कौन हैं उत्सुल मुसलमान, जो चीन की हिंसा का नया शिकार हैं?

उइगर मुस्लिमों के बाद चीन अब उत्सुल मुस्लिमों पर अत्याचार शुरू कर चुका है- सांकेतिक फोटो (Pixabay)
उइगर मुस्लिमों के बाद चीन अब उत्सुल मुस्लिमों पर अत्याचार शुरू कर चुका है- सांकेतिक फोटो (Pixabay)

उइगर (Uighurs) मुस्लिमों के बाद चीन अब उत्सुल मुस्लिमों पर अत्याचार (violence on Utsul Muslims in China) शुरू कर चुका है. जानिए, महज 10 हजार की आबादी वाले इस समुदाय के पीछे चीन क्यों पड़ा है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: September 29, 2020, 1:11 PM IST
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चीन में धार्मिक आजादी नाम की कोई चीज नहीं. वहां के उइगर मुसलमानों का मुद्दा लगातार सुर्खियों में है कि कैसे शिनजियांग प्रांत में लाखों मुस्लिम डिटेंशन कैंपों में बंद हैं. अब हेनान प्रांत के उत्सुल मुसलमान भी कम्युनिस्ट पार्टी के निशाने पर हैं. कट्टरता खत्म करने के नाम पर उनके रीति-रिवाज बदले जा रहे हैं. लगभग 10 हजार की आबादी वाली इस माइनोरिटी के पारंपरिक पहनावे पर पाबंदी के साथ ही साथ अब उनपर सख्त निगरानी भी रखी जा रही है. जानिए, क्या है ये समुदाय और चीन किस तरह की सख्ती बरत रहा है.

सोशल मीडिया से फैली जानकारी
कुछ दिनों पहले चीन के सोशल मीडिया पर एक फोटो वायरल हुई थी. उसमें हिजाब पहनी लड़कियों को भारी पुलिसबल ने घेर रखा था. ये लड़कियां उत्सुल समुदाय से थीं. इसके बाद ही ये आदेश आया कि उत्सुल मुसलमान संप्रदाय के बच्चे स्कूल या कॉलेजों में पारंपरिक कपड़े पहनकर नहीं जा सकते. इधर पहले से ही बहुत कम आबादी वाले और अपनी पहचान के लिए जूझ रहे इस समुदाय को हिजाब के उतारे जाने पर एतराज है. साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट की एक रिपोर्ट में उत्सुल संप्रदाय के एक व्यक्ति ने कहा कि हिजाब हमारी संस्कृति का हिस्सा है और उसे उतारना कपड़े उतारने जैसा है.

इस माइनोरिटी के पारंपरिक पहनावे पर पाबंदी है- सांकेतिक फोटो (Pixabay)

अरबी शब्दों पर लगा बैन 


केवल पोशाक ही नहीं, बल्कि धार्मिक स्थलों के निर्माण पर भी कई नए नियम बने हैं. कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ चाइना ने इसपर एक रिपोर्ट तैयार की है. इसके तहत ऐसी मस्जिदों के बनाए जाने पर रोक है, जिसकी वास्तुकला में कोई भी अरबी पैटर्न हो. यहां तक कि अगर किसी उत्सुल मुसलमान ने अपनी दुकान के सामने कोई अरबी शब्द लिखा हुआ हो तो उसे वो भी हटाना होगा. अगर चीनी भाषा में भी कोई दुकानदार हलाल या इस्लामिक शब्द लिखता है तो उसपर भी कार्रवाई होगी.

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मस्जिद में कम्युनिस्ट पार्टी का सदस्य अनिवार्य
साथ ही साथ इस समुदाय पर सख्त निगरानी शुरू हो चुकी है. इसके तहत समुदाय की हर मस्जिद कमेटी का एक सदस्य गैर-मुसलमान और कम्युनिस्ट पार्टी का सदस्य होगा. मैनेजमेंट में इस सदस्य की बात अहम होगी. ये सारे रोकटोक और दबाव ठीक वैसे ही हैं, जैसे आज से कुछ साल पहले शिनजियांग प्रांत में उइगर मुस्लमानों के ऊपर बनने शुरू हुए थे. पाबंदियां बढ़ते-बढ़ते इतनी आगे चली गईं कि अब लाखों उइगर मुस्लिम वहां री-एजुकेशन कैंप के नाम पर डिटेंशन कैंपों में डाले जा चुके हैं.

