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UV किरणें करेंगी कोरोना वायरस को सैनेटाइज, जानिए कितनी कारगर है ये तकनीक

UV किरणें करेंगी कोरोना वायरस को सैनेटाइज, जानिए कितनी कारगर है ये तकनीक

यूवी किरणें कोरोना वायरस को हर सतह पर खत्म कर सकती हैं.

यूवी किरणें कोरोना वायरस को हर सतह पर खत्म कर सकती हैं.

कोरोना वायरस (Corona virus) के लिए खोजे जा रहे तमाम इलाजों के बीच शोधकर्ता अल्ट्रावॉयलेट किरणों से उसे सैनेटाइज करने के तरीके पर काम कर रहे हैं.

नई दिल्ली. कोरोना वायरस (Corona virus) के इलाज के लिए दुनिया में डॉक्टर, वैज्ञानिक और तमाम शोधकर्ता गहन शोध में लगे हैं. इसके साथ ही पूरी दुनिया इसके प्रसार को रोकने के लिए भी पूरी कोशिशें कर रही है. इन्हीं में से एक शोध में वैज्ञानिक हवा, पानी और तमाम सतहों पर कोरोना वायरस को खत्म करने के तरीके खोजने में लगे हैं.

क्या है शोध
सांता बारबरा के सॉलिड स्टेट लाइटिंग और एनर्जी इलेक्ट्रॉनिक सेंटर (SSLEEC) के शोधकर्ता एक ऐसी एलईडी बनाने की कोशिश में लगे हैं जो हवा और पानी सहित सभी सतहों को सार्स कोव-2 से संक्रमण मुक्त (decontaminate) कर सकती है.

UV LED से हैं बहुत उम्मीदें
शोधकर्ताओं को अल्ट्रावॉयलेट (UV) एलईडी से बहुत उम्मीदें हैं. शोध में शामिल क्रिस्चियन जोलनर इस तकनीक के सैनेटाइजेशन और शुद्धिकरण प्रक्रिया में उपयोग पर सालों से काम रहे हैं. उनका कहना है कि चिकित्सकीय क्षेत्र में अल्ट्रावॉयलेट डिस्इंफेक्शन उत्पादों का एक बाजार पहले ही मौजूद है. हाल ही में नोवल कोरोना वायरस को अल्ट्रावॉयलेट प्रकाश से बेअसर करने की शक्ति पर लोगों का ध्यान गया है.

Corona
कोरोना वायरस का इलाज अब भी ढूंढा जा रहा है. (सांकेतिक तस्वीर)


नई तकनीक नहीं है यह
अल्ट्रावॉयलेट प्रकाश से संक्रमण मुक्त करने की तकनीक दुनिया में नई नहीं है. सार्स कोव-2 के मामले में अभी बड़े पैमाने पर इस तकनीक की उपयोगिता साबित नहीं हुई है फिर भी SSLEEC की एक सहायक कंपनी ने हाल ही में बताया है कि अल्ट्रावॉयलेट एलईडी उत्पादों से केवल 30 सेकेंड में ही इस वायरस का 99.9 प्रतिशत कीटाणुशोधन (sterilization) हो सकता है.

कैसे बनेंगी ये UV-C किरणें
अल्ट्रावॉलेट प्रकाश कई तरह के होते हैं. इनमें से यूवी-ए और यूवी-बी सूर्य से आने वाली किरणों के साथ आते हैं जबकि यूवी-सी मानव निर्मित उपकरणों से ही बनता हैं. शोधकर्ताओं के अनुसार उच्च स्तरीय यूवी सी एलईडी एल्यूमीनियम गैलियम नाइट्राइड की सतह परसिलकॉन कार्बाइड के एक प्रारूप (Substrate) लगाकर उच्च गुणवत्ता यूवीसी मिलती है.

यहां होता है इस तकनीक का उपयोग
आमतौर पर इस तरह की तकनीक का उपयोग वाटर प्यूरीफायर्स में किया जाता है. शोधकर्ताओं का मानना है कि यूवी-सी एलईडी तकनीक लोगों को साफ पानी उपलब्ध कराने के अभियान में गेम चेंजर हो सकती है. इस तकनीक से अब तक इस्तेमाल की जा रही यूवीसी तकनीकों से सस्ती आसान और सुलभ होगी.

लाइट कोरोना वायरस को पूरी तरह से खत्म कर सकती है लेकिन इसमें एक बड़ा खतरा भी है


कोरोना मामले में हो सकती है तकनीक मददगार
प्रो. जोलनर के मुताबकि इस तकनीक को ऐसे सिस्टम से भी जोड़ा जा सकता है जो तभी काम करे जब आसपास कोई न हो. उनका कहना है कि सार्वजनिक स्थानों पर भी यह पानी को सस्ते में, बिना किसी केमिकल के साफ करने की आसान सुविधा मिलेगी. यह कोविड19 के मामले में भी एक गेम चेंजर हो सकती है.

यह दिक्कत है इस तकनीक के साथ
जोलनर के साथी फिलहाल किफायती और सटीक यूवी-सी लाइट एमिटर्स के उत्पादन पर अपना ध्यान लगा रहे हैं. यूवी सी किरणें इंसानों के लिए हानिकारक नहीं हैं ऐसा नहीं है. 260-285 नैनो मीटर रेंज की ये किरणें अभी डिस्इंफेक्शन तकनीक में प्रयोग में लाई जा रही हैं. ये इंसानी त्वचा और आंखों को नुकसान पहुंचा सकती हैं.

फिर भी इसकी उपयोगिता काफी अहम है
बेशक नियंत्रित हालातों में जहां इन किरणों के मानवीय संपर्क में आनी की संभावना पूरी तरह से खत्म हो जाए, वहां उपयोगिता बहुत दिखाई देती है. ऐसा वाटर प्यूरीफायर्स में होता है और ऐसे मामलों में प्रयोग सफल भी हो सकता है. वहीं मेडिकल उपकरणों को नियंत्रित हालातों में सैनेटाइज करने के काम में यह तकनीक बहुत कारगर होगी इसमें कोई शक नहीं है.  इसके अलावा इस तकनीक का सुरक्षित तरीके से उपयोग कब और कैसे हो सकता है यह भी एक अलग शोध का विषय है.

तमाम आशंकाओं के बाद भी जहां सार्स कोव-2 का संक्रमण अभी तक नहीं रुक पा रहा है, इस शोध के नतीजे उम्मीद जगा रहे हैं.

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Tags: Corona, Corona Virus, Coronavirus, Health, Health Explainer, Science

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