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Birthday Neil Armstrong : क्या सच में चांद पर पहला कदम रखने वाले आर्मस्ट्रांग ने कबूला था इस्लाम

चांद पर पहला कदम रखने वाले नील आर्मस्ट्रांग

चांद पर पहला कदम रखने वाले नील आर्मस्ट्रांग

52 साल पहले चांद (Moon) पर पहला कदम रखने वाले अमेरिकी अंतरिक्षयात्री नील आर्मस्ट्रांग (Neil Armstrong) का आज जन्मदिन है. जब वो चांद से वापस लौटे तो ये अफवाहें फैलने लगीं कि उन्होंने चांद पर अजान की आवाज सुनी थी और बाद में इस्लाम धर्म (स्वीकार कर लिया था. क्या थी सच्चाई

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    20 जुलाई 1969 के दिन अमेरिका के नील आर्मस्ट्रांग ने चांद पर पहला कदम रखा था. इस बात को 52 साल पूरे हो गए हैं. स्पेस एजेंसी नासा के महत्वाकांक्षी अपोलो 11 कार्यक्रम के तहत चांद पर कदम रखने वाले पहले इंसान के रूप में मशहूर रहे नील आर्मस्ट्रॉन्ग का नाम तो सबने सुना है, लेकिन चांद से लौटने के बाद उनके जीवन में क्या कुछ घटा? इससे ज़्यादातर लोग वाकिफ नहीं हैं. उनका जन्म 05 अगस्त 1930 में अमेरिका के ओहियो में हुआ था.

    चांद से लौटने के बाद आर्मस्ट्रॉन्ग दुनिया के सबसे मशहूर लोगों में से एक थे और उनका जीवन जीते जी एक किंवदंती से कम नहीं था. 16 जुलाई 1969 को लॉन्च अपोलो 11 मिशन संपन्न होने के कुछ समय बाद एक किस्सा मशहूर हुआ कि आर्मस्ट्रॉन्ग ने इस्लाम कबूल कर लिया, क्योंकि चांद पर उन्हें अज़ान सुनाई दी थी. आइए जानें कि कितना सच था ये किस्सा और झूठ था तो पूरा माजरा क्या था.

    सालों तक चर्चा में रहे इस किस्से में कई मोड़ आए लेकिन इसकी शुरुआत 1980 के दशक में हुई थी. क्या हुआ था और कैसे, इसकी हर परत छानेंगे लेकिन पहले ये जानें कि दावा क्या किया गया था. दावे के मुताबिक चांद पर गए अपोलो 11 के क्रू सदस्यों ने ‘एक अजनबी सी आवाज सुनी, लेकिन वो उस भाषा या ध्वनि का अर्थ नहीं समझे’ थे. बाद में जब आर्मस्ट्रॉन्ग इजिप्ट में थे, तब उन्होंने वैसी ही ध्वनि सुनी और पूछताछ करने पर उन्हें पता चला कि वो अज़ान थी. ये जानते ही आर्मस्ट्रॉन्ग ने इस्लाम कबूल कर लिया था.

    आइए, अब जानें कि इस दावे के पीछे क्या माजरा था और कैसे इस दावे की हकीकत सामने आई.

    एक गाने से दावे को मिला था बल
    80 के दशक में इंडोनेशिया के एक गायक सुहाएमी ने एक गाना बनाया था, जिसमें उल्लेख था कि ‘चांद पर अज़ान की आवाज़ गूंजी’. इस गाने में आर्मस्ट्रॉन्ग के इस्लाम कबूल करने का ज़िक्र भी था. इंडोनेशियाई मीडिया में इस गाने के बाद इस दावे को हाथों हाथ लिया गया और तरह तरह की खबरें छपीं. इजिप्ट और मलेशिया में भी इसी तरह की खबरें छपने और चर्चाएं शुरू होने लगीं. ये चर्चाएं इस कदर बढ़ीं कि 1983 में अमेरिका ने इन्हें अफ़वाह बताते हुए खंडन किया.

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    16 जुलाई 1969 को लॉंच हुए अपोलो 11 मिशन के तहत चांद की सतह पर उतरने वाले पहले मनुष्य के तौर पर पहचाने गए नील आर्मस्ट्रॉन्ग.

    चांद पर क्या हुआ था?
    आर्मस्ट्रॉन्ग के साथ एडविन आल्ड्रिन चांद पर सहयात्री थे, जो आर्मस्ट्रॉन्ग के 19 मिनट बाद चांद पर उतरे थे और अगले कई घंटों तक दोनों साथ में चांद पर थे. एडविन ने गाइडपोस्ट्स मैगज़ीन को 1970 में बताया था : ‘जब मैं लूनर मॉड्यूल से चांद की सतह पर उतरा तो कुछ देर वहां खामोशी थी. मैंने टेस्टामेंट के एक हिस्से का पाठ किया था. फिर चर्च की दी हुई वाइन मैंने प्याले में भरी थी…’ एडविन के लिखे इस पूरे लेख में कहीं ऐसा ज़िक्र नहीं था कि कोई ध्वनि या अज़ान जैसी आवाज़ सुनाई दी हो.

