त्वचा पर सीधे छापे जा सकते हैं ये बॉडी सेंसर्स, जानिए कितने फायदेमंद हैं ये

त्वचा (Skin) पर आसानी से छप सकने वाले ये सेंसर (Sensors) बहुत दिनों तक त्वचा पर बने रह सकते हैं. (तस्वीर: LING ZHANG, PENN STATE/CHENG LAB AND HARBIN INSTITUTE OF TECHNOLOGY)
त्वचा (Skin) पर आसानी से छप सकने वाले ये सेंसर (Sensors) बहुत दिनों तक त्वचा पर बने रह सकते हैं. (तस्वीर: LING ZHANG, PENN STATE/CHENG LAB AND HARBIN INSTITUTE OF TECHNOLOGY)

बायोमैट्रिक सेंसर्स (Biometric Sensors) को अब सीधे त्वचा (Skin) पर छापा (Printed) जा सकेगा. नई तकनीक से छापे गए ये सेंसर्स उपयोग में बहुत ही किफायती भी हैं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 11, 2020, 6:30 PM IST
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आजकल बहुत से ऐसे गैजेट्स (Gagdets) बाजार में उपलब्ध हैं जो हमारी शरीर की बायोमैट्रिक मापन (Biometric measurements) को फौरन अंजाम देकर हमें जानकारी दे देते हैं. इसमें समार्टवॉच, इलेक्ट्रोड्स और अन्य मोड़े जा सकते वाले उपकरण (Devices) शामिल है जो हमारे लिए सटीक जानकारी के साथ उपयोग में भी बहुत आसान, लेकिन क्या हो अगर ये बायोमैट्रिक सेंसर (Biometric Sensor) हमारे शरीर (Body) में ही छापे (Printed) जा सकें. ताजा शोध ने ऐसा मुमिकन कर दिखाया है.

टैटू की तरह किया जा सकता है इसे प्रिंट
आज के आधुनिक गैजेट्स केवल हार्ट पेशेंट्स के लिए जटिल चिकित्सकीय उपकरणों तक ही सीमित नहीं हैं वे सरलतम रूप में एक फिटनेस बैंड की तरह भी काफी प्रचलित होने लगे हैं. अब शोधकर्ताओं ने एक ऐसा पहने जा सकने वाला सेंसर विकसित किया है जिसे त्वचा पर एक टैटू की तरह ही प्रिंट किया जा सकता है.

सामान्य तापमान में किया जा सकता है उपयोग
इस सेंसर को विकसित करने वालों का दावा है कि वे इस प्रिंटिंग को बिना किसी गर्मी के उपयोग के भी प्रिंट कर सकते हैं. पेन स्टेट डिपार्टमेंट ऑफ इंजीनियरिंग साइंस एंड मैकेनिक्स में डोर्थी क्विगल करियर डेवलपमेंट प्रोफेसर हुआनयू लैरी चेंग की अगुआई वाली टीम ने इस साइंस फंतासी वाले उपकरण को हकीकत में बदलने में सफलता पाई है.



सीधे शरीर पर प्रिंट किया जा सकता है इसे
एसीएस एप्लाइड मटेरियल्स एंड इटरफेसेस जर्नल में प्रकाशित इस शोध के सहलेखक और हार्बिन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के शोधकर्ता लिंग झांग ने बताया, “इस लेख में हमने सार्वभौमिक तौर पर लागू किए जाने वाली फैब्रिकेशन तकनीक के बारे में बताया है जिससे शरीर पर सीधे सेंसर्स को प्रिंट किया जा सकता है.

यह आ रही थी समस्या
इससे पहले चेंग ने एक पहने जा सकने वाले सेंसर्स के लिए एक लचीले प्रिंटेड सर्किट बोर्ड को बनाने कि कोशिश भी की थी. लेकिन सीधे त्वचा पर ही सेंसर को प्रिंट कर पाना अब तक संभव नहीं था क्योंकि सेंसर में धातुओं के हिस्सों की बॉन्डिंग प्रक्रिया बाधा बन रही थी.

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अब बाहरी उपकरणों (Devices) से शरीर (Body) के बारे में जानकारी हासिल करना पुरानी बात हो रही है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)


इस प्रक्रिया में करना पड़ा बदलाव
इस पद्धति के लिए सिंटरिंग प्रक्रिया का उपयोग बॉन्डिंग के लिए किया गया. इसमें सेंसर के नौनोपार्टिकल एक दूसरे से उच्च तापमान में जुड़ जाते हैं. यह तापमान करीब 300 डिग्री सेल्सियस होता है.

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बहुत अधिक तापमान कम करने की चुनौती
इसमें सबसे बड़ी समस्या यह है कि इस तापमान को इंसानी त्वचा बर्दाश्त नहीं कर सकती है. इंसानी शरीर का औसत तापमान 37.2 डिग्री सेल्सियस होता है और केवल 45 डिग्री पर ही त्वचा हमें हलकी जलन का अहसास होने लगता है. जबकि 300 डिग्री सेल्सियस का तापमान तो पूरे शरीर तक को जलाने के लिए काफी है.

एक परत बनाने के विचार से मिली उम्मीद
चेंग ने बताया कि इस समस्या के निजात पाने के लिए उनकी टीम ने सिंटरिंग की सहायता से बनी परत का प्रस्ताव दिया जिससे त्वचा को कोई नुकसान नहीं होगा और त्वचा पदार्थ से कम तापमान पर भी जुड़ सकेगी.

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यह उपकरण पहले बहुत ही गर्म तापमान पर काम कर पाता था जिससे वह त्वचा के लिए मुफीद नहीं था. (प्रतीकात्मक तस्वीर: यह उपकरण पहले बहुत ही गर्म तापमान पर काम कर पाता था जिससे वह त्वचा के लिए मुफीद नहीं था. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay))


ऐसा निकला हल
शोधकर्ताओं ने सिंटरिंग के जरूरी तापमान का 100 डिग्री सेंटीग्रेड तक कम करने के लिए नैनो पार्टिकल्स को मिलाया. चेंग ने माना कि यह तापमान कपड़ों पर प्रिंटिंग के लिए सही था, लेकिन फिर भी यह त्वचा जलाने के लिए काफी था. उन्होंने त्वचा और सेंसर के बीच की परत पर पॉली विनाइल एल्कोहल पेस्ट की मदद ली. इस पेस्ट का उपयोग फेसमास्क को हटाने के लिए किया जाता है.

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बहुत ही व्यापक तरह के उपयोग
यह सेंसर दिल की धड़कन की दर,ऑक्सीजन, नमी और तापमान को नाप सकता है.  चेंग ने कहा कि उनके नतीजे बहुत गहरे और सटीक हैं. यह सेंसर कई दोनों पानी के उपयोग के बाद भी त्वचा पर कायम रह सकता है और गर्म पानी से इसे हटाया जा सकता है. इससे त्वचा को कोई नुकसान भी नहीं होता है और सबसे बड़ी बात यह है कि यह अन्य प्रचलित सेंसरों की तुलना में पर्यावरण के ज्यादा अनुकूल है. टीम को लगता है कि इस बॉडी सेंसर को कोविड-19 के लक्षणों की निगरानी के भी काम के लायक बनाया सकता है.
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