जानिए एक लाख गुना ज्यादा संवेदनशील Microwave Sensor, कहां लगाएगा बदलाव

नए माइक्रोवेव (Microwave)संवेदनशील सेंसर (Senor) की उपयोगिता (Applications) बहुत ही व्यापक है जो कई क्षेत्रों में क्रांतिकारी बदलाव ला सकता है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)नए माइक्रोवेव (Microwave)संवेदनशील सेंसर (Senor) की उपयोगिता (Applications) बहुत ही व्यापक है जो कई क्षेत्रों में क्रांतिकारी बदलाव ला सकता है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)
नए माइक्रोवेव (Microwave)संवेदनशील सेंसर (Senor) की उपयोगिता (Applications) बहुत ही व्यापक है जो कई क्षेत्रों में क्रांतिकारी बदलाव ला सकता है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)नए माइक्रोवेव (Microwave)संवेदनशील सेंसर (Senor) की उपयोगिता (Applications) बहुत ही व्यापक है जो कई क्षेत्रों में क्रांतिकारी बदलाव ला सकता है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)

अमेरिकी सेना (US Army) की माइक्रोवेव (Microwave) विकिरणों को बेहतर पकड़ने वाली तकनीक इलेक्ट्रॉनिक युद्ध (Electronic Warfare) और रेडियो संचार (Radio communication) को उन्नत कर देगी.

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 7, 2020, 4:34 PM IST
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अमेरिकी सेना (US Army) की सहयता से किए गए शोध से एक नया माइक्रोवेव विकरण (Microwave Radiation) सेंसर (Sensor) विकसित किया गया है. इसकी खास बात यह है कि यह अभी बाजार में उपलब्ध सेंसर्स के मुकाबले एक लाख गुना ज्यादा संवेदनशील (Sensitive) है. शोधकर्ताओं का कहना है कि माइक्रोवेव को बेहतर ढंग से पकड़ने वाली तकनीक से थर्मल इमेजिंग (Thermal Imaging), इलेक्ट्रॉनिक युद्ध (Electronic Warfare), रेडियो संचार (Radio Communication) और राडार (Radar) जैसे कई क्षेत्रों में बहुत मदद मिलेगी.

इस पदार्थ की अहम भूमिका
शोधकर्ताओं ने अपना अध्ययन नेचर जर्नल में प्रकाशित किया है. इस टीम में हार्वर्ड यूनिवर्सिटी, द इंस्टीट्यूट ऑफ फोटनिक्स साइंसेस, मसाचुसैट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, पोहांग यूनिवर्सिटी ऑफ साइंसेस एंड टेक्नोलॉजी, और रेथियोन बीबीएन टेक्नोलॉजी के वैज्ञानिक शामिल था. अमेरिकी सेना ने इसमें बोलोमीटर के निर्माण में आर्थिक सहयोग दिया जिसमें ग्राफीन (graphene) का माइक्रोवेव किरणों पर प्रतिक्रिया का उपयोग किया गया.

कितना संवेदनशील है बोलोमीटर
अमोरिकी सेना के कॉम्बैट कैपेबिलिटिज डिवेलपमेंट कमां की आर्मी रिसर्च लैबोरेटरी की आर्मी रिसर्च ऑफिर के सॉलिड स्टेट इलेक्ट्रॉनिक्स एंड इलेक्ट्रोमैग्नेटिक्स के लिए प्रोग्राम मैनेजर डॉ जो क्यू ने कहा, “इस प्रोजेक्ट के तहत विकसित किया गया माइक्रोवेव बोलोमीटर (microwave bolometer) इतना अधिक संवेदनशील है कि यह एक माइक्रोवे फोटोन तक को पकड़ने में सक्षम है जो कि ऊर्जा की सबसे छोटी मात्रा है.”


अमेरिकी सेना को होगा फायदाडॉ जो क्यू के अनुसार यह तकनीक कई क्षेत्रों में नई क्षमताएं पैदा कर सकती है जैसेकि क्वांटम सेंसिंग और राडार. इसके साथ ही इसकी मदद से अमेरिकी सेना आने वाले समय में स्पैक्ट्रल संबंधी मामलों में वर्चस्व बना सकती है.जानिए कितने उपयोगी हैं Colloidal diamonds जिन्हें विकसित करने में लग गए 30 सालक्या करता है बोलोमीटर में ग्राफीनग्राफीन बोलोमीटर सेंसर इलेक्ट्रोमैग्नेटिक विकरणों को सेंसर को फोटोन को अवशोषित होने के साथ ही बढ़ने वाले तापमान की पहचान कर लेता है.  ग्राफीन दो आयामी एक परमाणु सतह जितना मोटा पदार्थ है. शोधकर्ताओं ने बोलोमीटर की उच्च संवेदनशीलता माइक्रोवेव एंटीना में ग्राफीन की परत लगाकर हासिल की.


तापमान वृद्धि नापने में काम आई यह तकनीक
शोधकर्ताओं के मुताबिक इस तकनीक में सबसे अहम हिस्सा सुपरकंडक्टिंग जोसेफसन जंक्शन के जरिए तापमान वृद्धि को नापना है. इस दौरान एंटीना के जरिए ग्राफीन पर उच्च माइक्रोवेव विकरण की कप्लिंग को कायम रखा जाता है. इसमें कप्लिंग कारगरता बहुत अहम है क्योंकि हर फोटोन का महत्व है. जोसोफीन जंक्शन एक क्वांटम मैकेनेकल उपकरण है जो दो सुपरकंडक्टिंग इलेक्ट्रोड को एक बैरियर से अलग करता है. यह बैरियर सामान्य धातु, सेमीकंडक्टर या फेरोमैग्नेट आदि से बना हो सकता है.



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इस नई उन्नत संवेदनशीलता वाले बोलोमीटर डिटेक्टर्स इलेक्ट्रॉनिक सिग्नल संबंधी बहुत से क्षेत्र में क्रांतिकारी परिवर्तन ला सकते हैं. इसे राडार, रात को देखने में मदद करने वाले उपकरण, लिडार (Light Detection and Ranging) और संचार प्रमुख है. इसके अलावा यह नए क्षेत्रों जैसे क्वांटम विज्ञान और थर्मल इमेजिंग साथ ही डार्क मैटर की खोज में भी बहुत उपयोगी साबित हो सकता है.
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