    आर्मस्ट्रॉन्ग के सहयोगी की चिट्ठी
    जब ये अफ़वाहें फैलीं तो आर्मस्ट्रॉन्ग के सहयोगी विवियन ने एशियन रिसर्च सेंटर इंटरनेशल क्रिश्चियन फेलोशिप के डायरेक्टर फिल पार्शल को चिट्ठी लिखी थी. उस चिट्ठी के शब्द थे : आर्मस्ट्रॉन्ग की तरफ से ये साफ जवाब दिया जाता है कि आर्मस्ट्रॉन्ग के इस्लाम कबूल कर लेने या चांद पर अज़ान सुनाई देने संबंधी जो चर्चाएं की जा रही हैं, उनमें कोई सच्चाई नहीं है. मलेशिया, इंडोनेशिया और दूसरे देशों में इस तरह की खबरें छप रही हैं, लेकिन इनमें किसी सत्यता का आधार नहीं लिया गया है. ये दुष्प्रचार खराब पत्रकारिता के कारण हुआ है. इस सिलसिले में आर्मस्ट्रॉन्ग खुद टेलिफोनिक इंटरव्यू के लिए राज़ी हो गए हैं.

    आर्मस्ट्रॉन्ग की जीवनी में भी उल्लेख
    इस्लाम कबूल करने की अफ़वाह इस कदर ज़ोर पकड़े हुए थी कि आर्मस्ट्रॉन्ग की जीवनी में इस बारे में उल्लेख किए गए और इसका खंडन किया गया. ‘फर्स्ट मैन’ नाम से छपी इस जीवनी में आर्मस्ट्रॉन्ग के हवाले से ही कहा गया कि ये सब अफ़वाहें हैं, सच नहीं. इसमें ये भी कहा गया कि दुनिया भर में कई संस्थाएं ये दावे भी करती रही हैं कि आर्मस्ट्रॉन्ग उनके सदस्य हैं, लेकिन ये सब भी ग़लत है और सिर्फ आर्मस्ट्रॉन्ग की शोहरत को नाजायज़ ढंग से भुनाने की कोशिश भर है. आर्मस्ट्रॉन्ग का इस्लाम कबूल कर लेना तो इस प्रवृत्ति का सबसे अतिशयोक्तिपूर्ण रहा.

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    फ्लोरिडा में एक कार्यक्रम में भाषण देते आर्मस्ट्रॉन्ग. इस कहानी की तस्वीरें विकिपीडिया से साभार.

    खंडन के और भी सबूत
    बार बार खंडन इस बात का भी सबूत है कि ये अफ़वाहें किस कदर प्रचारित हो चुकी थीं कि आर्मस्ट्रॉन्ग ने इस्लाम कबूल किया. सालों बाद नासा की वेबसाइट नासा.जीओवी पर भी खंडन करते हुए कहा गया कि नासा ने 1969 में हुई मून लैंडिंग के वक्त की पूरी ट्रांस्क्रिप्ट यानी प्रतिलिपि दस्तावेज़ और ऑडियो जारी किए हैं, जिनमें ऐसी किसी आवाज़ का ज़िक्र नहीं है, जैसे दावे किए गए. दूसरी ओर, आर्मस्ट्रॉन्ग ने खुले मंचों से समय समय पर हुए सवाल जवाब के सत्रों में भी इन खबरों को महज़ अफ़वाह करार दिया.

    और आखिरकार जारी हुआ फ़तवा
    एक वेबसाइट पर प्रकाशित जानकारी के मुताबिक शेख मुहम्मद सलीह अल मुनज्जिद के ज़रिए बाद में एक फ़तवा जारी​ किया गया (इस्लाम क्यूएंडए फ़तवा नंबर 20880) और इसमें साफ कहा गया कि आर्मस्ट्रॉन्ग के इस्लाम कबूल करने को लेकर जो अफ़वाहें फैलाई गईं, वो सब मनगढ़ंत हैं. इस पूरी कहानी को लेकर रिसर्च की और इस कहानी का कोई पुख़्ता आधार नहीं मिला कि आर्मस्ट्रॉन्ग ने सच में चांद पर अज़ान सुनी हो या इस्लाम कबूल किया हो. इस फ़तवे के बाद इस तरह की चर्चाओं पर धीरे धीरे विराम लगा.

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