खगोलविदों ने पहली बार नापी मैग्नेटर की सीधी दूरी, मददगार हो सकती है ये जानकारी

मेग्नेटर (Magnetar) की सटीक दूरी का मापन खगोलविदों ने पैरेलैक्स पद्धति (Parallax method) से किया है. (तस्वीर: ESA)
मेग्नेटर (Magnetar) की सटीक दूरी का मापन खगोलविदों ने पैरेलैक्स पद्धति (Parallax method) से किया है. (तस्वीर: ESA)

खगोलविदों ने पैरेलैक्स पद्धति (Parallex) का उपयोग कर पहली बार किसी मैग्नेटर (Magnetar) की सीधी दूरी नापी है इससे उन्हें एफआरबी (FRB) के स्रोतों की जानकारी हासिल करने में मदद मिल सकती है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: September 20, 2020, 1:06 PM IST
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हाल ही में खलोगविदों ने नेशनल साइंस फाउंडेशन के वेरी लॉन्गबेसलाइन ऐरे, वेल्बा (VLBA) का उपयोग कर हमारे मिल्कीवे (Milkyway) गैलेक्सी में स्थित मैग्नेटर (Magnetar) की सीधी दूरी नापी है. यह पहली बार है जब किसी इस तरह के पिंड का ज्यामिति दूरी (Geometrical distance) का मापन (Measurement) किया गया है. इस मापन से खगोलविदों को यह जानने में मदद मिल सकती है कि क्या मैग्नेटर्स लंबे समय से रहस्य बने हुए फास्ट रेडियो बर्स्ट या FRB की स्रोत होते हैं.

क्या होते हैं मैग्नेटर्स
मैग्नेटर्स खास प्रकार के न्यूट्रॉन तारे होते हैं. ये बहुत विशाल तारों के अत्याधिक घने अवशेष होते हैं जिनमें सुपरनोवा की तरह विस्फोट होता है, लेकिन इनकी मैग्नेटिक फील्ड बहुत ही ताकतवर होती है. एक आम मैग्नेटर की मैग्नेटिक फील्ड पृथ्वी की मैग्नेटिक फील्ड से खरबों गुना ज्यादा ताकतवर होती है. मैग्नेटर ही ब्रह्माण्ड के सबसे ज्यादा चुंबकीय पिंड बनाते हैं.

रेडियो पल्स भी उत्सर्जित करते रहते हैं मैग्नेटर्स
मेग्नेटर्स की खास बात यह भी होती है कि वे एक्स और गामा विकिरणों का प्रस्फोट उत्सर्जित कर सकते हैं. हाल ही में वे एफआरबी के स्रोत के प्रमुख दावेदार के तौर पर सामने आए हैं. साल 2003 में XTE J1810-197 नाम का मैग्नेटर खोजा गया था जो कि उन ऐसे छह पिंडों में से एक था जो रेडियो पल्स उत्सर्जित कर सकते थे. इसने ऐसा केवल साल 2008 तक किया और उसके बाद से एक दशक तक उसने रेडियो पल्स उत्सर्जित नहीं किए. लेकिन दिसंबर 2018 के बाद से उसने फिर से चमकीली रेडियो पल्स का उत्सर्जन शुरू कर दिया था.



पैरेलैक्स पद्धति से किया मापन
शोधकर्ताओं की एक टीम ने 2019 में जनवरी से नवंबर तक और उसके बाद साल 2020 में मार्च-अप्रैल में वेल्बा का उपयोग XTE J1810-197 का नियमित अध्ययन करने के लिए किया. शोधकर्ताओं ने जब पृथ्वी की सूर्य की परिक्रमा वाली कक्षा की दूसरी तरफ से मैग्नेटर को देखा, तो उन्हों ने पाया कि वे उसकी स्थान में  पिछले सुदूर पिंडों के मुकाबले थोड़ा सा परिवर्तन देख पा रहे हैं. पैरेलैक्स नाम के इस प्रभाव से खगोलविद ज्यामिति का उपयोक कर किसी पिंड की दूरी सीधे तरीके से नाम सकते हैं.

Neutron Star, Megnetar,
न्यूट्रॉन तारे (Neutron Star) में जब खास मैग्नटिक शक्ति (magnetic energy) आ जाती है तो वह मैग्नेटर (Mangetar) की श्रेणी में आ जाता है. (तस्वीर: NASA)


भविष्य में बहुत अहम होने वाला है यह मैग्नेटर
यह शोध मंथली नोटिसेस ऑफ द रॉयल एस्ट्रोनॉमिकल सोसाइटी में प्रकाशित हुआ है. ऑस्ट्रेलिया की स्विनबूर्न यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी के ग्रेजुएट विद्यार्थी हो डिंग ने बताया, ”यह किसी मैग्नेटर का पहले पैरेलैक्स मापन है. यह सबसे पास के मैग्नेटर्स में से एक है जो करीब 8100 प्रकाशवर्ष दूर होगा. इसलिए भविष्य में यह अध्ययन किए जाने वाले प्रमुख पिंडों में से एक होगा.”

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इस साल मिला था शक्तिशाली प्रस्फोट
इसी साल 28 अप्रैल को SGR 1935+2154 नाम का दूसरे मैग्नेटर ने थोड़े समय के लिए रेडियो प्रस्फोट उत्सर्जित किया था. यह हमारी मिल्की वे में सबसे अब तक का रिकॉर्ड किया हुआ सबसे शक्तिशाली रेडियो प्रस्फोट था. यह प्रस्फोट अन्य गैलेक्सियों से आने वाले प्रस्फोटों जितना शक्तिशाली तो नहीं था, लकिन इस प्रस्फोट से खगोलविदों को पता चल सका था कि मैग्नेटर्स भी एफआरबी उत्सर्जित कर सकते हैं.

Magnetar, FRB,
खगोलविदों का लगता है कि मेग्नटेर (Magnetor) की अति स्थिति एफआरबी (FRB) उत्सर्जन के लिए उपयुक्त होती है.


नहीं पता कैसे बनते हैं एफआरबी
एफआरबी या फास्ट रेडियो बर्स्ट पहली बार  साल 2007 में खोजे गए थे. यह बहुत ही ऊर्जावान होते हैं और केवल कुछ ही मिली सेकंड में खत्म हो जाते हैं उनके उत्पत्ति के बारे में जानकारी अब भी नहीं मिल सकी है, लेकिन उसकी विशेषताएं बताती हैं कि मैग्नेटर का अति वातावरण उन्हें पैदा कर सकता है.

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क्या फायदा हो सकता है इस जानकारी से
शोधकर्ताओं का कहना है कि मैग्नेटर की सटीक दूर पता होने से उनसे निकलने वाली रेडियो पल्सेस की ताकत की गणना की जा सकती है. और यदि ये एफआरबी के ही जैसा कुछ उत्सर्जित करते हैं तो हमें उसकी ताकत पता चलेगी. एफआरबी की ताकत में बहुत विविधता होती है. इसलिए वे जानना चाहते हैं कि क्या मैग्नेटर की पल्स की ताकत एफआरबी की ताकत के पास या उससे ज्यादा होती है या नहीं. शोधकर्ताओं का मानना है कि इस अध्ययन से खगोलविदों को एफआरबी की उत्पत्ति की प्रक्रिया समझने की दिशा में मदद मिल सकती है.
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