जानिए कैसे अमेरिका के अरबों के सिस्टम को हैक कर डाला रूसी हैकर्स ने

रूसी हैकर्स (Russian Hackers)  के इस हमले से अमेरिकी की साइबर सुरक्षा (Cyber Security) पर गंभीर सवाल उठे हैं. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)

रूसी हैकर्स (Russian Hackers) के इस हमले से अमेरिकी की साइबर सुरक्षा (Cyber Security) पर गंभीर सवाल उठे हैं. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)

रूसी हैकर्स (Russian Hackers) ने अमेरिका (US) के सरकारी कम्प्यूटर सिस्टम (Computer Systems) में न केवल सेंध लगाई बल्कि उनसे जानकारी भी दुनिया के दूसरे देशों में स्थित अपने सर्वर्स तक पहुंचा दी.

  • News18Hindi
  • Last Updated: December 16, 2020, 2:44 PM IST
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शीत युद्ध (cold War) भले ही खत्म हो गया हो, लेकिन दुनिया के ताकतवर देशों में साइबर सुरक्षा (Cyber Security) में सेंध लगाने की कोशिशें वैसे ही जारी हैं जैसे पहले शीत युद्ध के पहले हुआ करती थीं. पिछले कुछ सालों में अमेरिका की उच्च सुरक्षा वाले सरकारी कम्प्यूटर सिस्टम (Government Computer system) में रूसी हैकर्स (Russian Hackers) की घुसपैठ की खबरें आती रही हैं. हाल ही में ऐसी एक और घटना हुई है. रूसी हैकर्स ने इस बार फेडरल गवर्नमेंट (Federal Government) के सिस्टम में न केवल घुसपैठ की बल्कि बिना पकड़े जाते हुए उनसे जानाकारी भी सफलतापूर्वक चुरा ली.

महीनों तक छिपे रहे सिस्टम में प्रोग्राम
रूसी हैकर्स ने पहले अपने डिजिटल ट्रोजन हॉर्सेस को फेडरर गवर्नमेंट के सिस्टम में छोड़ा जो पिछले वसंत से  कम्प्यूटर में छिपे ही रहे और फिर इनमें छिपे कोड सक्रिय हुए और उन्होंने बाहरी दुनिया से संपर्क करना शुरू कर दिया. हैरानी की बात यह है कि इस पूरे घटनाक्रम में अमेरीकी साइबर सुरक्षा व्यवस्था को इसकी भनक तक नहीं लगी.

चौंकानी वाली घटना
किसी सिस्टम में किसी प्रोग्राम का बिना पकड़े जाते हुए प्रवेश करना नामुमकिन नहीं होता है लेकिन जब इस इस कम्प्यूटर के जरिए बाहर की दुनिया से संपर्क किए जाने की कोशिश होती है तो उसके पकड़े जाने की संभावना सबसे ज्यादा होती है. फिर भी इसे अमेरिकी सुरक्षा व्यवस्था पकड़ नहीं सकी यह चौंकाने वाली बात मानी जा रही है.



इतनी हैरानी क्यों
यह बिलकुल वैसा ही है जब दुश्मन देश में घुसने के  बाद जासूस वहां से रेडियो संकेतों के जरिए अपने देश में बात कर रहे हों. ऐसी स्थिति में ही पकड़े जाने की संभावना सबसे अधिक होती है. फिर भी स्टेट डिपार्टमेंट और दूसरी फेडरल एजेंसियों के नेटवर्स से जब रूसी सर्वरों को संकेत जाने लगे तब भी अमेरीकी सरकार को इसकी भनक कैसे नहीं लगी.

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इस सुरक्षा सेंध में हैरानी की बात यह थी अमेरिकी सुरक्षा (US Security) हैकर्स (Hackers) के संचार की जानकारी भी पता नहीं लगा सकी. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)


रूसी हुनर या अमेरिकी कमजोरी
इसकी वजह केवल रूसी कारीगरी ही नहीं बल्कि फेडरल सरकार की कमजोरी भी रही जिसे कम्प्यूटर की दुनिया में ब्लाइंड स्पॉट भी कहा जाता है. इस साइबर हमले का पता इस महीने एक साइबर सिक्यूरिटी फर्म को पता चला. यह एक बेहरतीन साइबर अटैक माना जा रहा है जिसमें आधुनिक तौर तरीकों और टूल्स का उपयोग किया गया है.

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कैसे किया गया अटैक
व्यापकर तौर पर उपयोग में लाए जाने नेटवर्क निगरानी सॉफ्टवेयर में उपयोग किए जाने वाले खराब हिस्सों (Corrupting patches) को हैक करने के बाद हैकर ने अपनी घुसपैठ के सारे निशान सफाई से मिटा दिए. इसके बाद उन्होंने अमेरिका के ही आईपी एड्रैस से संपर्क किए ना कि मॉस्को या किसी अन्य विदेशी एड्रैस से, जिससे की शक पैदा हो सकता था. हैकर्स ने नए मालिसियस कोड का उपयोग किया और अमेरिकी सरके अरबों डॉलर महंगे डिटेक्शन सिस्टम, आइंस्टीन को नाकाम साबित कर दिया जिसका काम ही ज्ञात मालवेयर के नए उपयोगों का पता करना था और पहले किए गए हैक्स में उपयोग किए गए पिछले इंटरनेट कनेक्शन्स के हिस्सों का पता लगाना था.

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इस सुरक्षा सेंध को रूसी हैकर्स (Russian Hackers) का हुनर कम अमेरिकी सुरक्षा (US Security) की खामी ज्यादा माना जा रहा है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)


‘आइंस्टीन’ की नाकामी
लेकिन आइंस्टीन के साथ समस्या यह थी यह होमलैंड सिक्योरिटी विभाग द्वारा संचालित होता है, और नए मालवेयर या इंटरनेट कनेक्शन्स को पहचानने में सक्षम नहीं है, जबकि साल 2018 में गवर्नमेंट अकाउंटेबिलिटी ऑफिस ने सुझाया था कि ऐसी क्षमता विकसित करना एक अच्छा निवेश हो सकता है. कुछ निजी साइबर सिक्यूरिटी फर्म इस तरह के संदिग्ध संचार माध्यमों के बारे में पता लगाने में सक्षम होती हैं जिन्होंने ऐसे आईपी एड्रैस का उपयोग किया हो जो पहले सर्वर से कभी नहीं जुड़े थे. लेकिन आइंस्टीन ऐसा नहीं कर पाता है.

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आइंस्टीन की गलती कहना सही नहीं
ट्रम्प और बुश प्रशासन में शीर्ष साइबर सुरक्षा अधिकारी रहे थॉमस बोसर्ट का कहना है कि यह कहना सही नहीं होगा कि आइंस्टीन सही तरह से डिजाइन नहीं किया बल्कि यह के प्रबंधन नाकामी है. इस साल फेडरल नेटवर्क पर महीनों लंबे हुए हमले हाल ही में खोजे गए. यह सरकार की कमजोरी को साफ तौर पर दर्शाता है इसमें सरकार की व्यवसायिक सॉफ्टवेयर पर व्यापक निर्भरता भी शामिल है. बताया जा रहा है कि तमाम सरकारी चेतावनियों के बाद भी प्रशासन ने जरूरी तकनीक अपडेट और अपग्रेड समय पर लागू नहीं किए. इतना ही नहीं आइंस्टीन की पूरी क्षमता का उपयोग ही नहीं किया.
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