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चाइल्ड पॉर्नोग्राफी पर चिंताजनक रिपोर्ट, देश में बन रहे हैं हजारों अश्लील वीडियो

चाइल्ड पॉर्नोग्राफी पर चिंताजनक रिपोर्ट, देश में बन रहे हैं हजारों अश्लील वीडियो

एक अमेरिकी संस्था ने भारत में चाइल्ड पॉर्नोग्राफी को लेकर चिंताजनक रिपोर्ट जारी की है (प्रतीकात्मक तस्वीर)

एक अमेरिकी संस्था ने भारत में चाइल्ड पॉर्नोग्राफी को लेकर चिंताजनक रिपोर्ट जारी की है (प्रतीकात्मक तस्वीर)

एक अमेरिकी संस्था की रिपोर्ट के मुताबिक पिछले 5 महीने में 25 हजार संदिग्ध चाइल्ड पॉर्नोग्राफिक मैटेरियल्स (Child Pornographic Materials) को भारत में सोशल मीडिया (Social Media) पर अपलोड किया गया. चाइल्ड पॉर्नोग्राफी पर ये चिंताजनक रिपोर्ट है...

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    भारत में बढ़ते पॉर्नोग्राफिक्स मैटेरियल्स (Pornographic materials) पर चिंता जाहिर की जाती रही है. इसे रोकने के लिए सरकार ने कदम भी उठाए हैं. लेकिन ताजा आंकड़ा बताता है कि इसे लेकर कुछ और सख्त कदम उठाने की जरूरत है. खासकर चाइल्ड पॉर्नोग्राफिक्स मैटेरियल्स (Child Pornographic Materials) को लेकर. एक रिपोर्ट के मुताबिक भारत में पिछले 5 महीने में 25 हजार संदिग्ध चाइल्ड पॉर्नोग्राफिक्स मैटेरियल्स सोशल मीडिया (Social Media) पर अपलोड किए गए हैं.

    एक अमेरिकी संस्था नेशनल सेंटर फॉर मिसिंग एंड एक्सप्लॉयटेड चिल्ड्रेन ने ये आंकड़ा नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो के साथ शेयर किया है. 5 महीने में 25 हजार संदिग्ध चाइल्ड पॉर्नोग्राफिक्स मैटेरियल्स का सोशल मीडिया पर अपलोड किया जाना, बहुत बड़े खतरे की घंटी है. इससे पता चलता है कि भारत में चाइल्ड पॉर्नोग्राफी कितनी बड़ी समस्या बन चुका है.

    दिल्ली में सबसे ज्यादा चाइल्ड पॉर्नोग्राफी को सोशल मीडिया पर अपलोड करने के मामले
    गृहमंत्रालय के एक अधिकारी ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया है कि चाइल्ड पॉर्नोग्राफी मैटेरियल्स को सोशल मीडिया पर अपलोड करने के मामले में दिल्ली पहले नंबर पर है. रिपोर्ट के मुताबिक दिल्ली में सबसे ज्यादा मामले पाए गए हैं. इसके बाद महाराष्ट्र, गुजरात, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल का नंबर आता है. इन सारे राज्यों में चाइल्ड पॉर्नोग्राफी के सोशल मीडिया पर अपलोड करने के सबसे ज्यादा मामले सामने आए हैं.

    इस बारे में राज्यवार आंकड़ा उपलब्ध नहीं करवाया गया है लेकिन इंडियन एक्सप्रेस को महाराष्ट्र के एक आईपीएस अधिकारी ने बताया कि महाराष्ट्र के साइबर यूनिट ने एनसीआरबी को ऐसे 1700 मामलों के बारे में जानकारी दी है. बताया जा रहा है कि रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई भी हुई है. ऐसे मामलों की एफआईआर दर्ज हुई है और गिरफ्तारियां भी हुई हैं.

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    दिल्ली में सबसे ज्यादा चाइल्ड पॉर्नोग्राफी मैटेरियल्स सोशल मीडिया पर अपलोड करने के मामले सामने आए हैं


    चाइल्ड पॉर्नोग्राफी को लेकर हैं सख्त कानून
    महाराष्ट्र की पुलिस ऐसे मामलों से निपटने के लिए ऑपरेशन ब्लैक फेस चला रही है. वहां इस तरह के मामलों को संवेदनशीलता से निपटाया जा रहा है. महाराष्ट्र में सबसे ज्यादा मामले मुंबई, पुणे और ठाणे जैसे शहरी इलाकों से सामने आए हैं. इसमें कार्रवाई भी की गई है. लेकिन महराष्ट्र के ऑपरेशन ब्लैक फेस की तरह के ऑपरेशन दूसरे राज्यों में भी चलाने की जरूरत है.

