जानिए अमेरिका में आसान क्यों नहीं होगा वोट देना

अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव (US presidential Election) में इस बार मतदाताओं (voters) को कई तरह की चुनौतियों का सामना करना होगा.
अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव (US presidential Election) में इस बार मतदाताओं (voters) को कई तरह की चुनौतियों का सामना करना होगा.

अमेरिका (USA) में अगले महीने राष्ट्रपति चुनाव (Presidential Election) के लिए मतदान (Voting) होना है. कोरोना काल में मतदाताओं को लिए वोट डालना मुश्किल हो सकता है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 22, 2020, 3:20 PM IST
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पूरी दुनिया में कोरोना वायरस (Corona Virus) का इलाज और वैक्सीन आने में समय लग रहा है. तब तक लोगों को मास्क, सोशल डिस्टेंसिंग और अन्य रोकथाम के उपायों पर निर्भर रहना पड़ेगा. ऐसे में उत्सव मानना एक बहुत ही मुश्किल काम है. सरकारें उत्सवों पर लगाम कस सकती है, लेकिन क्या होगा जब यह उत्सव सरकार का ही हो जैसे की चुनाव (Election). यह संकट अमेरिका (USA) में अगली महीने की शुरुआत में ही आने वाला है क्योंकि आगामी 3 नवंबर को ही अमेरिका में राष्ट्रपति चुनाव (Presidential Election) के लिए मतदान  है.  कोरोना के खतरे को देखते हुए इसबार इस चुनाव में वोट डालना (Votinig) आसान नहीं होगा यह अब निश्चित होता जा रहा है.

चुनाव की चुनौतियां
आमतौर पर नागरिकों को वोट डालने के लिए मनाने के लिए चुनावी उम्मीदवारों तक को मेहनत करनी होती है. इसमें सबसे लंबी चुनौती कतरों में लगना , पोलिंग बूथ तक सीमित पहुंच और भी कई तरह की चुनौतियां हैं जिससे दो चार होना अमेरिका जैसे देश तक में नहीं छूट पाता है. इसके बाद इस बार तो कोरोना महामारी का होना तो करेला और नीम चढ़ा के से हालात पैदा करने वाला हो सकता है.

लॉकडाउन का असर
लॉकडाउन के कारण इस बार बूथ कार्यकर्ताओं की कमी तो हीगी ही, साथ ही बूथ पर कार्य करने वाले लोगों की कमी भी होना तय है. यह चुनाव प्रबंधन के लिए मुश्किलें तो खड़ी करेगा ही, लोगों को भी वोट डालने के लिए परेशानी का समाना करना पड़ सकता है. अमेरिका में इस तरह के खतरों से बचने के लिए कई राज्यों ने वोटिंग पाबंदियों में ढील देने की बात कही है. लेकिन इसके बाद भी लोगों के लिए वोट डालना इस बार कुछ मुश्किल काम हो सकता है.



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लाइन में लगना
जॉर्जियों में हजारों मतदाताओं शुरू में वोट डालने के लिए को घंटों तक लाइन में लगना पड़ा था इसमें पोलिंग बूथों की कम संख्या, बूथ में काम करने वालों की कमी, कम्प्यूटर में समस्या जैसी परेशानी भी शामिल थी. मसैचुसैट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के एक सर्व के मुताबिक गैर गोरे वोटर्स ने 2016 में वोट देने के लिए औसतन 16 मिनट तक इंतजार किया था. जबकि सफेद वोटर्स ने केवल 10 मिनट तक इंतजार किया था. इसके अलावा रोज ही वेतन वालों को कोई मुआवजा नहीं दिया गया जिन्हें वोट देने के लिए लंबे समय तक लाइन में लगना पड़ा. कोरोना काल में लाइन लगने के नए नियम होंगे और वह इंतजार बढ़ा सकते हैं.

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प्रिंट आउट और यह नियम
इतना ही नहीं मतदातों के लिए वोट देने के लिए एक फॉर्म का प्रिंटआउट निकालना आवश्यक होना भी उन लोगों के लिए मुश्किलें पैदा करेगा जिनके पास प्रिंटर नहीं है इसमें सभी गरीब मतदाता आ जाएंगे. इसी तरह से पेनसिलवानिया के स्टेट सुप्रीम कोर्ट यह नियम लागू किया है कि बिना गुप्त लिफाफे में जिसमें मतदाता की पहचान छुपाई गई हो, डाक से भेजे गए मत अवैध घोषित कर दिए जाएंगे. मतदान के लिए कम रह गए समय के लिहाज से यह फैसला एक और परेशानी का कारण हो सकता है.

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वोट देने के लिए सफर
अमेरिका के ग्रामीण क्षेत्रों में मतदाताओं को पोलिंग बूथ पर पहुंचने के लिए घंटों गाड़ी चला कर जाना पड़ सकता है. इसकी वजह साफ है, अमेरिकी के क्षेत्रफल काफी बड़ा है और वहां कि जनसंख्या भारत की तुलना में काफी कम ऐसे में वहां पोलिंग बूथों की संख्या इतनी अधिक नहीं हो सकती है जैसा की भारत में संभव हो जाता है क्यों कि भारत के पास कर्मचारियों की उपलब्धता है. यही वजह है कि कहीं कहीं 10-15 मतदातों के लिए पोलिंग बूथ दूर हो सकते हैं.

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इसके अलावा वोटर आईडी का आवश्यक होना और अन्य मतदान कानून भी कई मतदाताओं के लिए वोट डालने के लिए मुश्किलें पैदा कर सकते हैं. लेकिन विशेषज्ञ इसे बड़ी समस्या नहीं मानते, उन्हें कोरोना के कारण बहुत सी बड़ी समस्याएं पैदा होने की आशंका दिख रही है.
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