Explained: क्यों अमेरिका और रूस के बीच तनाव दोबारा गहरा रहा है?

अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन (तस्वीर- साल 2011)

अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन (तस्वीर- साल 2011)

अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन (Joe Biden and Vladimir Putin tension) को हत्यारा कह दिया. इसके तुरंत बाद पुतिन ने पलटवार करते हुए बाइडन को लाइव चर्चा के लिए ललकारा. साथ ही दोनों देशों से राजदूतों की वापसी की बात चल निकली है.

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  • Last Updated: March 19, 2021, 11:58 AM IST
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अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन की विदेश नीति पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से अलग नजर आ रही है. ट्रंप का फोकस जहां चीन को घेरने पर था, वहीं बाइडन पहले ही दिन से रूस से नाराजगी जता रहे हैं. हाल ही में उन्होंने अपने बयानों से साफ कर दिया कि वो रूस की किसी भी बात का जवाब दोगुनी तेजी से देंगे. वो ऐसा कर भी रहे हैं. एक इंटरव्यू के दौरान उन्होंने पुतिन पर अपने विरोधियों की हत्या की साजिश का आरोप लगाया.

बाइडन के पास हैं ये कारण

इससे पहले पुतिन के धुर विरोधी एलेक्सी नवलनी की रिहाई की मांग भी अमेरिका कर चुका है, जबकि ये रूस का आंतरिक मामला है. इसके अलावा कथित तौर पर बाइडन के पास वो रिपोर्ट है, जिसमें साल 2020 के चुनावों में पुतिन डोनाल्ड ट्रंप की मदद करने की कोशिश कर रहे थे. माना जा रहा है कि इसी बात को लेकर बाइडन खासतौर पर पुतिन पर भड़के हुए हैं.

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ताजा मामलों के अलावा ऐसा लगता है कि नया अमेरिकी तंत्र पुरानी सोच के आधार पर नीतियां बना सकता है, जिसमें अमेरिका रूस को दुश्मन मानता रहा. हालात इतनी तेजी से बदल रहे हैं कि रूस और अमेरिका के बीच का तनाव शीत युद्ध में बदलने की आशंका भी जताई जा रही है. शीत युद्ध दूसरे विश्व युद्ध के बाद के समय में हुआ राजनैतिक और आर्थिक बदलाव था. इस शब्द का पहली बार इस्तेमाल ब्रिटिश लेखक जॉर्ज ऑरवेल (George Orwell) ने 1945 में किया था, जिसके बाद ये चलन में आया.

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रूस और अमेरिका के बीच का तनाव शीत युद्ध में बदलने की आशंका भी जताई जा रही है- सांकेतिक फोटो


विचारधारा को लेकर शुरू हुआ था तनाव



शीत युद्ध के शुरू और खत्म होने की कोई नियत तारीख नहीं थी लेकिन ये 1945 से 1989 के बीच का दौर था. असल में तब तत्कालीन सोवियत संघ और अमेरिका के बीच तनाव बहुत बढ़ गया था. इसके पीछे राजनैतिक विचारधारा को दोष दिया जाता है. जैसे अमेरिका में पूंजीवाद को माना जाता रहा, वहीं रूस में कम्युनिज्म को. दोनों ही ये मानते थे कि उनका सिस्टम ज्यादा बेहतर है. साथ ही वे आरोप लगाने लगे थे कि दूसरा देश अपने सिस्टम को हर जगह लागू करने की फिराक में है. यही बात तनाव का कारण बनी.

दो खेमों में बंटी दुनिया

इसकी शुरुआत दूसरे विश्न युद्ध के बाद हुई. अमेरिका और सोवियत संघ तब सबसे ताकतवर देश थे और उनके कहने का असर दूसरे देशों पर पड़ना ही पड़ना था. दोनों देश अपने तरीके से दूसरे देशों को चलाने की सोचने लगे. यूरोप को लेकर उनके बीच मतभेद था कि इसे कैसे बांटा जाए. विचारधारा की इस लड़ाई में अमेरिका के साथ ब्रिटेन और कई यूरोपियन देश आ गए. उन्होंने नाटो का गठन किया. वहीं सोवियत संघ ने पूर्वी यूरोप के देशों के साथ मिलकर वॉरसा समझौता कर लिया.