उत्सुल समुदाय पर सख्त निगरानी शुरू हो चुकी है- सांकेतिक फोटो (Pixabay)


कौन हैं उत्सुल संप्रदाय
उत्सुल मुस्लमान चीन का अल्पसंख्यक वर्ग है, जिसकी आबादी महज 10 हजार है. ये आबादी उइगर मुस्लिमों के गढ़ शिनजिंयाग प्रांत से 12 हजार किलोमीटर दूर हेनान प्रांत में बसे हुए हैं. मूलतः इन्हें वियतनाम के चाम समुदाय से संबंधित माना जाता है, जो सैकड़ों साल पहले चीन आकर बस गए. इन्हें उत्सुल नाम किसने और क्यों दिया, इसके बारे में किसी को कोई जानकारी नहीं. दस्तावेजों से पता चलता है कि दूसरे विश्व युद्ध के दौरान जापानियों ने चीन में बुरी तरह से कत्लेआम मचाया. इसी दौरान उत्सुल आबादी में भी नरसंहार हुआ. इसके बाद से इनकी आबादी बढ़ नहीं सकी.

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पारंपरिक पहनावा वर्जित
अब चीन ने उइगर के बाद उत्सुलों पर भी हिंसा शुरू कर दी है. वहां की मस्जिदों से अरबी शब्द या तो हटाए जा रहे हैं या फिर स्थानीय लोग उसे कपड़ों या सजावट से छिपाने की कोशिश कर रहे हैं. अगर स्कूलों में कोई बच्ची हिजाब पहनकर आए तो उसे सजा मिलती है. उत्सुलों को डर होने लगा है कि कहीं उन्हें भी दूसरी माइनोरिटी की तरह डिटेंशन कैंपों में न डाल दिया जाए. यही वजह है कि चीन के इस प्रांत में छिटपुट प्रोटेस्ट हो रहे हैं.

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चीन को पड़ सकता है भारी
उत्सुल, जिन्हें चीन की पार्टी हुई मुसलमानों में से एक मान रही है, अब उनके साथ हुई वाकई में आ खड़े हुए हैं. वे बता रहे हैं कि उत्सुल मुस्लिम महिलाओं में हिजाब किसी धार्मिक इरादे के साथ नहीं, बल्कि आदतन पहना जाता है. ये भी माना जा रहा है कि चूंकि इन माइनोरिटी मुस्लिमों का ताल्लुक वियतनाम और मलेशिया जैसे देशों से हैं, लिहाजा इन्हें परेशान करने पर साउथईस्ट एशिया में चीन की कूटनीतिक और व्यापारिक छवि खराब हो सकती है. बता दें कि मलेशिया के प्रधानमंत्री अब्दुल्लाह अहमद बदवी की नानी उत्सुल थीं और इसी रिश्ते से वे कई बार उत्सुलों के शहर आ चुके हैं.

इन्हें परेशान करने पर साउथईस्ट एशिया में चीन की कूटनीतिक छवि खराब हो सकती है- सांकेतिक फोटो (Pixabay)


क्या है उइगर मुस्लिमों पर विवाद
ये समुदाय चीन के उत्तर-पश्चिमी इलाकों में बसा हुआ है, शिनजियांग में इनकी आबादी सबसे ज्यादा है. चीन की कम्युनिस्ट पार्टी ने साल 2017 की शुरुआत में इनपर कई प्रतिबंध लगाए थे. इनमें लंबी दाढ़ी रखना, सार्वजनिक स्थानों पर नकाब पहनना जैसी बातें शामिल थीं. तर्क था कि ये रोक आतंकवाद के खिलाफ चीन के अभियान के तहत लगाई गई है. नकाब या दाढ़ी वाले उइगर मुस्लिमों पर बसों या दूसरे पब्लिक ट्रांसपोर्ट में चढ़ने की मनाही की खबरें भी चर्चा में आईं.

री-एजुकेशन के नाम पर हिंसा
हालांकि ये तमाम हिंसाएं दूसरी कई हिंसाओं के आगे कुछ भी नहीं. रिफॉर्म के नाम पर लाखों लोगों को कैंपों में रखा गया. यहां उनके साथ तमाम तरह की हिंसाएं लगातार हो रही हैं. यूनाइटेड नेशन्स ने खुद माना कि ये चीन सरकार ने शिनजियांग को एक तरह से 'नजरबंदी शिविर' में तब्दील कर दिया है. यहां मुस्लिमों को चीनी भाषा और संस्कृति को मानना सिखाया जाता है. उनसे धर्म बदलने को कहा जाता है और न मानने वालों के साथ हिंसा होती है.
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