कोरोना को लेकर नई चेतावनी, मौसमी बीमारी बन सकता है कोविड-19

वैज्ञानिकों का मानना है कि कोरोना वायरस हर ठंड के मौसम में लौट सकता है.
वैज्ञानिकों का मानना है कि कोरोना वायरस हर ठंड के मौसम में लौट सकता है.

कोरोना वायरस के इलाज और टीके के लिए वैज्ञानिक जहां गहन शोध में लगे हैं. उन्हें लगने लगा है कि कोरोना मौसमी बीमारी बन कर अगले साल फिर लौट सकता है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: March 27, 2020, 6:53 PM IST
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नई दिल्ली. दुनिया में कोरोना वायरस (Corona Virus) के कारण फैल रही कोविड-19 (Covid-19) नाम की बीमारी के खिलाफ जंग तेज हो गई है. अमेरिका में इससे संक्रमित लोगों की संख्या जहां चीन के संक्रमितों की संख्या को पार कर गई है, वहीं इटली के बाद स्पेन में भी मरने वालों की संख्या का आंकड़ा चीन में हुई मौतों से आगे निकल गया है. इसी बीच अमेरिका के शीर्ष वैज्ञानिकों ने अपने शोध में पाया है कि कोविड-19 अब मौसमी संक्रमण या बीमारी (Seasonal Infection) में बदल सकती है.


इस बात की ज्यादा है आशंका
अभी इस बीमारी का कोई इलाज निकल कर सामने नहीं आया है. 
टाइम्स ऑफ इंडिया में छपी खबर के मुताबिक अमेरिका के एक वरिष्ठ वैज्ञानिक ने बुधवार को बताया कि अगले मौसम में कोरोना वायरस के वापसी करने की प्रबल संभावना हैं. ऐसे में जल्दी से इसका टीका और प्रभावी उपचार ढूंढना बहुत ज्यादा जरूरी हो गया है.




वैज्ञानिकों का मानना है कि कोरोना वायरस हर ठंड के मौसम में लौट सकता है.
वैज्ञानिकों का मानना है कि कोरोना वायरस हर ठंड के मौसम में लौट सकता है.

दक्षिणी देशों में जाने लगा है कोरोना


अमेरिका के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ में संक्रमित रोगों के शोध की अगुआई करने वाले एंथोनी फॉसी ने बताया कि यह वायरस अब दक्षिणी गोलार्ध में पैर पसार रहा है जहां ठंड का मौसम आने वाला है. उन्होंने कहा, “अब हम देखने लगे है कि दक्षिणी अफ्रीका और दक्षिणी गोलार्ध के देशों में कोरोना वायरस संक्रमण के मामले सामने आ रहे हैं जबकि वहां ठंड का मौसम शुरू होने को है. यदि मामले तेजी से बढ़े, तो हमें अगले सीजन से पहले कोविड-19 का टीका उपलब्ध कराना ही होगा.”

टीकों और दवाओं पर चल रहा है काम
जहां तक टीके के शोध का मामला है तो दो टीकों पर इस समय जोरों पर काम चल रहा है. एक चीन में और दूसरा अमेरिका में, लेकिन वे लोगों को एक डेढ़ साल में ही मिल सकेंगे. दूसरी तरफ इसके इलाज पर भी जोरों से काम चल रहा है, जिसमें मलेरियारोधक दवाओं क्लोरोक्वाइन और हाइड्रोऑक्सीक्लोरोक्वाइन की टेस्टिंग भी शामिल हैं.


अगले सीजन के लिए भी तैयार होने की जरूरत
फॉसी ने कहा कि वे जानते हैं कि इस बीमारी को कम रखकर हम सफल हो सकते हैं, लेकिन हमें अगले साइकल के लिए भी तैयार रहना होगा. उनके बयान के मुताबिक वायरस ठंड के मौसम में ज्यादा प्रभावी होता है, जबकि गर्म और आर्द्र मौसम में वह उतना प्रभावी नहीं होता है. यही बात चीनी शोध पत्र में भी सामने आई थी.




कोरोना वायरस के टीके और उपचार ढूंढने दोनों में समय लग रहा है.
कोरोना वायरस के टीके और उपचार ढूंढने दोनों में समय लग रहा है.


ठंड में ही ज्यादा क्यों सक्रिय होता है कोरोना
कोरोना वायरस के ठंड के मौसम में ज्यादा सक्रिय और असरदार होने की वजह यह बताई गई है कि सांसों से निकले ड्रॉपलट्स ठंड के मौसम में ज्यादा देर तक हवा में रह सकते हैं और साथ ही ठंड में इंसान की प्रतिरोधी क्षमता कम हो जाती है. वहीं इसकी एक और वजह यह है कि गरम सतहों पर ये वायरस जल्दी ही खत्म हो जाते हैं क्योंकि उनके ऊपर की फैट की सुरक्षा सतह जल्दी ही सूख जाती है.

क्यों है यह चिंता की बात
इसका मतलब यह नहीं कि संक्रमण की कम दर वायरस को पूरी ही तरह से खत्म ही कर देगी. उदाहरण के तौर पर ऑस्ट्रेलिया में करीब 2500 संक्रमण के पुष्ट मामले सामने आ चुके हैं और 8 मौतें हो चुकी हैं, जहां अभी सर्दी का मौसम शुरू होने वाला है. भारत जैसे देशों में भी लोग गर्मी के आने का बेसब्री से इंतजार इसी उम्मीद में कर रहे हैं कि गर्मी आने से इस महामारी का प्रकोप शायद कम हो जाए और उन्हें राहत मिल जाए.


फिलहाल प्रसार रोकना ही पहली प्राथमिकता है
इस समय दुनिया भर के देशों की प्राथमिकता यही है कि इस वायरस के संक्रमण के तेज प्रसार को नियंत्रित किया जाए. भारत जैसे बड़े देश में लॉकडाउन लगा दिया गया है. वहीं अमेरिका में संक्रमित लोगों की संख्या 82 हजार से ज्यादा हो चुकी है जो चीन से ज्यादा है. यहां इससे मरने वालों का आंकड़ा 1000 के पार हो गया है.




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कोरोना वायरस संक्रमण दक्षिणी गोलार्ध में भी पहुंच गया है. (सांकेतिक फोटो)

अमेरिका बन चुका है केंद्र
इस समय अमेरिका इस बीमारी का केंद्र बन चुका है. इससे पहले यूरोप इस बीमारी का केंद्र हो गया था. जहां मरने वालों की दर अब भी बहुत ही ज्यादा है. खास कर इटली, स्पेन और फ्रांस जैसे देशों में मरने वालों की संख्या बहुत ही तेजी से बढ़ गई है. इटली और स्पेन में मरने वालों की संख्या चीन से भी ज्यादा हो गई हैं. चीन में ढाई महीने पहले से ही लोग इस बीमारी की वजह से मरना शुरू हो गए थे.

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