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volcanic eruptions cannot be predicted like cyclones know why viks

हम तूफानों की तरह क्यों नहीं लगा सकते ज्वालामुखी विस्फोटों का पूर्वानुमान?

ज्वालामुखियों का विस्फोट (Volcanic Eruptions) बहुत नुकसानदेह होता है, लेकिन इनका पूर्वानुमान कठिन होता है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)

ज्वालामुखियों का विस्फोट (Volcanic Eruptions) बहुत नुकसानदेह होता है, लेकिन इनका पूर्वानुमान कठिन होता है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)

ज्वालामुखी (Volcanos) दुनिया में विनाशाकारी घटनाओं में शामिल किए जाते हैं. लेकिन इनका पूर्वानुमान लगाना (Predictions) बहुत मुश्किल होता है. दूसरी तरफ वैज्ञानिकों के पास तूफानों (Storms) का पूर्वानुमान लगाने के लिए 200 साल पुराने आकड़ों के भंडार से लेकर सैटेलाइट तक की सुविधाएं हैं. लेकिन ज्वालामुखियों की हालात का बहुत ही कठिन और खतरनाक होते हैं जिससे उनका अध्ययन तक मुश्किल होता है.

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    हम बार बार देखते हैं कि दुनिया में लगभग हर देश में मौसम विभाग (Metrological Department) तूफानों का पूर्वानुमान (Forecasting the Cyclones) लगा लेता है. हम इन पूर्वानुमानों के आधार पर एक दो दिन पहले ही अपने तटीय क्षेत्रों में रह रहे लोगों और मछुआरों को सचेत कर देते हैं और काफी हद तक जानमाल के नुकसान से बच भी जाते हैं. लेकिन क्या हम ऐसा ज्वालामुखियों (Volcanos) के मामले में नहीं कर सकते? इस मामले में फिलहाल वैज्ञानिकों का दो टूक जवाब है- अभी नहीं. यह जानना जरूरी है कि आखिर ऐसा क्यों होता है कि तूफानों का तो पूर्वानुमान आसान है, लेकिन ज्वालामुखियों का नहीं.

    ज्वालामुखी में नहीं
    पिछले साल ही स्पेन के ला पाल्मा में आए ज्वालामुखी विस्फोट होते ही फौरन प्रतिक्रिया दिखाई गई. इससे करीब 84.3 करोड़ यूरो का नुकसान तो हुआ, लेकिन  केवल एक ही व्यक्ति की जान गई. ऐसे में सवाल उठा कि क्या इस तरह की आपदाओं के लिए समय से पर्याप्त रूप से पहले से अनुमान नहीं लगाए जा सकते हैं.

    तूफानों का पूर्वानुमान आसान
    अमेरिका के बफैलो यूनिवर्सिटी के ज्वालामुखी विशेषज्ञ कोलजेनबर्ग कहते हैं कि पूर्वानुमान लगाने में ज्वालामुखी विज्ञान चरम मौसम के पूर्वानुमान की तरह उन्नति कर रहा है, लेकिन वह कुछ दशक पीछे है. सबसे पहले तो हमारे पास मौसम के बहुत बड़ी ताताद में आंकड़े हैं. दूसरे हरिकेन जैसे तूफान बार बार आते हैं और प्राय: अपने मौसम में आते हैं.

    ज्वालामुखियों में दिक्कत
    वहीं दूसरी ओर ज्वालामुखी उत्सर्नज बार बार न हीं आते और उनका आने का कोई निश्चित मौसम नहीं होता है. हमारे पर मौसम की तरह उनके लिए इतने बड़े आकार में आंकड़े भी नहीं है. इसके अलावा ज्वालामुखियों का अवलोकन करना भी बहुत मश्किल काम होता है. जहां मौसम के 200 साल पुराने अवलोकन के आंकड़े हैं.  वहीं हवा और नमी की भी विस्तृत और सटीकजानकारी सैटेलाइट दे देते हैं.

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    तूफानों (Cyclones) का पूर्वानुमान लगाना ज्यादा आसान है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)

    हर जगह नहीं है ज्वालामुखी
    इसके अलावा मौसम हमारे चारों ओर फैला हुआ है. जबकि ज्वालामुखी पृथ्वी पर इधर उधर बिखरे पड़े हैं जिससे इनसे संबंधित आंकड़े हासिल करना बहुत मुश्किल होता है. इसके अलावा भूगर्भीय संकेतों को पकड़ने के यंत्र सीज्मोमीटर बहुत  महंगे  होते हैं और पूरी दुनिया में नहीं उपलब्ध हैं जिनका संचालन करना सभी के लिए संभव नहीं है.

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    अवलोकन में परेशानियां
    अलग-अलग प्रकार के मैग्मा ज्वालामुखी प्रस्फुटन को बहुत तेज कर सकते हैं जिससे इनके पास समय पर नहीं पहुंचा जा सकता है. वहीं अनियमित तौर से विस्फोट से इनका लगातार और नियमित अवलोकन करना मुश्किल हो जाता है. इसके साथ इनके अवलोकन में खतरा भी बहुत है और दूर से इनका अवलोकन भी नहीं हो पाता है.

    ज्वालामुखी विस्फोट (Volcanic Eruptions) के बारे में मूलभूत जानकारी भी जुटाना बहुत मुश्किल होता है. (तस्वीर: Pixabay)

    बहुत से जानकारी की जरूरत
    ज्वालामुखी के बर्ताव का पूर्वानुमान लगाने के लिए वैज्ञानिकों  कई जानकारी चाहिए होती हैं जिसमें मैग्मा का तापमान, रासायनिक संरचना, दबाव विकसित होने की प्रणाली, आदि शामिल हैं. अभी तक के सबसे उन्नत उपकरण भी ज्वालामुखियों के प्रस्फुटन का पूर्वानुमान लगाने में कारगर नहीं होते हैं.

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    धीरे धीरे भूकंपीय उपकरण हमें बेहतर जानकारी देने में सक्षम हो रहे हैं. लेकिन सैटेलाइट और हवाई सेंसर से मिले डाटा काफी उम्मींदें जगा रहे हैं. इनसे सक्रिय हो रहे ज्वालामुखियों की जानकारी मलसकती है. वहं म्यूऑन टोमोग्राफी जैसे तकनीक से ज्वालामुखी संरचनाओं की त्रिआयामी तस्वीरें बन सकती हैं. लेकिन जिस तरह अलग-अलग जगह के लोगों ने जानकारी जमा करने का काम किया है वह बहुत ज्यादा कारगर साबित हो सकता है.

    Tags: Climate, Earth, Environment, Research, Science

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