37 प्रतिशत तक टेड़ी हो सकती थी लेकिन चंद्रमाओं के दूर जाने की प्रक्रियाओं के कारण ऐसा नहीं हो सका. इसी तरह से उन्होंने शनि ग्रह की धुरी का अध्ययन किया जो अभी 26.7 डिग्री झुकाव लिए है. इसकी वजह शनि के चंद्रमा का तेजी से दूर जाना हो सकता है. उन्होंने पाया कि इस सब का ग्रह के घूर्णन की गति पर कोई असर नहीं होता है.

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टीम ने इसी तरह का सिम्यूलेशन यूरेनस ग्रह के लिए चलाया जिसमें उन्होंने एक काल्पनिक चंद्रमा के भार को शामिल किया. उन्होंने पाया पृथ्वी के चंद्रमा के आधे भार का चंद्रमा यूरेनस की धुरी को 90 डिग्री तक बदलने में सक्षम रहा होगा. ऐसा तब हो पाया होगा. शोधकर्ताओं ने अलग अलग संयोजन के यूरेनस की संभावित धुरी और घूर्णन का अध्ययन कर अपने नतीजे निकाले. लेकिन अवलोकनों के आधार पर उस चंद्रमा का पता लगाना बहुत मुश्किल काम है.

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