जानिए, Israel ने कैसे लड़ी दुनिया की पहली AI जंग

इजरायल डिफेंस फोर्स  (IDF) ने दुनिया के पहले AI युद्ध का दावा किया- सांकेतिक फोटो (flickr)

इजरायल डिफेंस फोर्स (IDF) ने दुनिया के पहले AI युद्ध का दावा किया- सांकेतिक फोटो (flickr)

इजरायल ने मई में आतंकी संगठन हमास के खिलाफ जोरदार जंग छेड़ी थी. माना जा रहा है कि इजरायली आर्मी ने इस लड़ाई में दुनिया में पहली बार आर्टिफिशल इंटेलिजेंस (artificial intelligence war by Israel against Hamas) अपनाया था.

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बीते महीने इजरायल और फलस्‍तीनी उग्रवादी गुट हमास के बीच लगभग दो हफ्ते तक संघर्ष चला. ये लड़ाई तब शुरू हुई थी, जब हमास ने जेरूशलम पर लंबी दूरी का रॉकेट हमला किया था. इसके बाद इजरायल ने भी जवाबी कार्रवाई की, और युद्ध की शुरुआत हो गई. अब हालांकि सीजफायर हो चुका है लेकिन इसी बीच इजरायल ने एलान किया कि उसने दुनिया के पहले आर्टिफिशल इंटेलिजेंस युद्ध की शुरुआत (first use of artificial intelligence) कर दी है. इस AI तकनीक का इस्तेमाल उसने हमास के खिलाफ किया था.

इजरायल डिफेंस फोर्स (IDF) ने पहले AI युद्ध का किया दावा 

यूरेशियन टाइम्स की रिपोर्ट में IDF के हवाले से बताया गया कि इजरायल ने हमास के खिलाफ अपने ऑपरेशन में ज्यादा से ज्यादा तकनीकों का इस्तेमाल किया और मैनपावर का कम उपयोग किया. बता दें कि इजरायल ने जेरूशलम पर आतंकी समूह के हमले के बाद एक ऑपरेशन चलाया था, जिसे गार्डियन ऑफ द वॉल्स नाम दिया गया. इस दौरान पहले इजरायल का मकसद हमास के साथ अपनी लड़ाई को निर्णायक स्थिति तक ले जाना था, लेकिन बाद में अमेरिका समेत दूसरे मित्र देशों के दखल के बाद आखिरकार युद्धविराम हुआ.

israel army use of AI against Hamas
इजरायल ने हमास के खिलाफ अपने ऑपरेशन में ज्यादा से ज्यादा तकनीकों का इस्तेमाल किया - सांकेतिक फोटो (flickr)

हमास का हुआ काफी नुकसान 

सीजफायर तो हो चुका लेकिन अब दुनिया के पहले AI युद्ध के दावे पर चर्चा छिड़ गई है. जेरूशलम पोस्ट ने इजरायली रक्षा मंत्रालय के एक अधिकारी के हवाले से बताया कि हमास की ताकत तोड़ने के लिए इजरायल ने तकनीक का भारी उपयोग किया. इसी की मदद से गजा पट्टी में एक के बाद एक एयरस्ट्राइक हुई और वहां भारी तबाही मची. गजा पट्टी पर हमास और इस्लामिक जेहाद की कई इमारतें नष्ट हो गईं, जो इजरायल समेत दुनिया में आतंक मचाने के लिए तैयार की गई थीं.

पहले ही तय हो चुके थे टारगेट 



एयरस्ट्राइक से पहले ही AI के जरिए टारगेट की पहचान कर ली गई थी. जेरूशलम पोस्ट के अनुसार मिलिट्री के पास सारे ही मिलिटेंट समूहों की पहचान के लिए एक प्लेटफॉर्म बना हुआ है, ताकि वक्त-जरूरत काम आ सके.

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इजरायल ने AI पर खूब ध्यान दिया 

वैसे तकनीक और सैन्य ताकत के मामले में इजरायल हमेशा से काफी मजबूत रहा. साथ में चारों ओर से दुश्मन देशों से घिरा होने के कारण उसने AI तकनीक का ज्यादा विकास कर लिया. इसपर कई सालों तक काफी लंबा-चौड़ा इनवेस्टमेंट किया गया.

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दुश्मन देशों से घिरा होने के कारण इजरायल ने AI तकनीक पर ज्यादा ध्यान दिया- सांकेतिक फोटो (pixabay)

ये तकनीकें हैं उसके पास 

इजरायल के पास कथित तौर पर कई तकनीकें हैं, जो युद्ध में उसे आगे रखेंगी. इनमें सिग्नल इंटेलिजेंस, विजुअल इंटेलिजेंस, ह्यूमन इंटेलिजें, जिऑग्राफिकल इंटेलिजेंस जैसी चीजें शामिल हैं. इन सारे तरीकों से रॉ डाटा जमा होता है और आर्मी उसका उपयोग करती है.

अलग-अलग यूनिट करती है अलग काम 

इजरायल की इंटेलिजेंस सेवा का नाम यूनिट 8200 (Unit 8200) है. इससे कई तरह के एडवांस प्रोग्राम बने, जिनमें से कुछ अलकेमिस्ट, गॉस्पेल और डेफ्ट ऑफ विस्डम हैं. ये तकनीकें इस तरह से डिजाइन हुईं, जो किसी भी देश से जंग के हालात बनने पर इजरायल को आगे रख सकती हैं.

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ये यूनिट बनाती है सॉफ्टवेयर 

एक और यूनिट का नाम J6/C4i लॉटेम यूनिट है. इसका काम आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के लिए बढ़िया से बढ़िया सॉफ्टवेयर बनाना है. इसके अलावा एक और यूनिट AI की मदद करती है. यूनिट 9900 नाम से इस ब्रांच का काम रॉकेट लॉन्चर, रॉकेट के भंडार, इंटेलिजेंस अफसरों, ड्रोन्स और यहां तक कि आतंकी संगठन हमास के कमांडरों के आवास की पहचान और उन्हें खत्म करना रहा.

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इजरायल आर्मी की कई यूनिट्स केवल AI पर काम करती हैं- सांकेतिक फोटो (news18 English via PTI)

हमास की सुरंगों को खत्म करना है मकसद 

हमास के पास सुरंगों का पूरा जखीरा है, जो इजरायल पर हमेशा खतरा लेकर आया. इसके जरिए आतंकी इजरायल के सैन्य ठिकानों तक पहुंचकर उसे नुकसान पहुंचाने की कोशिश करते रहे. इन सुरंगों को मैट्रो कहा जाता है. अब इजरायल इस कोशिश में है कि किसी तरह वो ऐसा AI बना सके जो इन सुरंगों की खोज कर उन्हें खत्म कर दे.

ये है आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस 

इजरायल के युद्द में AI उपयोग की चर्चा के बीच एक बार ये समझना भी जरूरी है कि आखिर ये AI है क्या. आसान भाषा में समझें तो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का अर्थ है एक मशीन में सोचने-समझने और फैसला लेने की क्षमता का विकास करना. इसे फिलहाल कंप्यूटर साइंस का सबसे आधुनिक रूप माना जाता है. इसमें कंप्यूटर इंसानों की तरह तुरंत फैसला लेता और काम करता है. वैसे तो AI की शुरुआत साठ के दशक में ही हो गई थी लेकिन अब जाकर ये रूप लेता दिख रहा है. युद्ध में इसका उपयोग इसी की मिसाल है.

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