    चाइल्ड पॉर्नोग्राफिक मैटेरियल्स को लेकर पिछले साल कानून को और सख्त किया गया है. पिछले साल जून में प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्रेन फ्रॉम सेक्सुएल ऑफेंसेस यानी पॉक्सो संशोधन बिल 2019 लाया गया था. इसमें चाइल्ड पॉर्नोग्राफी की परिभाषा को ज्यादा विस्तार दिया गया है. अब बच्चों के किसी भी तरह के आपत्तिजनक वीडियो, तस्वीर, कंप्यूटर से बनाई तस्वीर, किसी तरह का कैरिकेचर, आपत्तिजनक मोडिफाइड तस्वीर, जो बच्चे का गलत चित्रण करती है, को पॉक्सो एक्ट में शामिल किया गया है.

    अब जो नए मामले सामने आ रहे हैं, इसमें संशोधन के हिसाब से सेक्शन लगाए जा रहे हैं. बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंतित सरकार कदम भी उठा रही है. लेकिन ऐसे मामले बढ़ते ही जा रहे हैं.

    संसद में उठा था चाइल्ड पॉर्नोग्राफी का मामला
    नवंबर 2019 में चाइल्ड पॉर्नोग्राफी का मामला संसद में भी उठा था. इस पर जवाब देते हुए महिला एवं बाल विकास मंत्री स्मृति ईरानी ने कहा था कि सरकार ने चाइल्ड पॉर्नोग्राफिक्स मैटेरियल दिखाने वाले 377 वेबसाइट को बैन किया है. इस मामले में 50 एफआईआर दर्ज की गई है.

    चाइल्ड पॉर्नोग्राफी को रोकने के लिए सीबीआई ने बाकायदा एक अलग यूनिट बनाई है. पिछले साल नवंबर महीने में ही सीबीआई ने ऑनलाइन चाइल्ड सेक्सुएल अब्यूज एंड एक्सप्लॉयटेशन प्रिवेंशन एंड इनवेस्टिगेशन यूनिट बनाई. इसका काम इंटरनेट पर चल रहे चाइल्ड पॉर्नोग्राफी को रोकना और उसकी जांच करना है.

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    इंटरनेट पर सबसे ज्यादा सर्च किया जाता है पॉर्न (प्रतीकात्मक तस्वीर)


    सीबीआई ने इस यूनिट की स्थापना जर्मनी पुलिस द्वारा मुहैया करवाई गई एक जानकारी के बाद की. जर्मनी पुलिस ने सीबीआई को बताया था कि ऐसे 7 भारतीयों की पहचान की गई है, जो इंटरनेशनल चाइल्ड पॉर्नोग्राफी से जुड़े हुए हैं. सीबीआई ने इसकी जांच की. जिसके बाद इस यूनिट को बनाया गया. सीबीआई को वक्त-वक्त पर इंटरपोल और दूसरी अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों के जरिए इंटरनेट पर चल रहे चाइल्ड पॉर्नोग्राफी को लेकर सूचनाएं दी जाती रही हैं.

    चाइल्ड पॉर्नोग्राफी को लेकर 2 साल पहले आई थी हैरान करने वाली रिपोर्ट
    चाइल्ड पॉर्नोग्राफी को लेकर 2017 में एक हैरान करने वाली जानकारी सामने आई थी. उस वक्त मेल टुडे की एक रिपोर्ट में एक साइबर एक्सपर्ट ने दावा किया था कि भारत में हर 40 मिनट में एक चाइल्ड पॉर्न वीडियो तैयार किया जा रहा है. 2017 में चाइल्ड पॉर्न वीडियो बनाने में केरल सबसे ऊपर था. जबकि हरियाणा में ऐसे वीडियो को सबसे ज्यादा मोबाइल के जरिए देखा जा रहा था.

    रिपोर्ट में बताया गया था कि कुल पॉर्नोग्राफिक्स मैटेरियल्स में 35 से 40 फीसदी हिस्सा चाइल्ड पॉर्नोग्राफी का था. रिपोर्ट में बताया गया था कि भारत के लोगों को इंटरनेट पर पॉर्न देखने की लत इतनी ज्यादा है कि हर सेकेंड करीब 380 लोग इंटरनेट पर एडल्ट वीडियो देख रहे होते हैं. इंटरनेट पर सर्च इंजन के पास करीब 25 फीसदी जानकारी पॉर्न से संबंधित ली जाती है. ऐसी जानकारी एक दिन में करीब 6 करोड़ से भी ज्यादा बार मांगी जाती है.

    जून 2017 में केंद्र सरकार ने चाइल्ड पॉर्नोग्राफिक्स मैटेरियल्स को लेकर सुप्रीम कोर्ट को जानकारी सौंपी थी. सरकार ने चाइल्ड पॉर्न दिखाने वाले करीब 3,522 वेबसाइट को बैन किया था. एक्सपर्ट बताते हैं कि सरकार वेबाइट तो बैन कर देती है. लेकिन इसमें एक बड़ी दिक्कत ये है कि एक साइट बैन होते ही उसी साइट से मिलते जुलते नाम वाली दूसरी साइट आ जाती है.

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    Tags: Child sexual abuse, PORN, Porn Industry, Sexual Abuse, Sexual violence, Sexualt assualt

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