सावरकर के परिवार में बहू बनकर आई थी नाथूराम गोडसे की भतीजी

News18Hindi
Updated: May 22, 2019, 11:41 AM IST
सावरकर के परिवार में बहू बनकर आई थी नाथूराम गोडसे की भतीजी
वीडी सावरकर और नाथूराम गोडसे

महात्मा गांधी की हत्या केस में सुनवाई के दौरान सावरकर ने नाथूराम से अच्छी पहचान होने से इनकार किया था, लेकिन नाथूराम गोडसे और सावरकर के परिवार में बाद में आपसी रिश्ते काफी अच्छे रहे.

  • Share this:
नाथूराम गोडसे ने दिल्ली के बिड़ला हाउस में 30 जनवरी, 1948 की शाम पांच बजकर 17 मिनट पर महात्मा गांधी की हत्या कर दी थी. महात्मा गांधी की हत्या के षड्यंत्र के मामले में वीडी सावरकर का नाम भी आया था. दरअसल गांधी की हत्या से पहले 14 जनवरी और 17 जनवरी को नाथूराम गोडसे और नारायण डी. आप्टे से सावरकर की मीटिंग की बात हिंदू महासभा के इन सदस्यों को हथियारों की सप्लाई करने वाले दिगंबर बड़गे ने अपने बयान में कही थी. उसने यह भी कहा था कि 17 दिसंबर को जब मीटिंग के बाद गोडसे और आप्टे जा रहे थे तब सावरकर ने उनसे 'सफल होकर लौटने' की बात कहते भी सुना. इसी के बाद शक की सुई सावरकर की ओर घूमी थी.

हालांकि सावरकर ने किसी भी स्तर पर इस षड्यंत्र में शामिल होने की बात से इनकार किया था. सावरकर का कहना था कि बड़गे को गलतफहमी हुई है और गोडसे और आप्टे को उनसे कोई काम नहीं था. न ही ऐसे किसी षड्यंत्र के बारे में उन्हें कोई जानकारी थी और न ही इसके बारे में उनकी गोडसे-आप्टे से कोई बात हुई थी. सावरकर ने अपने पक्ष को अच्छी तरह से कोर्ट के सामने रखा. कोर्ट ने भी सबूतों के अभाव में सावरकर को बरी कर दिया.

नाथूराम के गांधी की हत्या से पहले सावरकर ने खुद से मिलने की बात पर सुनवाई के दौरान जो सफाई दी थी उसके बारे में रॉबर्ट पायने अपनी किताब 'द लाइफ एंड डेथ ऑफ महात्मा गांधी' में लिखते हैं, "वो कभी षड्यंत्रकारियों से नहीं मिले थे. अगर वो मिले थे तो मिलने का षड्यंत्र से कुछ भी लेना-देना नहीं था. वो कभी सीढ़ियों से नीचे नहीं उतरे. अगर वो उतरे और उन्होंने उन्हें जाते हुए लोगों से कहा कि सफल होकर वापस आओ तो इसे जरूर यह समझा जाना चाहिए कि षड्यंत्र से बिल्कुल अलग किसी चीज के बारे में बातें कर रहे थे... सावरकर ने हर वाक्य को (बड़गे के) बिल्कुल ही संदर्भ से अलग कर दिया और दिखाया कि उनका कोई सटीक मतलब नहीं था."

सावरकर ने अच्छे संबंधों से किया था इनकार

इसमें रोचक यह है कि अपना पक्ष कोर्ट के सामने रखने के दौरान सावरकर ने यह भी कहा था कि वो नाथूराम को बहुत अच्छी तरह से नहीं जानते थे. वह अक्सर उनसे मिलने के बजाए अपने साथियों से मिलने आया करता था, जो उन्हीं के घर में साथी कार्यकर्ता होने के चलते रहते थे. हालांकि बीमार रहने के चलते वो ज्यादा किसी से बातचीत नहीं करते थे. इससे भले ही दोनों के बीच बहुत अच्छे संबंधों का पता नहीं लगता हो, लेकिन गोडसे की फांसी और उसके भाई गोपाल गोडसे को आजीवन कारावास की सजा होने के बाद दोनों परिवारों के बीच अच्छे संबंधों की बात सामने आती है.

इतना ही नहीं गोपाल गोडसे के जेल जाने के बाद दोनों के बीच पारिवारिक संबंध भी बने. हालांकि दोनों के पारिवारिक रिश्तों को समझने के लिए आपको इन लोगों के बारे में जानना जरूरी है...

गोपाल विनायक गोडसे- ये नाथूराम का छोटा भाई था. जिसने गांधी की हत्या के षड्यंत्र में 14 साल की जेल काटी. गोपाल गोडसे ने 'गांधी हत्या आणि मी' यानी 'गांधी हत्या और मैं' नाम की किताब भी लिखी. बीबीसी की एक रिपोर्ट के अनुसार जब गोपाल गोडसे 1965 में जेल से छूटा तो वो अपनी पत्नी सिंधु ताई के साथ पुणे में 'सदाशिव पेठ' नाम की एक जगह पर रहने लगा. 1919 में जन्मे गोपाल गोडसे का 26 नवंबर, 2005 को निधन हो गया.
Loading...

सिंधु ताई- इकॉनमिक टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार छोटे भाई की पत्नी सिंधु ताई ने 1948 से 1965 के बीच लोहे का सामान बनाने के कारोबार की शुरुआत की थी और इसी के जरिए अपने बच्चों का पालन पोषण किया. पहले सिंधु ताई, नाथूराम के ही दूसरे भाई दत्तात्रेय की दुकान पर काम करती थीं, लेकिन बाद में उन्होंने प्रताप इंजीनियरिंग नाम की अपनी दुकान खोल ली. वह पुणे में ही दूसरा घर लेकर रहने लगीं. इस दुकान में उनका बेटा नाना गोडसे भी उनका हाथ बंटाता था. सिंधु ताई गोडसे का निधन 2007 में हुआ.

हिमानी सावरकर (फाइल फोटो)


गोपाल गोडसे और सिंधु ताई की दो बेटियां भी हैं. इनके नाम- विद्युलता और असीलता हैं. असीलता का नाम हिमानी सावरकर भी था. इन्हीं के चलते नाथूराम गोडसे और वीडी सावरकर के परिवारों में संबंध बने थे. हिमानी की मौत पर छपी नवभारत टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार हिमानी की शादी वीडी सावरकर के छोटे भाई नारायण सावरकर के बेटे अशोक सावरकर (वीडी सावरकर के भतीजे) से हुई थी. वह बाद में 'हिंदू महासभा' और 'अभिनव भारत' की नेता भी रहीं. हिमानी ने 2004 में लोकसभा चुनाव और 2008 में विधानसभा चुनाव भी लड़ा, लेकिन दोनों ही बार असफल रहीं. 2015 में उनका ब्रेन ट्यूमर से निधन हो गया था.

जिस वक्त नाथूराम को फांसी हुई मार्च, 1947 में जन्मी हिमानी मात्र एक साल आठ महीने की थीं. हालांकि सावरकर उनके काफी बड़े हो जाने तक जिंदा रहे. सावरकर की मृत्यु 26 फरवरी, 1966 को हुई.

यह भी पढ़ें:

लड़कियों जैसी हुई थी गोडसे की परवरिश, नथ पहनने के चलते नाम पड़ा नाथूराम

नॉलेज की खबरों को सोशल मीडिया पर भी पाने के लिए 'फेसबुक' पेज को लाइक 

News18 Hindi पर सबसे पहले Hindi News पढ़ने के लिए हमें यूट्यूब, फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करें. देखिए देश से जुड़ी लेटेस्ट खबरें.

First published: May 20, 2019, 6:37 PM IST
Loading...
पूरी ख़बर पढ़ें अगली ख़बर
Loading...