क्या 4 अरब साल पहले चंद्रमा पर था जीवन, शोध से मिला इस सवाल का रोचक जवाब

क्या 4 अरब साल पहले चंद्रमा पर था जीवन, शोध से मिला इस सवाल का रोचक जवाब
चंद्रमा की सतह पृथ्वी की सतह से बहुत अलग होती है.

शोधकर्ताओं ने पाया की 4 अरब साल पहले चंद्रमा (Moon) पर जीवन अनुकूल परिस्थितियां बनने के एक नहीं बल्कि दो मौके आए थे.

  • News18Hindi
  • Last Updated: April 26, 2020, 2:47 PM IST
  • Share this:
नई दिल्ली: आज पृथ्वी का एकमात्र प्राकृतिक उपग्रह चंद्रमा (Moon) पर जीवन के अनुकूल परिस्थितियां (Habitability) बिलकुल नहीं हैं. अमेरिका अपनी महत्वाकांक्षी योजना के तहत जरूर यहां कुछ समय तक रहने लायक इंसानी बेस कैंप बनानी की तैयारी कर रहा है, फिर भी चंद्रमा पर जीवन अब भी असंभव ही है. लेकिन ताजा शोध के मुताबिक 4 अरब साल (4 Billion Years)पहले चंद्रमा पर जीवन के अनुकूल परिस्थिति की संभावना थीं.

क्या चांद पर मुमकिन था पहले जीवन
 आज चंद्रमा पर न तो विशेष वायुमंडल है, न सतह पर पानी, सौर ब्रह्माण्डीय विकिरण से बचाने वाला मैग्नेटोस्फियर, विविध रासायनिकता और न ही उपयुक्त तापमान विविधता. लेकिन शोध में पाया गया है कि हमेशा ही चांद पर इस तरह के हालात नहीं थे. शोध में इसी प्रश्न पर गौर किया गया कि क्या चांद पर पहले कभी जीवन होने की संभावना मौजूद थी यानि क्या चांद भी पहले कभी जीवन के लायक था.

एक बार नहीं दो बार
वैज्ञानिकों को लगता है कि चंद्रमा पर जीवन की संभावनाएं  एक बार नहीं बल्कि दो बार आईं. एस्ट्रोबायोलॉजी के जर्नल में प्रकाशित अध्ययन के मुताबिक चार अरब साल पहले चंद्रमा के निर्माण के कुछ समय बाद ही चंद्रमा की सतह के हालात सरल जीवन के अनुकूल हो गए थे. इतना ही नहीं इसके बात करीब 3.5 अरब साल पहले भी जब चंद्रमा पर ज्वालामुखी गतिविधियां तेज हो गईं थी, तब भी जीवन का समर्थन करने वाला हालात फिर से हो गए थे.



Moon
एक समय चांद की सतह सूखी नहीं थी.


कैसे हो गया यह मुमकिन
दोनों ही समय मे चांद पर बहुत गर्म गैसों की अत्याधिक मात्रा थी. शोधकर्ताओं ने पाया कि ये गैसें चांद के अंदर से उसकी सतह पर आईं थीं जिनमें बहुत सी मात्रा में पानी भी भाप के रूप में था. उनका कहना है कि प्रचुर मात्रा में बाहर निकलने वाली भाप लाखों सालों तक चांद की सतह पर तरल पानी और उसके वायुमंडल में वाष्प रूप में रहने के लिए पर्याप्त थी.

लंबे समय तक ऐसी परिस्थितियां रहने का क्या मतलब था
अध्ययन के सहलेखक वॉशिंगटने यूनिवर्सिटी के डिर्क शुल्ज माकुच का मानना है कि यदि चांद पर उस समय पानी और उपयुक्त वायुमंडल लंबे समय तक के लिए मौजूद रहा था, तब कम से कम वह जरूर जीवन अनुकूल हालातों के लिए तैयार हो रहा होगा.

हमेशा ही सूखा नहीं था चांद
शोधकर्ताओं ने हाल के कुछ स्पेस मिशन और चांद की चट्टानों और मिट्टी के नमूनों के विश्लेषण के आधार पर पाया कि चांद पहले उतना सूखा नहीं रहा था जितना कि माना जा रहा है. उनके मुताबिक चांद पर भी पृथ्वी की तरह जीवन पनपा होगा. लेकिन ज्यादा संभावना है कि वहां उल्का पिण्ड से वहां जीवन आया होगा.

Earth
पृथ्वी पर 3.5 अरब साल पहले जीवन के अनुकूल हालात बनने लगे थे.


तब तो पृथ्वी पर ही ऐसे ही थे हालात
गौरतलब है कि पृथ्वी पर ही जीवन के सबसे पुराने संकेत 3.5 और 3.8 अरब साल पहले के हैं. इस दौरान हमारे सौरमंडल में  बहुत से  उल्कापिण्ड  ग्रहों से टकराए थे. यह मुमकिन है कि कुछ उल्का पिण्ड में सरल जीवों की उपस्थिति हो और वे पृथ्वी से जाकर चांद पर पहुंच गए हों.

शोधकर्ताओं को लगता है कि उस समय चांद पर जीवन अनुकूल परिस्थितियां बन गई हों. हो सकता है कि चांद की सतह सूखने से पहले वहां पर कुछ तालाबों में सूक्ष्मजीवी पनप रहे हों. और ऐसा होने की संभावना ज्यादा है.

यह भी पढ़ें:

वैज्ञानिकों को मिला एक Hot Jupiter, दूसरी पृथ्वी खोजने में होगा सहायक

कब से खिसक रही हैं टेक्टोनिक प्लेट, शोधकर्ताओं को मिला इस अहम सवाल का जवाब

USCG ने बनाया चांद का नक्शा, जानिए क्यों माना जा रहा है यह अहम

बढ़ता CO2 पर्यावरण ही नहीं, इंसान के सोचने की क्षमता को भी पहुंचाएगा नुकसान

वैज्ञानिकों ने पहली बार देखा दो अलग ब्लैकहोल का विलय, जानिए क्यों है यह खास
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज