इंटरनेट से कंटेंट और तस्वीरों का इस्तेमाल कानूनी तौर पर क्यों फंसा सकता है, जानें कॉपीराइट कानून

इंटरनेट से कंटेंट और तस्वीरों का इस्तेमाल कानूनी तौर पर क्यों फंसा सकता है, जानें कॉपीराइट कानून
बहुत जरूरी है कॉपीराइट के बारे में जानना, क्योंकि इसका सामना हमें रोजाना की जिंदगी में करना ही होता है

वर्ष 1952 में जिनेवा (Geneva) में पहला कॉपीराइट सम्मेलन (First world copyright meet) हुआ, जिसमें आज ही के दिन भारत समेत 35 देशों ने इस पर साइन किए. उसके बाद भारत ने इसी के आधार पर अपने कॉपीराइट (Copyright act) कानून तैयार किए. जो 1958 से लागू हो गए. अक्सर हम बगैर सोचे समझे कंटेंट से लेकर तस्वीरों का इस्तेमाल करते हैं, जो कॉपीराइट से जुड़ी होती हैं. ऐसा करके हम कानूनी तौर फंस भी सकते हैं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: September 8, 2020, 12:30 PM IST
  • Share this:
आज ही के दिन 1952 में जिनेवा में पहला कॉपीराइट सम्मेलन हुआ था. जिसमें दुनियाभर के तमाम देशों ने हिस्सा लिया था. इसके बाद भारत समेत 35 देशों ने फिर अंतरराष्ट्रीय कानून पर हस्ताक्षर किए. मोटे तौर पर जो कॉपीराइट कानून दुनिया में लागू है, वही भारत में लागू है. हालांकि कुछ मामलों में अलग अलग देशों के कॉपीराइट कानूनों को कुछ मामूली बदलाव रहता है.

1952 में अंतरराष्ट्रीय कॉपीराइट कानून पर हस्ताक्षर करने के बाद भारत ने इससे संबंधित कानून बनाया. ये 1957 में बनकर तैयार हो गया. इसे 1958 से हरकत में ला दिया गया. इस समय देश में जिन कॉपीराइट कानूनों का पालन होता है, वो 1958 में लागू कानून ही हैं.

वैसे कॉपीराइट का पहला कानून ब्रिटिश राज में 1912 में बना था. उसके बाद इसमें संशोधन भी हुए. 1957 में बने कानून में भी 2012 में जरूरी संशोधन किए गए.



क्या करता है कानून
ये आपके काम को सुरक्षा उपलब्ध कराता है ताकि आपके विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े मौलिक काम की न तो कोई कॉपी कर सके और न ही उस पर अपना हक जता सके. साथ ही आपके उस काम या उत्पाद की विशिष्टता बनी रहे.

कॉपीराइट के क्षेत्र
कॉपीराइट के तहत ढेर सारे अधिकार आते हैं. जो लेखन से लेकर साउंड रिकार्डिंग, फिल्म और कलात्मक कामों से जुड़े होते हैं. ये आपके काम की मौलिकता की कई तरह से सुरक्षा करता है
- फिर से उत्पादन न हो
- इसे किसी और तरीके से बदलकर इस्तेमाल में नहीं लाया जाए

ये भी पढ़ें - तब अमेरिका और ब्रिटेन से कहीं ज्यादा अमीर देश था भारत

- ट्रांसलेशन नहीं हो
कॉपीराइट एक तरह से कानूनी अधिकार है, जो साहित्य, नाटक, संगीत, फिल्मों और कलात्मक कामों के क्रिएटर्स पर लागू होता है. कई बार बिजनेस और स्टार्टअप को भी कॉपीराइट के तहत रजिस्टर्ड कर सकते हैं. इसका संबंध इंस्ट्रक्शन मेन्यूअल, प्रोडक्ट लिटरेचर और यूजर्स गाइड से होता है.

copy right
भारत सरकार की कॉपीराइट संबंधी आधिकारिक वेबसाइट


कॉपीराइट किसे अधिकार देता है
आमतौर पर कॉपीराइट कानून के जरिए क्रिएटर अपने काम पर अधिकार हासिल करता है लेकिन कई बार क्रिएटर के एम्पलायर उस काम पर कॉपीराइट अधिकार हासिल करता है.

