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US-Iran Conflict: डोनाल्ड ट्रंप के तेवर ढीले तो दिख रहे हैं लेकिन बदला अब भी लेगा अमेरिका

Vivek Anand | News18Hindi
Updated: January 9, 2020, 4:34 PM IST
US-Iran Conflict: डोनाल्ड ट्रंप के तेवर ढीले तो दिख रहे हैं लेकिन बदला अब भी लेगा अमेरिका
ईरान पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने तेवर ढीले किए हैं

बुधवार को जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) देश को संबोधित करने आए तो उनके तेवर ढीले थे. वो शांत थे. डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि वो ईरान (Iran) के खिलाफ सैन्य कार्रवाई (Military Operation) पर विचार नहीं कर रहे हैं...

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  • Last Updated: January 9, 2020, 4:34 PM IST
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अमेरिका (America) और ईरान (Iran) के बीच तकरीबन युद्ध (War) जैसे हालात बन गए थे. ईरान की कुद्स आर्मी के प्रमुख कासिम सुलेमानी (Qassim Soleimani) के अमेरिकी हवाई हमले में मारे जाने के बाद ईरान उबाल पर था. इसके बाद उसने बदले की कार्रवाई करते हुए इराक में अमेरिकी दूतावास को निशाना बनाकर दर्जनों मिसाइलें दागी. अमेरिका के खिलाफ ईरान की इस कार्रवाई के बाद ऐसा लग रहा था कि दोनों देशों के बीच तनाव और बढ़ेगा और कहीं न कहीं ये तीसरे विश्वयुद्ध की शक्ल ले सकता है. लेकिन ऐसा नहीं हुआ.

बुधवार को जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप देश को संबोधित करने आए तो उनके तेवर ढीले थे. वो शांत थे. डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि वो ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई पर विचार नहीं कर रहे हैं. ईरान पर कड़े प्रतिबंध लगाकर उसे दंडित किया जाएगा. डोनाल्ड ट्रंप के सुर बदले हुए थे.

ऐसा साफ प्रतीत हो रहा था कि उन्होंने ईरान को लेकर अपनी रणनीति बदल ली है. अब सवाल उठता है कि क्या अमेरिका ने ईरान के आगे हथियार डाल दिए हैं या फिर अमेरिका बदले की किसी और रणनीति पर काम कर रहा है? और सबसे बड़ा सवाल कि आखिर सबसे ताकतवर मुल्क के राष्ट्रपति के तेवर ईरान के सामने ढीले क्यों पड़ गए?



ईरान के खिलाफ क्यों नरम पड़े डोनाल्ड ट्रंप



सबसे बड़ी बात ये है कि अमेरिका ने ईरान के आर्मी जनरल कासिम सुलेमानी को हवाई हमले में मार जरूर डाला था. लेकिन इसको लेकर कहीं से भी ट्रंप प्रशासन को समर्थन नहीं मिल रहा था. अमेरिका के मित्र राष्ट्र इस मसले पर उसके साथ खड़े नहीं थे. इजरायल तक ने मुंह मोड़ लिया था. कुछ अमेरिकी सीनेटर ने ट्रंप प्रशासन की ईरान में कार्रवाई का विरोध करते हुए कहा कि उन्होंने बिना कांग्रेस को सूचना दिए ऐसा कदम क्यों उठाया.

us iran conflict donald trump attitude seems loose but america will still take revenge
ईरान की जनता में अमेरिका के खिलाफ जबरदस्त गुस्सा है


ईरान के मामले पर डोनाल्ड ट्रंप फंस चुके थे. हालांकि उन्हें अमेरिकी जनता के सामने सीना ताने खड़ा दिखना था. इसलिए उन्होंने ट्वीट भी किया कि ‘ऑल इज वेल. अमेरिका के पास दुनिया की सबसे ताकतवर आर्मी है.’ लेकिन ये मामला ट्रंप के हाथ से इतना निकल चुका था कि अब अमेरिकी कांग्रेस राष्ट्रपति के युद्ध संबंधी अधिकारों की कटौती पर प्रस्ताव पारित करने वाली है.

गुरुवार को इस प्रस्ताव पर वोटिंग होनी है. अमेरिका की प्रतिनिधि सभा की स्पीकर नैंसी पेलोसी का कहना था कि युद्ध के हालात में प्रशासन को कांग्रेस को पूर्व सूचना या तुरंत जानकारी देनी चाहिए और इसके तुरंत बाद हिंसा रोकने की प्रभावी रणनीति पर काम किया जाना चाहिए. ईरान में अमेरिकी कार्रवाई को अंजाम देते वक्त ट्रंप प्रशासन ने ऐसा नहीं किया.

तो क्या अब ईरान से बदला नहीं लेगा अमेरिका?
ऐसा भी नहीं है कि अमेरिका अब ईरान के खिलाफ कार्रवाई नहीं करेगा. अमेरिकी अखबार न्यूयॉर्क टाइम्स ने लिखा है कि ऐसा नहीं है कि डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान से जंग में अपने हाथ खींच लिए हैं. लेकिन ट्रंप प्रशासन अब बदली हुई रणनीति पर काम कर रहा है. मौजूदा हालात में अमेरिका और ईरान दोनों ही देश आमने-सामने की जंग नहीं चाहते. ऐसा होने पर पूरी दुनिया को भयानक नतीजे भुगतने होंगे.

वाशिंगटन पोस्ट ने लिखा है कि ईरान भी अमेरिका के साथ सीधी जंग नहीं चाहता. तेहरान के पास सीमित उपाय हैं. उसे अपनी सरकार की स्वीकार्यता भी बनाए रखनी है और अपने सबसे ताकतवर आर्मी जनरल की शहादत का बदला भी लेना है. इसलिए ईरान सिर्फ अपनी जनता के सामने कुछ करते हुए दिखना चाहता है. ईरान के मिसाइल अटैक में एक भी अमेरिकी सैनिक को नुकसान नहीं पहुंचा. यहां तक कि मीडिया रिपोर्ट के हवाले से दिखाया गया कि ईरान जिस अमेरिकी एयरबेस पर हमले का दावा कर रहा था, मिसाइल उसकी कंपाउंड तक नहीं पहुंच पाए.

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ईरान ने इराक में अमेरिकी बेस पर हमले किए हैं


ईरान का अमेरिकी एयरबेस पर मिसाइल दागना अपनी जनता के गुस्से को शांत करने के लिए दिखावे की कार्रवाई के तौर पर बताया जा रहा है. हालांकि ऐसा भी नहीं है कि ईरान बदला नहीं लेगा. लेकिन इसके लिए वो प्रॉक्सी वार का सहारा लेगा. ईरान जानता है कि वो सीधी लड़ाई में अमेरिका से जीत नहीं सकता. इसलिए वो लेबनान, सीरिया और यमन जैसे देशों की मदद से अमेरिका के खिलाफ प्रॉक्सी वार चलाएगा.

इरान से बदला लेने की अब क्या होगी अमेरिकी रणनीति
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अपनी जनता के सामने खुद को मजबूत राष्ट्रपति दिखाने के लिए ईरान में कार्रवाई को अंजाम दिया. हालांकि उनका दांव उन्हीं पर भारी पड़ता दिख रहा है. न्यूयॉर्क टाइम्स ने लिखा है कि डोनाल्ड ट्रंप को शायद लग रहा था कि ईरान के खिलाफ कोई सख्त कदम नहीं उठाए जाने की सूरत में वो जनता के सामने कमजोर राष्ट्रपति न मान लिए जाएं. चुनावी साल में ऐसी छवि उनके लिए नुकसानदेह होती. इसलिए ट्रंप प्रशासन ने ऐसा कदम उठाया.

अब दांव उलटा पड़ता देखकर उन्होंने अपनी रणनीति बदल ली है. अमेरिका अब ईरान के खिलाफ कड़े प्रतिबंध लगाएगा. अमेरिका, यूरोपीय देशों को ईरान के खिलाफ कड़े प्रतिबंध लगाने को राजी करेगा. नाटो देशों को ईरान के खिलाफ साथ मिलाने की कोशिश करेगा. यूरोपीय देशों को ईरान के साथ व्यापार बंद करने को राजी करने में अमेरिका को काफी मशक्कत करनी पड़ सकती है. लेकिन अगर अमेरिका ऐसा करने में कामयाब हो जाता है तो वो ईरान को आर्थिक तौर पर बर्बाद कर सकता है.

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ईरान के मसले पर अमेरिका ने अपनी रणनीति में बदलाव के संकेत दिए हैं


बुधवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर अपनी नई रणनीति का संकेत देते हुए बताया कि 'उनकी नई नीति दरअसल पुरानी रणनीति है. जब तक ईरान अपनी हरकतें नहीं बदलता, उस पर कड़े प्रतिबंध जारी रहेंगे.'

अमेरिका मिडिल ईस्ट में अपने सैनिकों की संख्या बढ़ा रहा है. उसे मिडिल ईस्ट में अपने तेल के टैंकर की रक्षा भी करनी है. ईरान उनको निशाना बना सकता है. डोनाल्ड ट्रंप से सबसे बड़ी गलती ये हो गई कि उन्होंने ईरान पर सबसे बड़ी कार्रवाई शुरू करने से पहले अपने मित्र राष्ट्रों को भरोसे में नहीं लिया. अब अमेरिका की कोशिश होगी कि वो ईरान के खिलाफ उन सब देशों को अपने भरोसे में लें.

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First published: January 9, 2020, 2:07 PM IST
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