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उनके बीच तनाव के इस वक्त को शीत युद्ध कहा जाता है. शीत इसलिए कहते हैं कि तनाव काफी ज्यादा होने के बाद भी सीधे-सीधे युद्ध नहीं हुआ. बल्कि ये विरोधी देश तकनीक और आर्थिक तौर पर एक-दूसरे को पछाड़ने की कोशिश करने लगे.

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अमेरिका और रूस के बीच सीधी लड़ाई इसलिए नहीं हो सकी क्योंकि दोनों ही परमाणु शक्ति से लैस थे -सांकेतिक फोटो


तकनीकी तौर पर पछाड़ने की लगी होड़

स्पेस में सैटेलाइट भेजने की होड़ लग गई. परमाणु हथियारों की भी होड़ लग गई, जो अमेरिका और रूस में आज तक चली आ रही है. लड़ाई इसलिए नहीं हो सकी क्योंकि दोनों ही अगुआ देश परमाणु शक्ति से लैस थे. ऐसे में जंग छिड़ना काफी भयावह हो सकता था. यही वजह है कि दोनों ध्रुव सीधे युद्ध में नहीं उलझे.

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गरीब देशों के कंधे पर चली बंदूक

इसी बजाय वे दूसरे गरीब देशों की आड़ लेते रहे. कांगो, कोरिया, इथियोपिया, सोमालिया जैसे देशों में तब लगातार गृह युद्ध के हालात थे. अमेरिका और रूस दोनों ने ही अपनी सेनाएं यहां हालात काबू रखने के नाम पर भेजीं. हालांकि हुआ उल्टा ही. वे सेनाएं आपस में लड़ने लगीं. इसके साथ ही वे एक-दूसरे के यहां जासूस भेजते और गोपनीय सूचनाएं निकालने की कोशिश करते ताकि नीचा दिखा सकें.

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अमेरिकी राष्ट्रपति बाइडन पहले से ही पुतिन को लेकर आक्रामक रहे- सांकेतिक फोटो (Photo- news18 English via AFP)


इस तरह ढीला पड़ा तनाव

सत्तर के दशक के आखिर में दोनों देशों के बीच तनाव कम होने लगे. कई तरह की संधियां हुईं. अमेरिका ने रूस की विचारधारा वाले कम्युनिस्ट देश को संयुक्त राष्ट्र में शामिल किया. लेकिन शीत युद्ध बंद होने की सबसे बड़ी वजह थी सोवियत संघ का टूटना और अफगानिस्तान में उसकी हार. आखिरकार नब्बे की शुरुआत में युद्ध खत्म हुआ माना जाने लगा.

तब दोबारा ऐसा क्यों हो रहा है

इसकी वजह एक बार फिर सोवियत संघ का विघटन है. इसके बाद रूस बना, जिसे कायदे से नए राष्ट्र के तौर पर नई पहचान और सम्मान मिलना था लेकिन ऐसा नहीं हो सका. बल्कि अमेरिका इसके बाद भी रूस पर संदेह जताता रहा. अमेरिकी राष्ट्रपति बाइडन पहले से ही पुतिन को लेकर आक्रामक रहे. उप-राष्ट्रपति रहने के दौरान भी वो कई बार पुतिन को बगैर आत्मा का शख्स कह चुके हैं. अब वो खुलकर आक्रामक हो चुके हैं. यही देखते हुए विशेषज्ञ दोनों महाशक्तियों के बीच तनाव बढ़ने और शीत युद्ध या सीधे तीसरे विश्व युद्ध की आशंका जता रहे हैं.
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