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जापानी यात्री को चांद पर भेजने को लेकर क्या संकेत दे रहे हैं जो बाइडन

बाइडन (Joe Biden) ने कहा है कि वे चाहते हैं कि अमेरिका और जापान की यात्री चंद्रमा की सतह पर दिखाई दें (सांकेतिक तस्वीर: lev radin /shutterstock)

बाइडन (Joe Biden) ने कहा है कि वे चाहते हैं कि अमेरिका और जापान की यात्री चंद्रमा की सतह पर दिखाई दें (सांकेतिक तस्वीर: lev radin /shutterstock)

अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन (Joe Biden) ने क्वाड सम्मेलन के लिए अपनी जापान (Japan) यात्रा के दौरान संकेत दिया है कि चंद्रमा (Moon) पर जापानी अंतरिक्ष यात्री जा सकता है. यह ऐलान बताता है कि अमेरिका आने वाले समय में अपने अभियानों में अपने सहयोगियों की भागीदारी बढ़ाना चाहता है. भावी अंतरिक्ष प्रतिस्पर्धा को देखते हुए अमेरिका अपनी भूमिका को भी नई दिशा देना चाहता है.

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    हाल ही में जापान (Japan) के टोक्यो में क्वाड सम्मेलन हुआ. वैसे तो इस सम्मेलन क्वाड देशों के सहयोग और उनके समक्ष चुनौतियों से निपटने पर चर्चा हुई. लेकिन इस दौरे पर अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन (Joe Biden) ने संकेत दिया कि नासा के आर्टिमिस अभियान (Artemis Mission of NASA) में जापानी अंतरिक्ष यात्री भी शामिल हो सकते हैं. खुद जापानी प्रधानमंत्री फुमियो किशिदा ने दोनों देशों में चंद्र अभियानों पर सहयोग और जापानी अंतरिक्ष यात्रियों के चंद्रमा की कक्षा में बनने वाले लूनार गेटवे पर काम करने का ऐलान किया. ये ऐलान और संकेत अमेरिका और जापान के अंतरिक्ष सहयोग के अलावा कुछ और भी बातों को रेखांकित करते दिख रहे हैं.

    जापान के साथ पुराने संबंध
    जापान कई देशों की तरह अमेरिका के आर्टिमिस समझौते से तो जुड़ा है, लेकिन वह अमेरिका का विशेष सहयोगी भी है. आर्टिमिस समझौते की अवधारणा से पहले ही दोनों ही देशों की स्पेस एजेंसियां एक दूसरे की सहयोगी रही हैं. जापान की एजेंसी जाक्सा और नासा के कई तरह के अभियानों में भागीदारी रही है. खुद जो बाइडन ने अपने बयान में जापान और और अमेरिका के संबंधों में मजबूती आने की बात कही.

    चंद्रमा की सतह पर जापानी?
    बाइडन ने इस बयान में बताया कि कैसे चंद्रमा की सतह पर उतरने वाला पहले जापानी अंतरिक्ष यात्री नासा के आर्टिमिस अभियान में योगदान देगा. वहीं नासाके प्रशासक बिल नेल्सन ने एक बयान में कहा कि जापान और अमेरिका की साझी महत्वकांक्षा है कि दोनों देशों के अंतरिक्ष यात्री एक साथ चंद्रमा पर पृथ्वी पर मानवता के लिए अंतरिक्ष अंवेषण संबंधी दोनों देशों के साझा मूल्यों को जिम्मेदारी और पार्दर्शिता से प्रतिबिम्बित करें.

    अमेरिका का नजरिया
    नेल्सन ने जोर देकर कहा की बाइडन के ऐलान से सिद्ध होता है कि अमेरिका इसमें अकेला नहीं हैं . दुनिया के कई देश अंतरिक्ष में निवेश और अन्वेषण करना चाहते हैं. वे ऐसे देशों के साथ इस क्षेत्र में निवेश करना चाहते हैं जो विज्ञान और आर्थिक अवसरों को महत्व देते हैं और समान मूल्यों को साझा करते हैं.

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    अमेरिका और जापान की अंतरिक्ष सहयोग आर्टिमिस अभियान (Artemis Mission) से काफी पहले से गहरा है. (तस्वीर: NASA)

    नई अंतरिक्ष प्रतिस्पर्धा की ओर
    लेकिन अमेरिका के साथ राजनैतिक कारणों से चीन और रूस जैसे देश साथ नहीं आ रहे हैं. जहां अमेरिकी की चीन से खुद सहयोग करने की इच्छा नहीं दिखती है, वहीं रूस ने स्पष्ट तौर पर आर्टिमिस समझौते पर असहमति जताते हुए अमेरिका से दूरी बनाई है और अब रूस यूक्रेन युद्ध के बाद तो हालात और खराब हो गए हैं.  वहीं चीन के अंतरिक्ष में तेजी से बढ़ते कदम एक तरह की नई अंतरिक्ष प्रतिस्पर्धा की ओर संकेत कर रहे हैं.

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    दो धुरों में बंटता अंतरिक्ष क्षेत्र
    हाल के कुछ सालों में अंतरिक्ष का क्षेत्र दो धुरों में बंटता दिख रहा है. एक तरफ अमेरिका और उसके सहयोगी देश हैं तो दूसरी ओर चीन और रूस अपने अलग सहयोगी बना रहे हैं. वहीं भारत जैसे देश भी हैं जो अमेरिका और रूस दोनों से अंतरिक्षीय सहयोग ले रहा है. शीत युद्ध के बाद अमेरिका भले ही एकमात्र बड़ी महाशक्ति के रूप में उभरा हो, लेकिन अब वे धीरे धीरे समावेशी अंतरिक्ष नीति की ओर भी बढ़ रहा है. इसमें जापान, ऑस्ट्रेलिया जैसे कई देश शुरू से उसके साथी रहे हैं और आर्टिमिस समझौते के बाद यह सहयोग मजबूत हुआ है.

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    चंद्रमा (Moon) पर आने वाले सालों में बहुत सी गतिविधियां देखने को मिलने वाली हैं. (तस्वीर: NASA)

    आगे भी होगा सहयोग
    जापान अमेरिका की इस भागीदारी में कई अभियान पहले से ही काम कर रहे हैं. बाइडन ने ऐलान किया कि नासा के ओसाइरस अभियान से साल 2023 तक धरती पर आने बेनू क्षुद्रग्रह के नमूनों जापान से साझा किए जाएंगे. बदले में जापान भी हायाबुसा 2 के क्षुद्रग्रह नमूने अमेरिका से साझा करेगा. इससे पहले दोनों देश इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन में भी मिल कर काम कर चुके हैं.

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    चंद्रमा आने वाले समय में अंतरिक्ष अन्वेषण का एक प्रमुख केंद्र बनने वाला है. नासा अपना एक बेस कैम्प वहां स्थापित करने जा रहा है, जिसे मंगल यात्रियों के लिए भी उपयोग में लाया जाएगा. वहीं रूस और चीन ने भी अगले कुछ सालों में चंद्रमा पर एक रिसर्च स्टेशन बनाने का समझौता किया है. चीन भी चंद्रमा पर अपने यात्रा भेजने की तैयारी में है. अमेरिकी निजी कंपनियों भी चंद्रमा पर पर्यटन की संभावनाएं तेजी से तलाश रही हैं. ऐसे में आने वाले समय में चंद्रमा अंतरिक्ष प्रतिस्पर्धा का एक बड़ा अखाड़ा बन सकता है.

    Tags: Japan, Joe Biden, Moon, Nasa, Research, Space, USA, World

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