किन कामों को कॉपीराइट प्रोटेक्ट करता है
- साहित्यिक काम
- नाटक संबंधी काम
- संगीत कार्य
- कलात्मक काम (पेंटिंग, फोटोग्राफी, कलाकृति)
- प्रकाशित संस्करण
- प्रकाशित लेख
- रिकार्डेड साउंड (संगीत, गाना, नाटक, भाषण, लेक्चर आदि)
- मूवी, फिल्म और टेलीफिल्म
- टीवी और रेडियो का ब्राडकास्ट
- तकनीक संबंधी काम

इसे विस्तार से पढ़ने के लिए http://copyright.gov.in/Documents/CopyrightRules1957.pdf देखें . साथ ही कॉपीराइट पर सरकार की कंपलीट हैंडबुक देखने के लिए http://copyright.gov.in/Documents/handbook.html देखें.

ये भी पढ़ें - 'न्यू नॉर्मल' के तहत कैसी होगी पोस्ट कोविड ट्रेन? कितना विश्वास करेंगे यात्री?

क्या है रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया
इसके लिए सरकार की कॉपीराइट से संबंधित साइट http://copyright.gov.in पर जाएं
यहां आपको आवेदन को आनलाइन भरने के विकल्प मिलेंगे. हालांकि उससे पहले आपको यहां लॉगिन करना होगा, जो निःशुल्क है. कॉपीराइट रजिस्ट्रेशन के लिए फार्म 904 भरा जाता है. भारत में फिल्मों और टीवी की कहानी पर कॉपीराइट संपदा की सुरक्षा के लिए अलग से एक एसोसिएशन है.

copy right

रजिस्ट्रेशन में क्या भरना होगा
व्यक्तिगत विवरण- कॉपीराइट रजिस्ट्रेशन का फार्म भरने के लिए आपको अपने पर्सनल डिटेल मसलन- नाम, पता, राष्ट्रीयता के बारे में बताना होगा. साथ ही ये घोषित करना होगा कि जिस काम का कॉपीराइट कराना है, वो उसका अपना है या वो आवेदक का प्रतिनिधि है
काम की प्रवृत्ति- इसमें आप अपने जिस काम पर कॉपीराइट कराना चाहते हैं, उसका संक्षिप्त विवरण भरना होगा. उसकी एक हेडिंग तय करनी होगी. अगर किसी वेबसाइट का कॉपीराइट करना हो तो उसका यूआरएल देना होगा. साथ ही काम किस भाषा में किया गया है.
प्रकाशन का विवरण- इसमें आपको काम के प्रकाशन, शुरू होने का दिन या फिर प्रकाशक या रिसर्च संबंधी काम में प्रोफेसर को काम सौंपने का दिन भरना होगा.

copyright form
कॉपीराइट फॉर्म


आवेदन के साथ जो संलग्न करना होगा
- अनापत्ति प्रमाण पत्र
- काम की तीन प्रतियां
- प्रकाशक से अनापत्ति प्रमाण पत्र
- प्रकाशक का नाम, पता, नागरिकता

फीस
50 रुपए से लेकर 600 रुपए तक

आगे की प्रक्रिया
आवेदन को फिजिकल और ऑनलाइन दोनों तरीके से जमा किया जा सकता है. दिल्ली में द्वारिका में कॉपीराइट का आफिस है, जहां इसे भौतिक तौर पर जमा कर सकते हैं या फिर स्पीड पोस्ट या रजिस्टर्ड डाक से भेज सकते हैं. आप फार्म को खुद भी भर सकते हैं और अपने कानूनी प्रतिनिधि से भी भरवा सकते हैं.

ये भी पढे़ं - जानिए क्या है NSA और क्यों बार-बार विवादों में आ रहा है?

