ईरान के इन दो सीक्रेट हथियारों ने अमेरिका को डरा दिया है!

माना जा रहा है कि ईरान ने कुछ ऐसे सीक्रेट इलैक्ट्रॉनिक हथियार विकसित कर लिये हैं जो अमेरिकी सेना के सारे सैन्य सिस्टम, युद्ध पोतों, और अमेरिकी बेड़े पर लगे रडारों और हथियारों को बड़ी आसानी से निष्क्रिय कर सकता है

Sanjay Srivastava | News18Hindi
Updated: June 27, 2019, 9:20 PM IST
Sanjay Srivastava
Sanjay Srivastava | News18Hindi
Updated: June 27, 2019, 9:20 PM IST
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पहले ईरान पर हमले का आदेश दिया और फिर मुश्किल से 20 मिनट के भीतर अपने कदम वापस खींच लिये. पूरी दुनिया हैरान रह गई कि ट्रंप ने ऐसा क्यों किया. इसकी वजह क्या थी. ताजातरीन रिपोर्ट्स पर गौर करें तो लगता है कि अमेरिका, ईरान के दो सीक्रेट हथियारों से आशंकित है.

जब से खाड़ी में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव शुरू हुआ. तो लोग मानने लगे कि युद्ध तो होकर रहेगा. हैरानी इस बात की है कि ईरान के नेता झुकने की जगह ट्रंप की हर धमकी का मुंहतोड़ जवाब दे रहे हैं. बल्कि उन्होंने अमेरिका के अत्याधुनिक ड्रोन को भी मार गिराया.

ईरान का कहना था कि ये विमान उनकी सीमा में घुस आया था. कोई और देश होता तो ट्रंप की अमेरिकी सेना तुरंत उसके हाथ उमेठ चुकी होती लेकिन ईरान के खिलाफ ऐसा नहीं हो पाया. क्यों नहीं पाया?  कोई बात तो है, जिससे अमेरिका हिचक रहा है. साथ ही ये सवाल भी मौजूं है कि आखिर किस आशंका के चलते अमेरिका ने ईरान पर हमला करने का फैसला टाला.

ईरान ने विकसित कर लिये हैं खुफिया हथियार

जर्मन खुफिया एजेंसी बावरिया और एक लेबनान अखबार का मानना है कि ईरान ने ऐसे दो सीक्रेट हथियार विकसित कर लिये हैं, जिससे अमेरिकी की नींद उड़ी हुई है. अमेरिका को अहसास है कि अगर उसने हमला किया तो ईरान से मुंहतोड़ जवाब मिलेगा, जो बहुत भारी भी बैठ सकता है.

फिर अमेरिका को उसकी खुफिया एजेंसियों ने ये जरूर बताया होगा कि ईरान के पास जो दो सीक्रेट हथियार हैं, वो कैसे हैं.  इस बीच ईरानी सेना की एक कमांड आईआरजीसी ने चेतावनी दी कि ईरान अपने खुफिया हथियार से अमेरिका की नकेल कस देगा. इसके बाद से ही ये सवाल पूरी दुनिया में पूछा जा रहा है कि ईरान के पास वो खुफिया हथियार कौन सा है और ये क्या कर सकता है.

अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने पहले तो ईरान के खिलाफ हमले के आदेश दिए और फिर कुछ ही मिनटों में इसे वापस ले लिया

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कैसे हैं ये दो खुफिया हथियार 
इन दोनों सीक्रेट हथियारों का खुलासा लेबनान के एक समाचार पत्र अलबेना ने किया है. उसने छापा है कि ईरानियों के पास दो तरह के हथियार हैं एक विशेष प्रकार के हथियार हैं जो किसी बड़े युद्ध तक खुफिया ही रहेंगे. ये अंडरग्राउंड हैं.

दूसरी तरह के हथियार वो हैं जो प्रचलित हैं, जिनसे बड़ी शक्तियां अवगत हैं, यानि न्यूक्लियर, केमिकल और बॉयोलॉजिकल. ब्रिटेन के अखबार एक्सप्रेस ने भी पिछले दिनों खबर छापी थी कि ईरान बड़े पैमाने के विध्वंसक हथियार को विकसित करने में लगा है.

अब माना जा रहा है कि रूस की मदद से उसने कई तरह के विनाशकारी हथियार विकसित कर लिये हैं. उसके पास हथियारों का बड़ा जखीरा है.

बड़े देशों के पास है ईरान के सीक्रेट हथियारों की जानकारी
लेबनानी समाचार पत्र ने अनुसार, "ईरान के पास जो विशेष प्रकार का हथियार है, उसकी जानकारी अमेरिका, ब्रिटेन, जर्मनी और फ्रांस जैसे बड़े देशों के पास है. माना जाता है कि ईरान के पास वास्तव में एरिया डिनाइल वेपन यानि A2 / AD जैसे इलेक्ट्रानिक हथियार हैं. ईरान (A2/AD Anti Access/Anti Denial ) रक्षा रणनीति द्वारा अमेरिकी विमानवाहक पोत को तारपीडो, क्रूज़ और बैलेस्टिक मिसाइलों से निशाना बना सकता है.

हाल के बरसों में ईरान के कुछ विध्वंसकारी हथियार विकसित किये हैं


इलैक्ट्रॉनिक युद्ध में इस्तेमाल होते हैं ऐसे हथियार 
वास्तव में ये हथियार,इलेक्ट्रानिक युद्ध में इस्तेमाल होते हैं, इनकी मदद से इलैक्ट्रॉनिक कार्रवाई से दुश्मन को नुक़सान पहुंचाया जाता है. इस युद्ध को भिन्न देशों में अलग-अलग नामों से जाना जाता है. जहां तक ईरान का संबंध है तो अमेरिकी विशेषज्ञों भी मानते हैं कि ईरान, साइबर अटैक के क्षेत्र में दुनिया के अत्याधुनिक देशों में शामिल है.

लेबनानी समाचार पत्र लिखता है कि ईरान ने इलैक्ट्रॉनिक युद्ध में अपनी दक्षता दिसंबर 2011 में तब साबित कर दी थी, जब उसने अमेरिका के अत्याधुनिक जासूसी ड्रोन विमान RQ-170 को अपनी पूर्वी सीमा में घुसते ही काबू में कर लिया था. फिर सुरक्षित रूप से उसे ज़मीन पर उतारा था.हाल में भी ईरान ने जब आधुनिकतम ड्रोन RQ-4 को मार गिराया तो भी अमेरिकी सैन्य अधिकारियों को विश्वास नहीं हुआ कि ईरान ऐसा कर सकता है.

अलबेना ने ये भी लिखा, इलैक्ट्रानिक युद्ध का दूसरा उदाहरण 12 अप्रैल सन 2014 में उस समय देखने को मिला जब रूसी बमवर्षक विमानों ने इलैक्ट्रॉनिक हमला करके अमेरिकी युद्धपोत डोलाल्ड कॉक को बेकार कर दिया था. वो बस पानी पर तैरता लोहे का एक टुकड़ा रह गया था.

ईरान के पास जो दो खास तरह के सीक्रेट हथियार बताए जा रहे हैं, उनमें एक इलैक्ट्रॉनिक हथियार हैं


रूसी हथियारों से मिलते जुलते हैं ये हथियार
ईरान से जुड़ी पार्सटुडे डॉट कॉम साइट कहती है कि अमेरिकी विशेषज्ञों का मानना है कि ईरानियों के इलैक्ट्रॉनिक हथियार, रूसी हथियारों से मिलते जुलते हैं. शायद इन्ही हथियारों का पता चलने के बाद ट्रंप को हमले की घोषणा के बाद कदम वापस खींचने पड़े. इसी के बाद ट्रंप ने ईरान के खिलाफ युद्ध की भड़काऊ बयानबाजी भी रोक दी.
लेबनानी समाचार पत्र के अनुसार, ईरान की क्षमताओं की जानकारी रखने वाले अमेरिकियों ने जरूर ट्रंप को ईरान की क्षमताओं के बारे में बताया और ये भी बताया कि किस तरह ईरान अपने सीक्रेट इलैक्ट्रानिक हथियारों से फारस की खाड़ी में अमेरिकी युद्ध पोतों को निष्क्रिय कर सकता है. केवल यही नहीं वो अमेरिकी बेड़े पर लगे सभी रडारों और हथियारों को बड़ी आसानी से निष्क्रिय कर सकता है.

ईरान के हथियार भंडार में हर तरह के हथियारों का बड़ा जखीरा है और मजबूत सेना


जर्मन खुफिया एजेंसी के पास थी ऐसी खबर
पिछले दिनों लंदन के एक अखबार एक्सप्रेस ने भी खबर छापी थी कि ईरान ऐसा हथियार विकसित करने की कोशिश में है, व्यापक विध्वंस कर सके. अखबार ने जर्मन खुफिया सूत्रों के जरिए ये खबर प्रकाशित की. जर्मन खुफिया विभाग का मानना है कि ईरान ने परंपरागत हथियारों के साथ कुछ अलग तरह के हथियार भी विकसित कर लिये हैं.
माना जाता है कि पिछले कुछ सालों में ईरान ने रूस की मदद से हथियार विकसित करने की दिशा में जबरदस्त काम किया है. शायद अमेरिका को इसकी भनक भी है. जर्मनी की खुफिया एजेंसी बावरिया को क्षमता के मामले में ब्रिटेन की जासूसी एजेंसी एम15 के बराबर रखा जाता है. उसका कहना है कि ईरान एटामिक, बॉयोलॉजिकल, केमिकल हथियारों की बड़े श्रृंखला तैयार कर ली है.
ईरान के आत्मविश्वास का अंदाज इससे भी लगाया जा सकता है कि ईरान के सर्वोच्च नेता ने ना केवल अमेरिका से बात करने से मना कर दिया बल्कि दो-टूक कहा कि वो अमेरिका से डरने वाला नहीं. अगर अमेरिका ने हमला किया तो पछताएगा.

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First published: June 27, 2019, 9:01 PM IST
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