क्यों फ्रांस के मुस्लिम समुदाय में वर्जिनिटी सर्टिफिकेट बनवाने की लगी होड़?

इंडोनेशिया में महिलाओं को पुलिस में भर्ती के लिए ‘वर्जिनिटी टेस्ट’ देना पड़ता है- सांकेतिक फोटो (pickpik)
इंडोनेशिया में महिलाओं को पुलिस में भर्ती के लिए ‘वर्जिनिटी टेस्ट’ देना पड़ता है- सांकेतिक फोटो (pickpik)

फ्रांस के मुस्लिम समुदाय (Muslim community in France) में शादी से पहले लड़कियों को वर्जिन होने का सबूत (proof of virginity) देना होता है. अब एक बिल के सहारे फ्रेंच राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों (president Emmanuel Macron) ने इस परंपरा पर बैन की पेशकश की है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 4, 2020, 2:57 PM IST
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पिछले दशकभर से आतंकी हमले झेल रहा फ्रांस एक नया बिल ला रहा है, जो इस्लामिक कट्टरता से मुकाबला करेगा. इस बिल में कई पॉइंट्स के अलावा एक खास बात जो है, वो है फ्रांस में मुस्लिम महिलाओं पर हिंसा को टारगेट करना. फ्रांस में इस समुदाय की युवतियों को शादी से पहले खुद को वर्जिन साबित करना होता है. इसके लिए युवतियां वर्जिनिटी सर्टिफिकेट बनवाती हैं.अब अगले साल इसपर बैन लग सकता है.

देना होता है सबूत
फ्रांस के मुस्लिम समुदाय में शादी से पहले लड़कियों को अपने वर्जिन होने का सबूत देना होता है. इसके लिए वे डॉक्टरों की मदद लेती हैं, जो उनके लिए इस तरह का सर्टिफिकेट जारी कर देते हैं, जो बताए कि शादी से पहले उनका किसी से शारीरिक संबंध नहीं रहा. यहां तक कि कई युवतियां अपने को वर्जिन बताने के लिए सर्जरी तक का सहारा लेती हैं जो काफी दर्दनाक होती है.

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क्या होता है सर्जरी में


इसके लिए युवतियां हाइमनोप्लास्टी की मदद ले रही हैं. ये वो सर्जरी है, जिसमें सेक्स के बाद हाइमन को वापस सिल दिया जाता है. बता दें कि हाइमन वजाइन की झीनी सी परत होती है जो शारीरिक संबंध बनाने या चलने-दौड़ने या किसी तरह की चोट से भी फट जाती है. वहीं हाइमन का न टूटना सेक्स न होने का सबूत माना जाता है. अब फ्रांस में अविवाहित मुस्लिम लड़कियां, शादी तय होने पर यही सर्जरी करवा रही हैं ताकि उनके पति को तसल्ली रहे.

कई युवतियां हाइमनोप्लास्टी की मदद ले रही हैं- सांकेतिक फोटो (pxhere)


डॉक्टर बना देते हैं सर्टिफिकेट
फ्रांस की सामाजिक सेवा संस्था Maison des femmes de Saint-Denis के फाउंडर घेता हातेम बताते हैं कि क्लिनिक जाने वाली अधिकतर लड़कियां वर्जिन नहीं होती हैं लेकिन सर्टिफिकेट या सर्जरी करवाने के बाद परिवार का उनपर यकीन बना रहेगा, ये सोचते हुए वे वर्जिनिटी सर्टिफिकेट इश्यू करने पर जोर देती हैं.

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साल 2018 से चल रहा विरोध
सर्जरी के लिए आने वाली लड़कियां अपनी पहचान जाहिर नहीं करती हैं ताकि किसी भी हाल में क्लिनिक से होते हुए बात परिवार तक न चली जाए. सबकुछ चोरी-चुपके किया जा रहा है. यही सब देखते हुए साल 2018 में फ्रांस सरकार और वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन (WHO) दोनों ने ही वर्जिनिटी सर्टिफिकेट जैसी परंपरा का क्रूर और महिला अधिकारों का खुला उल्लंघन मानते हुए युवतियों-युवकों से इसे बंद करने की अपील की. फ्रांस14 न्यूज के मुताबिक इसके बाद भी फ्रांस के मुस्लिम समुदाय में ये चला ही आ रहा है.

फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने नए बिल में इस परंपरा को खत्म करने की बात की


परंपरा को बंद करने सेपरेटिज्म बिल
फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों (French president Emmanuel Macron) ने नए बिल में इस परंपरा को भी खत्म करने की बात की है. राष्ट्रपति मैक्रों का कहना है कि कानून अगर बन जाए तो इसके कई फायदे होंगे. इसे सेपरेटिज्म बिल (Separatism bill) कहा जा रहा है.

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बिल की आउटलाइन फिलहाल जनता के सामने नहीं आई है लेकिन कई मुख्य बिंदुओं को लेकर फ्रांस का मुस्लिम समुदाय भड़का हुआ है. जैसे टीआरटी वर्ल्ड के मुताबिक इसके तहत फ्रांस में फ्रेंच इमाम ही होंगे और विदेश से सीखकर आने वाले या विदेशी लोगों को इमाम नहीं बनाया जा सकेगा, चाहे वो कितना ही जानकार क्यों न हो.

फ्रांस में सबसे ज्यादा मुसलमान
अमेरिकी अखबार द वॉल स्ट्रीट जर्नल (The Wall Street Journal) के मुताबिक बिल अगले साल की शुरुआत में संसद में पेश किया जा सकता है. मालूम हो कि यूरोप में सबसे ज्यादा मुसलमान फ्रांस में रहते हैं. साल 2017 के प्यू रिसर्च की रिपोर्ट के अनुसार फ्रेंच मुस्लिम आबादी देश की कुल आबादी का लगभग 8.8% हिस्सा है, जो सबसे बड़ी माइनोरिटी है.

वर्जिनिटी सर्जरी के लिए आने वाली लड़कियां पहचान जाहिर नहीं करतीं- सांकेतिक फोटो (pickpik)


नौकरी के लिए भी वर्जिन होने का सबूत
फ्रांस के मुस्लिम समुदाय की तरह ही मुस्लिम बहुल देश इंडोनेशिया में महिलाओं को पुलिस में भर्ती होने के लिए ‘टू फिंगर टेस्ट’ यानी ‘वर्जिनिटी टेस्ट’ देना पड़ता है. इस टेस्ट में लड़कियों के हाइमन की जांच की जाती है. इंडोनेशिया की पुलिस के मुताबिक टेस्ट की जरूरत इसलिए है क्योंकि ‘अच्छी लड़कियां’ ही अच्छी पुलिस बन सकती हैं. उनके मुताबिक अच्छी लड़की वो है जिसने सेक्स नहीं किया. ये टेस्ट कई सालों से किया जा रहा है पर नियम कहीं लिखा नहीं है. ह्यूमन राइट्स संस्थाओं के दबाव की वजह से इंडोनेशिया में टेस्ट पर रोक लगाई जा चुकी है लेकिन तब भी पुलिस में भर्ती के लिए टेस्ट चल रहा है.

क्यों नौकरी के लिए वर्जिनिटी टेस्ट
ऑकलैंड यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी (Auckland University of Technology) की एक स्टडी साल 2018 में ही प्रकाशित हुई, जिसके अनुसार यहां पर औरतों की पुलिस भर्ती में अब भी वजाइना और हाइमन टेस्ट किया जा रहा है. ह्यूमन राइट्स वॉच संस्था के Andreas Harsono ने ऑस्ट्रेलियन मीडिया ABC को दिए अपने एक इंटरव्यू में बताया कि इंडोनेशिया में लोग ऐसी महिला पुलिस पर यकीन नहीं कर पाते हैं जिसकी सेक्स लाइफ एक्टिव होती है या फिर जो कभी सेक्स वर्क से जुड़ी रही हो. ये खबर न्यूयॉर्क टाइम्स में छपी है.
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