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बात हैरानी वाली : भारत का वो इलाका जहां जमीन के नीचे सबसे ज्यादा हैं चुंबकीय गुण

कसार देवी (Kasar Devi) के इस मंदिर का धार्मिक और वैज्ञानिक दोनों ही रूप में महत्व है. (तस्वीर: Wikimedia Commons)

कसार देवी (Kasar Devi) के इस मंदिर का धार्मिक और वैज्ञानिक दोनों ही रूप में महत्व है. (तस्वीर: Wikimedia Commons)

भारत (India) में उत्तराखंड के अल्मोड़ा शहर के पास स्थित कसार देवी (Kasar Devi) का मंदिर अपनी धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व के कारण प्रसिद्ध है. लेकिन कम लोग जानते हैं कि इसका वैज्ञानिक रूप में भी बहुत अधिक महत्व है. यह दुनिया के केवल तीन स्थानों मे से एक है जिसमें अद्भुद भूचुंबकीय विशेषता हैं. भूंचुंकीय विशेषता के कराण ही पृथ्वी (Earth) की मैग्नेटिक सौर पवनों से वायुमंडल की रक्षा कर पाती है.

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    भारत के उत्तारखंड (Uttarakhand) के कुमायूं क्षेत्र के अल्मोड़ा जिले में कसार देवी मंदिर (Kasar Devi Temple) है जो अपनी चुंबकीय विशेषताओं (Magnetic Properties) के लिए भारत ही पूरी दुनिया में एक विशेष स्थान बना हुआ है. खुद भारत में यह मंदिर एक विशेष धार्मिक स्थल माना जाता रहा है. लेकिन वैज्ञानिक नजरिए से इस मंदिर के इलाकों को कभी महत्व नहीं दिया गया. लेकिन यह ये अद्वितीय और चुंबकीय शक्ति का केंद्र है जिसके भूचुंबकीय प्रभाव को नासा (NASA) तक मान्यता दे चुका है. पृथ्वी में इस विलक्षण चुंबकीय प्रभाव के केवल तीन स्थान हैं जिनमें से एक कसार देवी का मंदिर माना जाता है.

    यहां आ चुकी हैं जानी मानी हस्तियां
    कसार देवी के इस मंदिर के महत्व का अपना अलग इतिहास रहा है. यहां स्वामी विवेकानंद, गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर, के अलावा तिब्बती बौद्ध गुरु लामा अंगारिका गोविंदा, पश्चिमी बौद्ध शिक्षक रॉबर्ट थुरूमैन भी यहां पहुंचे हैं तो डीएस लॉरेंस, कैट स्टीवन्स, बॉब डिलान, जॉर्ज हैरिस, डेनमार्क के एल्फ्रेड सोरेनसन, जैसी पश्चिम की कई बड़ी हस्तियां यहां पहुंच चुकी हैं.

    कहां है ये मंदिर
    यह मंदिर एक गांव में बना है जो समुद्र तल से 2116 मीटर की ऊंचाई पर अल्मोड़ा बाघेश्वर राजमार्ग से दिखाई देता है. यब गांव भी कसार देवी के नाम से ही जाना जाता है. यहां का विशेष प्रभाव कसार देवी, जिन्होंने दुर्गा माता का अवतार कहा जाता है, के कारण ही माना जाता है. दिलचस्प बात यह है कि 1890 में स्वामी विवेकानंद ने यहां की पहाड़ी के एक एकांत गुफा में बहुत गहन ध्यान क्रियाएं की थी.

    कब बना था यह मंदिर
    साधारण पत्थरों से बना यह मंदिर दूसरी सदी में बनाया गया बताया जाता है जो चीड़ और देवदार के पेड़ों से घिरा है. मूल मंदिरएक गुफा को काटकर बनाया गया था, लेकिन आज जो मंदिर दिखाई देता है, उसे बिड़ला परिवार ने 1948 में बनवाया था. देवी के मंदिर के अलावा यहां एक शिवमंदिर भी है जो 1950 के दशक में बना था.

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    पृथ्वी (Earth) की शक्तिशाली मैग्नेटिक फील्ड जैसा प्रभाव ही इन मंदिर में होता है. (प्रतीकात्मक तस्वीर:@NASA_Marshall)

    पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र से संबंध
    इस मंदिर का वैज्ञानिक दृष्टिकोण बहुत रोचक है जिसका संबंध पृथ्वी के ठीक बाहर मौजूद चुंबकीयमंडल या मैग्नेटोस्फिर से है. पृथ्वी के मैग्नेटोस्फियर के कारण भारी संख्या में ऊर्जावान आवेशित कण एक परत बनाए  हुए हैं जिसे वैन एलन रेडिएसन बेल्ट कहते हैं. इसमें अधिकांश कण यहां पर सूर्य से पृथ्वी की ओर आ रही सौर पवनों और खगोलीय विकिरण की वजह से हैं.

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    नासा ने भी माना विशेष
    नासा के अवलोकनों और अध्ययनों ने भी इस  बात की पुष्टि की है कि कसार देवी का भूचुंबकीय क्षेत्र अतिविशेष है. पृथ्वी की भूमैग्नेटिक फील्ड कि विशेषता यह है कि यह सौर पवनों को रोक लेती है और इन ऊर्जावान कणों को बिखरा कर हमारे वायुमडंल को नष्ट होने से बचा लेती है. इस पट्टी का नाम इसके खोजकर्ता जेन्स वैन एलन के नाम पर रखा गया है, जो इओवा यूनिवर्सिटी के अंतरिक्ष विज्ञानी थे.

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    कसार देवी (Kasar Devi) मंदिर और उसके आसपास पर विशेष आध्यात्मिक अनुभव भी होते बताए गए हैं. (तस्वीर: Wikimedia Commons)

    आध्यात्मिकता के विशेष अनुभव
    नासा पृथ्वी पर इस तरह के केवल दो और स्थान ही खोज सकी है एक स्थान पेरू का मशहूर माचू चपिच्चू और दूसरा इंग्लैंड कास्टोनहेंज है. इन तीनों स्थानों की खास बात यह है कि यहां भूचंबकीय प्रभाव के कारण इंसान को मन को बहुत शांति का अनुभव होता है. यहां ध्यान करना एक बहुत ही अलग और विशेष अनुभव है.

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    इतना ही नही मंदिर के पीछ ब्राह्मी लिपि में भी बहुत कुछ लिखा मिलता है. इस लिहाज से पुरात्व दृष्टिकोण से भी यह स्थान महत्व का हो जाता है. वहीं स्वामी विवेकानंद ने भी इस स्थान के महत्व को बताते हुए कहा था कि यह स्थान पार्वती माता की जन्मस्थली है. यहां स्वामी विवेकानंद के शिष्यों द्वारा एक केंद्र भी स्थापित किया गया है जिसे रामकृष्ण कुटीर कहा जाता है.

    Tags: India, Nasa, Research, Science

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