जैसे ही आपका आवेदन स्वीकार कर लिया जाएगा, आपको एक नंबर भेजा जाएगा. ये प्रक्रिया 30 दिनों की है. इसके बाद पता चलेगा कि कॉपीराइट के तहत काम को रजिस्टर्ड किया गया या नहीं. आपको अपने प्रकाशक या एम्पलायर का अनापत्ति प्रमाण पत्र भी साथ में जमा करना होगा.
- अगर अापके काम पर किसी ने आपत्ति का दावा किया तो फिर ये प्रक्रिया लंबी हो जाएगी.
- अगर रजिस्ट्री विभाग आपके काम से संतुष्ट है या आपका आवेदन पूरी तरह ठीक है तो आपके काम को कॉपीराइट के तहत दर्ज कर प्रमाण पत्र दे दिया जाएगा.

कॉपीराइट की मियाद
फोटोग्राफ - 60 साल (पहले प्रकाशन के बाद से)
साहित्य, ड्रामा, संगीत, कलात्मक काम, - क्रिएटर के जीवन पर्यंत तक और मरने के 60 साल तक
सिनेमा, साउंड रिकार्डिंग, गर्वनमेंट वर्क, पब्लिकेशन अंडरटेकिंग, इंटरनेशनल एजेंसी और फोटोग्राफ - 60 साल, वो कैलेंडर साल, जब पहली बार ये जारी हुआ हो.

copyright

कॉपीराइट का उल्लंघन कब माना जाता है?
- कोई भी लेखन, कंटेट, गाना और फिल्म आदि पर क्रिएटर का पूरा कानूनी अधिकार होता है. ऐसे कंटेंट का पर्सनल इस्तेमाल किया जा सकता है. ये कानूनी तौर पर जायज है लेकिन इसका प्रसार और कामर्शियल उद्देश्य के लिए इस्तेमाल कॉपीराइट उल्लंघन है.

क्या किसी कंटेंट का कोई हिस्सा या आंशिक इस्तेमाल सही है?
- किसी भी कंटेंट का गैर कामर्शियल इस्तेमाल जाएज है. निजी इस्तेमाल में इजाजत की जररूत नहीं है. अगर किसी लेखन, शायरी या कविता के कुछ अंश समीक्षा के उद्देश्य से या रिपोर्ट या लेख को समझाने के लिए इस्तेमाल होते हैं तो ये फेयर डीलिंग यानी निष्पक्ष व्यवहार के दायरे में कवर होगा. कॉपीराइट एक्ट की धारा-52 के तहत किसी भी कंटेंट का प्राइवेट इस्तेमाल में उपयोग कॉपीराइट उल्लंघन नहीं है.

अगर इंटरनेट पर कोई कंटेंट या फोटोग्राफ या सामग्री है तो कितना इस्तेमाल हो सकता है?
- व्यक्तिगत इस्तेमाल कॉपीराइट का उल्लंघन नहीं लेकिन लेकिन इसका सार्वजनिक प्रसार नहीं किया जा सकता. अगर कोई पब्लिक डोमेन में नेट आदि पर पड़े फोटोग्राफ या कोई अन्य कंटेंट का इस्तेमाल करना चाहता है तो उसे इजाजत लेनी होगी. रॉयल्टी पेमेंट करना होगा.

ये भी पढे़ं - क्या है वो विशालकाय मशीन कासाग्रांडे, जो अयोध्या में करेगी मंदिर निर्माण

कहां अलर्ट रहना चाहिए?
- कोई भी ऐसे कंटेंट, जो पब्लिक डोमेन में हों या फिर नेट आदि पर हों या लेखन आदि के रूप में हों, उनके पब्लिक प्रसार पर.

किसी भी क्रिएटर का कब तक कॉपीराइट रहता है?
आमतौर पर लेखक और क्रिएटर का अधिकार मरने के 60 साल तक होता है.

कॉपीराइट एक्ट में दोषी को क्या सजा है?
कॉपीराइट एक्ट के उल्लंघन के लिए दोषी पाए जाने पर एक साल तक की सजा के साथ आर्थिक जुर्माने का प्रावधान है. कॉपीराइट उल्लंघन पर डैमेज क्लेम किया जा सकता है. किसी ने कॉपीराइट के उल्लंघन कर जितना प्रॉफिट कमाया है, उस हिसाब से डैमेज क्लेम किया जा सकता है.
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज