क्या इंसानों के लिए बुरी खबर है शुक्र ग्रह पर जीवन के संकेतों का मिलना?

शुक्र (Venus) ग्रह पर जीवन के संकेतों (Signature of life) की खोज ने ऐसी संभावनाओं पर बहस बढ़ा दी है जिससे पृथ्वी से दूर जीवन का पृथ्वी पर क्या असर हो सकता है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)

शुक्र (Venus) ग्रह पर जीवन के संकेत (Signatures of life) मिलने की खबर से बहुत सारी संभावनाएं ऐसी पैदा होती है जो इंसानों (Humans) के लिए अच्छी खबर नहीं हो सकती है.

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    पृथ्वी (Earth) के बाहर जीवन (Life) और उसके संकेतों (Signatures of life) की तलाश के लिए अरबों रुपये खर्च किए जा रहे हैं. इस दिशा में खगोलविदों (Astronomers) और वैज्ञानिकों को जीवन के संकेतों को खोजने में कुछ हद तक सफलता भी मिली है, लेकिन उन्हें जीवन की मौजूदगी के पुष्ट प्रमाण अभी तक कहीं भी नहीं मिले हैं. वहीं शुक्र ग्रह पर जीवन के संकेत मिलने पर एक प्रश्न यह भी उठा है कि क्या यह इंसानों के लिए वाकई अच्छी खबर है. इस खोज ने बहुत सारी ऐसी संभावनाओं को पैदा किया है जो इंसान के लिए बुरी खबर हो सकती है.

    क्या कहा गया है लेख में
    हाल ही में ली प्वाइंट में प्रकाशित लेख में लेखक जेम्स मेलोर का कहना है कि शुक्र ग्रह पर फोस्फीन गैस का पाया जाना सुझाता है कि इससे बहुत सी अवधारणाएं या परिकल्पनाएं (Hypothesis) जन्म लेंगीं. एक मतानुसार शुक्र पर जीवन के संकेत की तलाश करने जाना भविष्य में इंसान के लिए बुरी बात साबित हो सकती है. इस धारणा के अनुसार हम अब तक शायद एलियन्स को इसी लिए नहीं देख सके हैं क्योंकि उन्होंने गैलेक्सियों पर हमला करने से पहले ही खुद को खत्म कर लिया होगा.

    एक बड़ा सवाल
    ऐसा अनुमान लगाया गया है कि हमारी गैलेक्सी में ही पृथ्वी जैसे 20 अरब ग्रह होने चाहिए जिसमें की एक अरब साल से ज्यादा की उम्र के होंगे. यह आसानी से माना जा सकता है कि किसी और कम से कम एक ग्रह में भी पृथ्वी तकह जीवन और सभ्यता होगी जो पृथ्वी तक पहुंच सकती होगी. हमारी गैलेक्सी में कम से कम एक ही ऐसा ग्रह क्यों नहीं है यह एक अहम सवाल है.

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    शुक्र (Venus) ग्रह पर फॉस्फीन (Phosphine) की खोज हुई थी जो पृथ्वी पर केवल सूक्ष्मजीव (Microbes) ही बना सकते हैं. . (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)


    इलाकों पर कब्जा करने की प्रवृत्ति
    पृथ्वी पर जीवन इतने विविध स्थानों पर है तो गैलेक्सी में दूसरी जगहों पर क्यों नहीं  और जैसा इंसान दूसरे ग्रहों पर कॉलोनी बनाना चाहता है तो वैसा ही कुछ दूसरे ग्रह के बुद्धिमान प्राणी भी चाहते होंगे जैसा की इंसान कभी पृथ्वी के नए इलाकों पर कब्जा करना चाहते थे.

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    अगर तकनीक बदलाव जारी रहा तो
    हो सकता है कि हजार सालों तक अगर तकनीक बदलाव जारी रहे तो हम दूसरे तारा समूहों में अपने यान भेजने लगें और शायद ऐसा ही दूसरे ग्रह के प्राणी भी करें, लेकिन अब तक ऐसा उन्होंने क्यों नहीं किया.

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    पृथ्वी (Earth) के बाहर जीवन (life) का होना अब नामुमकिन बात नहीं रह गई है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)


    शुक्र ग्रह की इस खोज ने बदली सोच
    अब तक हम वैज्ञानिक तर्कों से यह मान सकते थे कि अभी तक ब्रह्माण्ड में जीवन कहीं और नहीं पनप पाया होगा, लेकिन शुक्रग्रह पर फोस्फीन की खोज इस सोच में बदलाव लाने के काफी होनी चाहिए. यह पदार्थ पृथ्वी पर केवल सूक्ष्मजीवी ही बना पाते हैं जो बिना ऑक्सीजन वाले वातावरण में रहते हैं. इस लेख में कहा गया है कि फॉस्फीन का पाया जाना साबित करता है कि केवल पृथ्वी ही ऐसा ग्रह है जहां जीवन हो सकता है यह दावा नहीं किया जा सकता है.

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    ऐसे में इस बात को भी खारिज नहीं किया जा सकता है कि सुदूर सभ्यताएं रही होंगी. और हो सकता है कि दूसरे तारों के सिस्टम में आ पाने से पहले ही उन्होंने खुद को आपस में ही लड़ कर खत्म कर दिया  होगा. इस तरह की कई दूसरी संभावनाएं भी हो सकती है. भविष्य में इंसान ही ऐसे रोबोट बना सकता है जो अंतरिक्ष में भी खुद की जनसंख्या बढ़ा सकें और दूसरे ग्रहों पर रहने लगें.

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