क्या नेताजी सुभाष बोस युद्ध अपराधी थे, उनका नाम वार क्रिमिनल लिस्ट में था

क्या नेताजी सुभाष बोस युद्ध अपराधी थे, उनका नाम वार क्रिमिनल लिस्ट में था
क्या नेताजी वाकई युद्ध अपराधी थे, उनका नाम किसी युद्ध अपराधियों की लिस्ट में रखा गया था.

सुभाष चंद्र बोस (Subhash Chandr Bose) को लेकर लोग अब भी ये कहते मिल जाते हैं कि ब्रिटेन ने उनका नाम किसी वार क्रिमिनल की सीक्रेट लिस्ट (Secret list of war criminals) में डाल रखा था. इसीलिए जिंदा रहने के बाद भी वो कभी सामने नहीं आए. क्या वाकई ऐसी कोई लिस्ट बनी थी और सुभाष को वार क्रिमिनल घोषित किया गया था.

  • News18Hindi
  • Last Updated: August 18, 2020, 12:46 PM IST
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लंबे समय तक ये चर्चाएं होती रही हैं कि दूसरे विश्व युद्ध के बाद गठबंधन सेनाओं ने अपनी जो युद्ध अपराधियों की सूची तैयार की थी, उसमें नेताजी सुभाष चंद्र बोस का नाम था. भारत में अब भी लोग ये मानते हैं कि भारत और ब्रिटेन के बीच एक पैक्ट हुआ था, उसमें ये कहा गया था कि चूंकि नेताजी युद्ध अपराधी हैं, लिहाजा वो जब भी कभी जिंदा मिलते हैं तो उन्हें ब्रिटेन के हाथों में सौंप दिया जाएगा. इसलिए सुभाष कभी सार्वजनिक तौर पर बाहर नहीं आए.

देश में अब भी बहुत से लोग ऐसी चर्चाएं करते मिल जाते हैं. ज्यादातर लोगों को अब भी लगता है कि सुभाष उन युद्ध अपराधियों की सूची में थे, जो मित्र देशों और ब्रिटेन ने गोपनीय तौर पर बनाई थी.

अब आइए हम आपको इसकी हकीकत बताते हैं. वैसे तो इस बारे में तमाम जवाब-सवाल का विवरण नेताजी पर लिखी गई किताब "सुभाष बोस की अज्ञात यात्रा" में है, जो कुछ समय पहले प्रकाशित हुई है.



ऐसी कोई गोपनीय सूची कभी तैयार नहीं हुई
किताब का दावा है कि इसमें कोई सच्चाई नहीं कि युद्ध अपराधियों की कोई गोपनीय सूची तैयार हुई थी, जिसमें सुभाष चंद्र बोस का नाम है. इस सूची में केवल जर्मनी और जापान के उन लोगों का नाम है, जो युद्ध में मुख्य तौर पर शामिल थे.

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ये भी कहा गया कि सुभाष का नाम ब्रिटेन की एक गोपनीय युद्ध अपराधियों की सूची में जरूर था, जिसकी वजह से सुभाष ने जिंदा रहने के बाद भी कभी खुद को उजागर नहीं किया. हकीकत ये है कि ऐसी भी कोई लिस्ट कभी तैयार नहीं हुई.

क्या उन्हें युद्ध अपराधी घोषित किया गया था
जब वर्ष 2016 में भारत सरकार ने करीब 100 क्लासीफाइड फाइलों को जारी किया तो इस मसले ने फिर जोर पकड़ा कि सुभाष को युद्ध अपराधी घोषित किया गया था. इस बारे में नेहरू ने एक पत्र ब्रिटिश प्रधानमंत्री एटली को लिखा था.

सच तो ये है कि ऐसी कोई जानकारी कहीं भी नहीं है कि नेताजी का नाम कभी भी किसी युद्ध अपराधियों की सूची में रखा गया था. इस बारे में बस चर्चाएं ही ज्यादा उड़ती रही हैं


बाद में ये पत्र फर्जी पाया गया. जिसमें ना जाने कितनी गलतियां थीं. हां, ये हो सकता है कि अगर वो पकड़े जाते तो उन पर उसी तरह मुकदमा चलता, जिस तरह आजाद हिंद फौज के सैनिकों और अधिकारियों के खिलाफ लाल किले में चला था. हालांकि उस मुकदमे में आजाद हिंद फौज के ज्यादातर अफसर और सैनिक बरी हो गए थे.

ये भी महज एक अटकल ही है
ये भी कहा गया कि चर्चिल चाहते थे कि नेताजी का नाम युद्ध अपराधी सूची में शामिल किया जाए, जिस पर वायसराय के सेक्रेटरी ने सुझाव दिया कि अगर ऐसा किया तो भारत में हालात बेकाबू हो जाएंगे, जिसे संभालना मुश्किल हो जाएगा. ये भी कहा गया कि ब्रिटेन में विशेष तौर पर संसद में एक अध्यादेश लाया गया, जिसमें कहा गया कि नेताजी जब भी मिलें, उन्हें बंदी बनाया जाएगा और उन्हें दंड दिया जाएगा. ऐसा भी कोई उल्लेख कहीं नहीं मिलता.

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सरकार से पूछा गया कि क्या उनका नाम यूएन वार क्रिमिनल्स में है
इसी तरह लंदन में नेताजी के परिवार से जुड़ी उनकी एक पोती ने कहा कि नेताजी का नाम संयुक्त राष्ट्र की युद्ध अपराधियों की सूची में रखा गया है. कृपया प्रधानमंत्री इसे वहां से निकलवाएं. इस पर बेंगलुरु के आरटीआई एक्टिविस्ट ने केंद्र सरकार से पूछा, क्या उसके पास इस बारे में कोई सूचना है और कृपया ये बताएं कि इस दिशा में क्या किया गया. केंद्र ने उन्हें सूचित किया कि हमारे पास ऐसी कोई सूचना नहीं है.

जब एक बार इस संबंध में पीएमओ से पत्राचार द्वारा जानने की कोशिश की गई तो जवाब मिला कि उनके पास ऐसी कोई जानकारी नहीं है कि सुभाष चंद्र बोस को किसी वार क्रिमिनल लिस्ट में रखा गया था.


सरकार और यूएन के बीच इस बारे में पत्राचार 
हालांकि 1999 में भारत के विदेश मंत्रालय और संयु्क्त राष्ट्र संघ के उसके आफिस के बीच इस बारे में पत्राचार हुआ था कि पता लगाएं कि क्या ऐसा कुछ है. न्यूयार्क स्थित परमानेंट मिशन ऑफ इंडिया ने यूएन सेंट्रल रजिस्ट्री ऑफ वार क्रिमिनल्स एंड सेक्यूरिटी सस्पेक्ट्स का हवाला देते हुए लिखा कि नेताजी का नाम वहां नहीं है. लिहाजा जवाब ये है कि नेताजी सुभाष चंद्र बोस का नाम किसी भी तरह की युद्ध अपराधी सूची में नहीं है.
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