लाइव टीवी

इच्छा मृत्यु के समर्थक थे सावरकर, आखिरी वक्त में खाना-पीना छोड़ दिया था

News18Hindi
Updated: October 15, 2019, 9:27 PM IST
इच्छा मृत्यु के समर्थक थे सावरकर, आखिरी वक्त में खाना-पीना छोड़ दिया था
विनायक दामोदर सावरकर पहले ऐसे शख्स थे जिन्होंने 1857 की लड़ाई को भारत का पहला स्वतंत्रता संग्राम कहा था (फाइल फोटो)

सावरकर (Savarkar) ने अपनी मृत्यु से दो साल पहले 1964 में 'आत्महत्या या आत्मसमर्पण' शीर्षक से एक लेख लिखा था.

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 15, 2019, 9:27 PM IST
  • Share this:
नईदिल्ली. वीर सावरकर (Veer Savarkar) के नाम से मशहूर विनायक दामोदर सावरकर न सिर्फ एक क्रांतिकारी (Revolutionary) थे बल्कि इसके साथ ही उन्हें एक अच्छे वक्ता, विद्वान, लेखक, कवि, दर्शनशास्त्री और सामाजिक कार्यकर्ता के तौर पर भी जाना जाता है. सावरकर 28 मई, 1883 को महाराष्ट्र (Maharashtra) के नासिक में जन्मे थे. अभी वे छोटे ही थे तभी उनके पिता दामोदरपंत सावरकर और माता राधाबाई का निधन हो गया था. उन्होंने छोटी उम्र में ही 'मित्र मेला' नाम का एक संगठन (Organisation) बनाया था, जिसका नाम आगे चलकर 'अभिनव भारत' कर दिया गया. यह संस्था भारत की स्वतंत्रता के लिए काम करती थी.

ये भी पढ़ें : लोकतंत्र के खात्मे का मंसूबा रखने वाले आंतकी संगठन जेएमबी का कच्चा चिट्ठा

इसलिए वापस ले ली थी डिग्री
सावरकर ने पुणे (Pune) के फर्ग्यूसन कॉलेज से बीए किया था. तत्कालीन भारत सरकार ने जब सावरकर को सरकार विरोधी गतिविधियों में सक्रिय पाया तो उनकी ग्रेजुएशन की डिग्री वापस ले ली. जून, 1906 में वे बैरिस्टर बनने के लिए लंदन (London) गए. वहीं उन्होंने '1857 चे स्वातंत्र्य समर' नाम की किताब लिखी. इसी किताब में सावरकर ने 1857 के भारतीय स्वतंत्रता संग्राम (1857 Freedom Struggle) को सावरकर ने ही पहली बार आजादी की पहली लड़ाई कहा था.

वे उस दौर में हथियारों के दम पर भारत को स्वतंत्रता दिलाने के समर्थक थे. उन्होंने लंदन जाकर 'द ऑनरेबल सोसाइटी ऑफ ग्रे इन' से बैरिस्टर की पढ़ाई की थी. लेकिन प्रैक्टिस के दौरान वीर सावरकर ने इंग्लैण्ड में राजा के प्रति वफादारी की शपथ लेने से मना कर दिया था. ऐसे में उन्हें वहां वकालत करने से रोक दिया गया था.

गिरफ्तार हुए सावरकर
13 मार्च, 1910 को उन्हें ब्रिटिश सरकार विरोधी गतिविधियों में गिरफ्तार कर भारत भेजा गया लेकिन वे रास्ते में ही कंटेनर से भाग निकले. बाद में उन्हें 50 साल की आजीवन कारावास की सजा मिली और उन्हें काला पानी की यह सजा काटने के लिए अंडमान की सेल्युलर जेल भेज दिया गया. बाद में उन्हें 6 जनवरी, 1924 को रिहा कर दिया गया.
Loading...

ज़रूरी जानकारियों, सूचनाओं और दिलचस्प सवालों के जवाब देती और खबरों के लिए क्लिक करें नॉलेज@न्यूज़18 हिंदी

इसके बाद उन्होंने गैर राजनीतिक कार्यक्रमों में हिस्सा लिया.1937 में सावरकर को हिंदू महासभा का अध्यक्ष चुना गया. उस दौरान उनके भाषण हिंदू समूहों के बीच बहुत चर्चित हुए. 5 फरवरी, 1948 को उन्हें महात्मा गांधी की हत्या के आरोप में गिरफ्तार किया गया हालांकि कोर्ट में सुनवाई के दौरान सबूतों के अभाव में उन्हें रिहा कर दिया गया.

इच्छा मृत्यु के समर्थक थे सावरकर
कहा जाता है कि सावरकर ने अपनी मृत्यु को खुद ही चुना था. सावरकर ने अपनी मृत्यु से दो साल पहले 1964 में 'आत्महत्या या आत्मसमर्पण' नाम का एक लेख लिखा था. इस लेख में उन्होंने अपनी इच्छा मृत्यु के समर्थन को स्पष्ट किया था. इसके बारे में उनका कहना था कि आत्महत्या और आत्म-त्याग के बीच एक महत्वपूर्ण अंतर होता है.

सावरकर ने तर्क दिया था कि एक निराश इंसान आत्महत्या से अपना जीवन समाप्त करता है लेकिन जब किसी के जीवन का मिशन पूरा हो चुका हो और शरीर इतना कमजोर हो चुका हो कि जीना असंभव हो तो जीवन का अंत करने को स्व बलिदान कहा जाना चाहिए.

सावरकर की आत्मकथा 'मेरा आजीवन कारावास' के परिशिष्ट में उनके अंतिम दिनों में लिखे गए कई पत्र प्रकाशित हैं. इसी में एक पत्र ऐसा भी है जिसमें उन्होंने कई तर्कों और अपने जीवन में आए क्षणों के जरिए इच्छा मृत्यु की व्याख्या भी की है. अपने आखिरी दिनों में उन्होंने दवाइयां लेनी भी बंद कर दी थीं. साथ ही उन्होंने खाना-पीना भी छोड़ दिया था. इसलिए लोग कहते हैं कि उन्होंने इच्छा मृत्यु चुनी.

फरवरी, 1966 से वे पूरे तौर पर व्रत करने लगे थे. इस व्रत में वे न तो जीवनरक्षक दवाइयां खा रहे थे और न ही खाना-पानी. 26 फरवरी तक वे ऐसे ही उपवास करते रहे. इसके बाद उनकी मृत्यु हो गई. उस समय उनकी उम्र 83 साल थी.

यह भी पढ़ें

भारतीय सैनिकों ने इस तरह जान देकर की थी इज़रायल की हिफ़ाज़त
...तब रवि शास्त्री करते थे सौरव गांगुली की तारीफ, पैरवी भी की थी

News18 Hindi पर सबसे पहले Hindi News पढ़ने के लिए हमें यूट्यूब, फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करें. देखिए नॉलेज से जुड़ी लेटेस्ट खबरें.

First published: October 15, 2019, 7:54 PM IST
Loading...
पूरी ख़बर पढ़ें अगली ख़बर
Loading...