भारतीय वैज्ञानिकों ने शुक्र के वातावरण में खोजी कौन सी खास चीज

शुक्र ग्रह (Venus) के वायुमंडल में फॉस्फीन (Phosphine) के बाद भारतीय वैज्ञानिकों ने एक खास अमीनो एसिड (Amino Acid) खोजा है.(प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)
शुक्र ग्रह (Venus) के वायुमंडल में फॉस्फीन (Phosphine) के बाद भारतीय वैज्ञानिकों ने एक खास अमीनो एसिड (Amino Acid) खोजा है.(प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)

फॉस्फीन (phosphine) की खोज के बाद अब भारतीय शोधकर्ताओं ने शुक्र (Venus) के वायुमंडल में ग्लायसीन (glycine) नाम का पदार्थ खोजा है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 21, 2020, 12:54 PM IST
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जीवन के संकेतों (Signatures of life) की तलाश में वैज्ञानिक हमारे सौरमंडल (Solar System) के ग्रहों से लेकर बाह्यग्रहों (Exoplanets) तक को खंगाल रहे हैं. इनमें मंगल ग्रह से उन्हें काफी उम्मीद है, लेकिन शुक्र ग्रह (Venus) के हालात बहुत कठिन है. हाल में अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में तब हलचल मच गई थी जब वैज्ञानिकों को शुक्र ग्रह के वायुमंडल में फॉस्फीन (Phosphine) नाम का पदार्थ मिला था. यह पदार्थ पृथ्वी (Earth) पर केवल सूक्ष्मजीव ही बना पाते हैं. लेकिन अब भारतीय शोधकर्ताओं की टीम ने शुक्र के वायुमंडल में जीवों में पाए जाने वाले अहम तत्वों की खोज की है.

भारतीय शोधकर्ता ने किया इस उपकरण की टीम
भारत के पश्चिम बंगाल के मिदनापुर कॉलेज के फिजिक्स विभाग के पीएचडी रिसर्च स्कॉलर और इस अध्ययन के प्रमुख लेखक अरिजीत मन्ना और उनके साथी शोधकर्ताओं ने आटाकामा लार्ज मिलीमीटर/सबमिलीमीटर ऐरे (ALMA) का उपयोग कर ग्लायसीन की खोज की है. यह अमीनो एसिड अणु जीवों में प्रोटीन का निर्माण करता है.

कहां मिली ग्लायसीन
ग्लायसीन की खोज के लिए शोधकर्ताओं ने स्पैक्ट्रोस्कोपी का उपयोग किया है. शोधकर्ताओं को यह ग्लायसीन की उपस्थिति शुक्र ग्रह के मध्य अक्षांशों में, भूमध्य रेखा के पास दिखाई दी जहां उन्हें संकेत बहुत मजबूत मिल रहे थे. इसके अलावा उन्हें ध्रुवों क पास भी कोई ग्लायसीन नहीं दिखाई दिया.



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शुक्र (Venus) ग्रह पर फॉस्फीन (Phosphine) की खोज हुई थी जो पृथ्वी पर केवल सूक्ष्मजीव (Microbes) ही बना सकते हैं. . (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)


क्या है इसकी अहमियत
शोधकर्ताओं ने इस खोज के महत्व के बारे में लिखते हए कहा कि ग्लायसीन का शुक्र के वायुमंडल में पाया जाना वहां प्रीबायोटिक (Prebiotic) अणुओं के निर्माण की प्रक्रिया को समझने में अहम साबित हो सकता है. उन्होंने कहा कि शुक्र ग्रह के ऊपरी वायुमंडल उसी जैविक पद्धति से गुजर रहा है जिस तरह पृथ्वी अरबों साल पहले गुजरी थी.

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गलायसीन और फॉस्फीन
अभी तक 500 ज्ञात अमीनों एसिड हैं जिनमें से केवल 20 प्रतिशत जैनेटिक कोड में मौजूद हैं. जिसमें से ग्लायसीन का सबसे सरलतम रूप है. इस अध्ययन के नतीजे Arxiv.org साइट में प्रीप्रिंट पर हैं. इससे पहले पिछले महीने ही शोधकर्ताओं ने शुक्र के ऊपरी वायुमंडल में पर फॉस्फीन की खोज की थी. यह खोज कार्डिफ यूनिवर्सिटी, एमआईटी के वैज्ञानिकों ने जेन ग्रीव्स की अगुआई में फॉस्फीन के स्पैक्ट्रल फिंगरप्रिंट पाए थे. इसके लिए शोधकर्ताओं ने हवाई स्थित जेम्स क्लार्क मैक्सवेल टेलीस्कोप (JCMT) और चिली के ALMA का उपयोग किया था.

कितने मुश्किल हैं शुक्र के हालात
दरअसल शुक्र ग्रह के हालात इतने ज्यादा विपरीत हैं कि वहां इंसानों के लिए पल भर भी रह पाना नामुमकिन है. वहां की सतह का तापमान 450 डिग्री सेल्सियस से ज्यादा है, वायुमंडल में गैसों के नाम पर सल्फ्यूरिक ऐसिड है और वहां की सतह पर वायुमंडलीय दाब बहुत ही ज्यादा है.

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अपनी उत्पत्ति के समय शुक्र (Venus) और पृथ्वी (Earth) के हालात बिलकुल एक जैसे थे. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)


फिर भी शुक्र में दिलचस्पी क्यों
इन तमाम स्थितियों के बावजूद भी वैज्ञानिकों ने शुक्रग्रह में दिल्चस्पी कम नहीं की है क्योंकि इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि अरबों साल पहला पृथ्वी और शुक्र ग्रह के हालात एक से थे. आज दोनों के हाल बिलकुल अलग हो चुके हैं, लेकिन वैज्ञानिकों को लगता है कि शुक्र के अध्ययन से वे पृथ्वी के निर्माण के बारे में बहुत सारे सवालों को जवाब हासिल कर सकते हैं.

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ऐसे में शुक्र ग्रह पर एक नहीं दो तरह के जीवन संकेतों को पाया जाना वैज्ञानिकों में उत्साह बढ़ानेवाला है. वैज्ञानिकों को लगता है कि शुक्र के वायुमंडल में सूक्ष्मजीवन हो सकता है, जो आगे चल कर इस ग्रह पर जीवन की नींव साबित हो सकते हैं. इस मामले में अभी काफी कुछ पड़ताल की जानी बाकी है.
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