इंटरनेट पर वायरल हो रहा है नीला रंग उगलने वाला ज्वालामुखी, जानिए इसका सच

इंटरनेट पर वायरल हो रहा है नीला रंग उगलने वाला ज्वालामुखी, जानिए इसका सच
इस ज्वालामुखी का लावा नीले रंग का दिखाई दे रहा है जिसकी इंटरनेट पर खूब चर्चा है. (प्रतीकात्मक तस्वीर)

इंडोनिशिया में एक ज्वालामुखी (Volcano) से निकला लावा (Lava) रात को भी नीले (Blue) रंग का दिखाई दे रहा है

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आमतौर पर जब भी कोई ज्वालामुखी (Volcano) फटता है तो उससे आग निकलती है. इस आग का मतलब होता है कि जो लावा (Lava) निकलता है उसका रंग आग की तरह सुनहरा और पीला होता है जो रात में भी कुछ इसी तरह का दिखाई देता है. लेकिन इंडोनेशिया (Indonesia) में फट रहे ज्वालामुखी से एक हैरतअंगेज नजारा देखने को मिला. इस ज्वालामुखी निकला लावा रात को नीले रंग का दिखाई दिया है.

नीले रंग का दिखाई दे रहा है बहता लावा
इस आग के रंग की चमक इतनी तेज होती है कि इसके साथ ही आसमान में भी धुंआ छा जाता है. कावा इजेन नाम का यह ज्वालामुखी एक इलेक्ट्रिक ब्लू रंग की लावा उगल रहा है. यह नीले रंग का लावा पहाड़ की ढलान पर बहुत ही खूबसूरत दिखाई दे रहा है जिसने आसपास के लोगों का ध्यान खींचा है. इन इलाकों में दूर दूर से यात्री और फोटोग्राफर्स इस लावा की तस्वीर लेने के लिए आने लगे हैं.

लावा का रंग नहीं है ये नीली चमक
इस ज्वालामुखी को कई सालों से डॉक्यूमेंट करने वाले पेरिस के फोटोग्राफर ओलिवर ग्रुनेवाल्ड का कहना है कि यह नीली चमक लावा की नहीं है. उनका कहना है कि जब ज्वालमुखी की दरारों से सल्फ्यूरिक एसिड बाहर आती है और ऑक्सीजन के संपर्क में आने पर वह नीली ज्लावा पैदा करती है.





तो बहते लावा जैसा क्यों
इसके अलावा जब तरल सल्फर लगातार जलता है और वह पर्वत की ढलान से नीचे आता है तब वह यह भ्रम पैदा करता है कि लावा बह रहा है. ओलिवर का कहना है कि यह नीला रंग रात में और सूर्यास्त के बाद सबसे अच्छा दिखाई देता है.

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यहीं एक एसिड का तालाब भी
यहीं पर संसार का सबसे बड़ा अम्लीय (Acidic) क्रेटर तालाब भी है. इसमें हाइड्रोक्लोरिक एसिड की मात्रा बहुत ज्यादा है और प्रायः ज्वालामुखी से निकलने वाली गैसें इस तालाब के पानी से प्रतिक्रिया करती हैं जिससे यहां के पानी का पीएच (pH) 0.5 तक पहुंच जाता है. ठंडा होने पर गैसें निकलती हैं और तालाब में सल्फर के निक्षेप छोड़ जाती हैं

Lava
आमतौर पर लावा नारंगी या लाल रंग का दिखाई देता है. (प्रतीकात्मक तस्वीर)


तो क्या होता है लावा का रंग
दरअसल लावा का रंग उसके तापमान पर निर्भर करता है. जब लावा ज्वालामुखी के मुंह से निकल ही रहा होता है तो वह सबसे ज्यादा गर्म होता है और इस समय उसका तापमान हजार डिग्री सेल्सियस होता है. उस समय यह नारंगी यानि ऑरेंज रंग का होता है. लेकिन जब इसका तापमान 650 से 800 डिग्री के बीच हो जाता है तब इसका रंग गहरा लाल हो जाता है. तस्वीरों से भी साफ है जब कावा इजेन के मुंह से लावा जब निकल रहा है तब उसका रंग नारंगी रंग ही है लेकिन जैसे ही इसका आसपास के हालात से सामना होता है तो उसके प्रभाव रंग नीला दिखने लगता है.

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इतना ही नहीं इस ज्वालामुखी की तस्वीरें भी इंटरनेट पर वायरल हो गई हैं. लेकिन ऐसा नहीं है कि इसकी तस्वीरें पहली बार वायरल हो रही हैं. और न ही इस ज्वालामुखी से यह रंग पहली बार नजर आ रहा है, लेकिन हो सकता है कि दुनिया भर चल रहे लॉकडाउन के कारण लोगों का ध्यान इस पर ज्यादा जा रहा हो.
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