USCG ने बनाया चांद का नक्शा, जानिए क्यों माना जा रहा है यह अहम

चांद पर नक्शे में वहां के क्रेटर साफ दिखाई दे रहे हैं.
चांद पर नक्शे में वहां के क्रेटर साफ दिखाई दे रहे हैं.

यूएससीजी (USCG) ने नासा (NASA)के लिए चांद (Moon) का पूरा नक्शा तैयार किया है जिससे उसे अपने आने वाले अभियानों में मदद मिलेगी.

  • News18Hindi
  • Last Updated: April 23, 2020, 5:57 PM IST
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नई दिल्ली: अमेरिका की अंतरिक्ष को लेकर कई महत्वाकांक्षी योजनाएं हैं. इसको लेकर वह दुनिया कअन्य देशों की भी मदद लेने में पीछे नहीं हो रहा है. नासा (NASA) मंगल पर इंसान भेजने के अभियान में वह यूरोपीय स्पेस एजेंसी (ESA) की मदद ले रहा है. वहीं नासा चांद पर इंसान की बस्ती बसाने की योजना पर अकेला ही काम कर रहा है. इस दिशा में एक अहम कदम बढ़ाते हुए अब नासा को चांद का नक्शा भी मिल गया है.

नासा के बड़े अभियान के लिए काम आएगा यह नक्शा
नासा के लिए चांद पर इंसान भेजना तो आसान है, लेकिन वहां लंबे समय तक इंसान रह सकें यह उसके लिए एक बहुत बड़ी ही चुनौती है. इसके लिए वह 2024 तक एक बेस कैम्प बनाने की तैयारी कर रहा है. इस योजना में कई बहुत बड़ी बाधाएं हैं, जिन्हें पार करना है. लेकिन नासा की मदद के लिए अमेरिकी जियोलॉजिकल सर्वे (USGS) ने उसके लिए पूरे चांद का नक्शा तैयार कर लिया है.

किसने तैयार किया यह नक्शा
यूएसजीएस ने यह नक्शा नासा और लूनार प्लैनेटरी इस्टीट्यूट के साथ मिल कर तैयार किया . तीनों संस्थाओं के वैज्ञानिकों ने चांद की सतह का पूरा का पूरा मैप बना दिया है. शोधकर्ताओं का मानना है कि यह नक्शा नासा के अभियान को पूरा करने में अहम भूमिका निभाएगा.



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नासा लंबे समय से चांद पर बेस कैंंप बनाने की योजना बना रहै है.


दशकों की मेहनत का नतीजा है यह नक्शा
इस नक्शे को यूनिफाइड जियोलॉजिकल मैप ऑफ द मून नाम दिया है. कई दशकों से चांद की धरती पर किए गए जियोलॉजिकल सर्वे का नतीजा है. यह काम तब से चल रहा है जब से चांद पर पहला इंसानी कदम रखा गया था. इसमें छह अपोलो मिशन के आंकड़ों का उपयोग किया गया है.  इसके अलावा इसमें नासा के लूनार ऑर्बिटर के आंकड़ों की भी मदद ली गई है. साथ ही इसमें जापानी स्पेस एजेंसी का कागुया और साल 2007 से 2009 तक ली गईं तस्वीरों का भी योगदान है.

रंगीन नक्शा है यह
इस रंगीन जियोलॉजिकल मैप की स्केल 1: 5,000,000 है. यह भविष्य में चांद पर होने वाले दूसरे सर्वे के लिए मददगार होगा और एक अहम शोध स्रोत बनेगा. यूएसजीएस निदेशक जिम रीले ने प्रेस रिलीज में कहा कि यूएसजीएस का नासा के भविष्य के अभियानों की मदद के लिए यह स्रोत बनाना शानदार है.

क्या है नक्शे में गुलाबी रंग का मतलब
इस नक्शे में कई जगह गुलाबी रंग के धब्बे दिखाई दे रहे हैं. ये धब्बे 3.5 अरब साल पुरानी घटनाओं के संकेत हैं. इंब्रियन काल कहे जाने वाले उस समय बहुत से क्षुद्रग्रह  (Astroids) चांद पर आकर गिरे थे जिसके कारण वहां बहुत से क्रेटर बन गए थे. ये क्रेटर आज भी दिखाई देते हैं. यही क्रेटर नक्शे में गुलाबी रंग से दिख रहे हैं.

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नासा 2024 तक चांद पर बेस कैंप बनाना चाहता है


क्यों इतना अहम है  यह नक्शा
यूएसजीएस के जियोलॉजिस्ट कोरी फोर्टेजो ने बताया कि यह बहुत लंबे समय की मेहनत है. यह वैज्ञानिक शोधों के लिए चांद के बारे में अहम जानकारियां प्रदान करेगा. यह नक्शा नासा के चंद्रमा के लिए बेस कैम्प बनाने में एक आधार का काम करेगा. इसकी मदद से नासा चांद पर बेस कैम्प के लिए उचित स्थान आसानी से चुन सकेगा.

नासा के और अभियानों के लिए भी महत्व रखता है बेस कैम्प
नासा की योजना साल 2024 तक चांद पर एक इंसानी बेस कैम्प बनाने की है जहां कुछ दिनों तक मनुष्य रह सकें. इसका सबसे अधिक महत्व नासा उस खास मिशन के लिए जिसके तहत वह मंगल पर इंसानी कदम रखने की तैयारी कर रहा है. इस मिशन के बाद मंगल यात्रियों के वापसी के दौरान मंगल पर रुकने की योजना है.

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