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मंगल पर जाने से पहले शुक्र पर भेजने चाहिए यान, ऐसा क्यों सोचते हैं वैज्ञानिक

वैज्ञानिक मंगल ग्रह के साथ शुक्र (Venus and Mars) के भी गहन अध्ययन  पर जोर दे रहे हैं. 
(तस्वीर: Wikimedia Commons)

वैज्ञानिक मंगल ग्रह के साथ शुक्र (Venus and Mars) के भी गहन अध्ययन पर जोर दे रहे हैं. (तस्वीर: Wikimedia Commons)

शुक्र ग्रह (Venus) के हालात इंसानों के लिए तो बहुत मुश्किल हैं. ऐसे में वहां चंद्रमा की तरह, कुछ देर के लिए ही मानव अभि ...अधिक पढ़ें

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हाइलाइट्स

मंगल पर मानव अभियान भेजने पर काम हो रहे हैं.
वहीं शुक्र ग्रह पर हालात बहुत ही ज्यादा नर्क की तरह हैं.
वैज्ञानिकों का कहना है कि मंगल से पहले शुक्र का अध्ययन लाभकारी होगा.

मंगल ग्रह पर मानव अभियान (Human Mission to Mars) की तैयारियां चल रही हैं. वहां पर बस्ती बसाने की योजना  पर भी काम चल रहा है. लेकिन इसी बीच वैज्ञानिकों ने यह भी कहा था कि मंगल के साथ शुक्र ग्रह का अध्ययन होना चाहिए. यही वजह है कि नासा, यूरोपीय और अन्य स्पेस एजेंसी शुक्र पर अपने अंतरिक्ष यान भेजने पर काम शुरू कर चुकी हैं. लेकिन कई वैज्ञानिकों को यहां तक लगता है कि शुक्र पृथ्वी के बाहर पहले मानवीय अभियान (Human Mission to Venus) के लिए ज्यादा बेहत उम्मीदवार है. ताज्जुब की बात है कि शुक्र में नर्क जैसे हालात (Hell Like conditions of Venus) होनेके बाद भी वैज्ञानिक ऐसा क्यों सोच रहे हैं.

शुक्र के नर्क जैसे हालात
शुक्र ग्रह के हालात सौरमंडल के सभी ग्रहों में सबसे खराब हालात में से माने जाते हैं. वैज्ञानिक इसे इंसानों के लिए नर्क के हालात करार देते हैं.  यहां की सतह पर सीसा तक पिघल जाता है. यहां का तापमान 475 डिग्री सेल्सियस से भी ज्यादा है. इतना नहीं सतह पार वायुमंडलीय दाब भी पृथ्वी के गहरे समुद्रों के तल जितना है जो पृथ्वी के वायुमंडलीय दाब से 90 गुना ज्यादा है, जिसे इंसान सहन नहीं कर सकते हैं. यहां सल्फ्यूरिक एसिड के बादल हैं.

दूर से ही हो सकता है अवलकोकन
अभी खगोलविद केवल अंतरिक्ष यान के जरिए दूर से अवलोकन कर ही शुक्र ग्रह का अध्ययन कर सकते हैं. यहां तक एक अभियान में तो एक छोटा के प्रोब शुक्र के वायुमंडल पर गिराने की तैयारी है जो सतह पर पहुंचने से पहले ही खत्म हो जाएगा. इसके अलावा शुक्र पर एक दिन पृथ्वी के एक साल से भी बड़ा होता है.

और मंगल ग्रह?
वहीं मंगल ग्रह सूर्य दूरी के लिहाज से चौथा ग्रह है जो बहुत ठंडा ग्रह यहां औसत तापमान ही माइनस 18 डिग्री तक चला जाता है इसलिए यहां की सतह पर तरल पानी मिलना संभव ही नहीं है. यहां कई बार धूल भरी आंधियां भी चलती हैं और पृथ्वी के जैसे ही बादलों की प्रक्रियाएं दिखती हैं. यहां का दिन लगभग पृथ्वी के दिन जितना लंबा ही होता है. और गुरुत्व पृथ्वी की एक तिहाई होती है. इसका वायुमंडल पृथ्वी की तुलना में बहुत पतला है जिसमें 95 प्रतिशत कार्बन डाइऑक्साइड और एक प्रतिशत से भी कम ऑक्सीजन है.

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मंगल की तुलना में शुक्र ग्रह (Venus) पृथ्वी के ज्यादा पास है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)

शुक्र पृथ्वी के जैसा?
लेकिन फिर भी ऐसे कई कारण हैं जिसकी वजह से वैज्ञानिक शुक्र ग्रह को बहुत पसंद करते हैं.  ऐसे कई कारण हैं जिन्होंने वैज्ञानिकों को अध्ययन के लिए आकर्षित किया है जिसमें सबसे बड़ी वजह है कि अरबों साल पहले पृथ्वी और शुक्र ग्रह के हालात बिलकुल एक ही जैसे थे, लेकिन पृथ्वी एक खूबसूरत आवासीय ग्रह में बदल गई तो शुक्र ग्रह नर्क में तब्दील हो गया.

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कई मायनों में मंगल से बेहतर भी
इन बातों को देखते हुए हैरानी ही होती है कि आखिर वैज्ञानिक शुक्र को तरजीह क्यों देना चाहते हैं. शुक्रग्रह मंगल की तुलना में पृथ्वी के ज्यादा करीब है. एक साल के अंदर ही उस तक आना जाना किया सकता है जबकि मंगल ग्रह पर ऐसा करने के लिए तीन साल लगेंगे. वैज्ञानिकों को लगता है कि शुक्र ग्रहसे गुजरने वाले यान मंगल अभियान से पहले कापी उपयोगी साबित हो सकते हैं.

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शुक्र ग्रह (Venus) कई लिहाज से हमारे लिए मंगल से बेहतर ग्रह साबित हो सकता है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: JAXA )

छवि ज्यादा खराब
जॉन हॉप्किंस यूनिवर्सिटी में एप्लाइड फिजिक्स लैबोरेटरी के शोधकर्ता और रिपोर्ट के एक लेखक डॉ नोआम आइजेनबर्ग का कहना है कि शुक्र का छवि खराब इसलिए हुए है क्योंकि उसकी सतह का वातावरण इतना खराब है.अभी नासा की योजना चंद्रमा से मंगल की ओर जाने की है. लेकिन हम शुक्र को एक अतिरिक्त लक्ष्य बनाने की राय सामने रख रहे हैं.

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लेकिन इसके अलावा भी शुक्र ग्रह में बहुत सी खूबियां भी हैं. उसका आकार भार और यहां तक कि सूर्य से दूरी भी एक जैसी है. फिर भी दोनों के हालात बहुत अलग है. इस बात को रेखाकिंत करने वाली रिपोर्ट पिछले सप्ताह पेरिस में हुई इंटरनेशनल एस्ट्रोनॉटिकल कॉन्ग्रेस में प्रस्तुत की गई थी. इन सब बातों के बीच गौर करने वाली बातों मे से एक यह भी है कि अगर मंगल ग्रह पर टेराफॉर्मिंग के जरिए तापमान बढ़ाने की बात हो सकती है तो शुक्र पर भी इस तरह के बदलाव के बारे में क्यों नहीं सोचा जा रहा है.

Tags: Earth, Mars, Research, Science, Space, Venus

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