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छोटे पैरों वाली लड़कियां देती हैं यौन सुख, इस मान्यता में बांध दिए जाते थे चीनी बच्चियों के पैर

छोटे पैरों वाली लड़कियां देती हैं यौन सुख, इस मान्यता में बांध दिए जाते थे चीनी बच्चियों के पैर

खास तरह से छोटे किए गए पैरों को lotus foot कहते हैं

खास तरह से छोटे किए गए पैरों को lotus foot कहते हैं

छोटी-छोटी बच्चियों के पैरों में कई बार लोहे के जूते भी पहना दिए जाते, ऐसे में चलने पर कई तरह के इंफेक्शन जैसे गैंग्रीन जैसी बीमारियों से उनकी मौत भी हो जाती थी.

    कोरोना वायरस (coronavirus) की वजह से फिलहाल जो देश सबसे ज्यादा चर्चा में है, वो है चीन (China). चीन के ही वुहान शहर से इसका संक्रमण फैला. माना जा रहा है कि एग्जॉटिक फूड (सांप, चमगादड़ का मांस) मार्केट की वजह से इस बीमारी के वायरस फैले. चीन में खाने के तरीके ही अजीब नहीं हैं, वहां की कई मान्यताएं और नियम पूरी दुनिया से अलग हैं. जानें, चीन की कुछ ऐसी ही अजीबोगरीब परंपराओं, कायदों और त्योहारों के बारे में.

    Foot-Binding- चीन में 10 वीं सदी से एक अजीब प्रथा चली आ रही है, वो है लड़कियों को उनके पैरों के आकार से बहुत छोटे जूते पहनाने की. माना जाता रहा कि लड़कियों के बड़े पैर बेडौल लगते हैं और छोटे जूते पहनने पर उनका आकार सुंदर और छोटा रहेगा. जबर्दस्ती तैयार किए गए इन पैरों को lotus foot कहा जाता था और माना जाता था कि पैर जितने छोटे होंगे, दुल्हन अपने पति को उतना ही ज्यादा यौन सुख दे सकेगी. छोटी-छोटी बच्चियों के पैरों में कई बार लोहे के जूते भी पहना दिए जाते, ऐसे में चलने पर कई तरह के इंफेक्शन जैसे गैंग्रीन जैसी बीमारियों से उनकी मौत भी हो जाती थी. साल 1911 में इस प्रथा का खूब विरोध हुआ और इसपर बैन लग गया लेकिन आज भी चीन के बहुत से लोग इसे मानते हैं.

    चीन में एग्जॉटिक फूड मार्केट को वेट मार्केट के नाम से जाना जाता है


    लीची और डॉग मीट फेस्टिवल (Lychee and Dog Meat Festival)- ये त्योहार गर्मियों में मनाया जाता है. इस त्यौहार के दौरान चीनी लोग कुत्तों को मारकर खाते हैं. ये वार्षिक महोत्सव चीन के Yulin और Guangxi शहरों में मनाया जाता है. ये त्यौहार 2009 से मानाया जाना शुरू हुआ और दस दिनों तक चला. जिस दौरान अनुमान लगाया गया कि 10 से 15,000 कुत्ते खाए गए. कुत्तों का मांस खाने की परंपरा चीन में 4,000 साल पहले शुरू हुई थी. चीन के लोक चिकित्सकों का मानना ​​था कि कुत्ते का मांस गर्मियों में शरीर की गर्मी दूर करने में मदद करेगा. वैसे तो एनिमल वेलफेयर फोरम संगठित होकर सालों से इसकी आलोचना कर रहा है लेकिन अब तक ये फेस्टिवल चले आ रहे हैं.

    सैनिकों की मुश्किल ट्रेनिंग- बेशक हर मुल्क अपने सैनिकों को कठिन परिश्रम से गुजरवाकर उन्हें हर परिस्थिति के लिए तैयार करता है लेकिन चीन में अलग ही दस्तूर है. यहां शुरुआती दौर में सैनिकों की ट्रेनिंग के दौरान उनकी यूनिफॉर्म के कॉलर में पिन लगा दी जाती है, ताकि उनकी गर्दन हमेशा ऊपर रहे. उनकी गर्दन ज़रा भी नीचे होती है तो पिन चुभ जाती है. धीरे-धीरे सैनिकों को बिना पिन वाली कॉलर के भी सिर ऊंचा रखने की आदत हो जाती है.

    चिड़िया के घोंसले का सूप- डॉग मीट फेस्टिवल की तरह यहां का ये खाना भी थोड़ा अजीब लग सकता है. यहां चिड़िया के घोंसले (edible birds nest) से बनाए गए सूप की काफी मांग हैं. सूप (yànwō) में जो घोंसला इस्तेमाल होता है, उसकी कीमत करीब डेढ़ लाख रुपए ($2,500 से शुरू) प्रति किलो बताई जाती है. ये काफी पौष्टिक माना जाता है, और खासकर सेहतमंद दिल और सेक्सुअल सेहत के लिए चीनी लोग इसे लेते हैं.

    यहां चिड़िया के घोंसले से बनाए गए सूप की काफी मांग हैं


    मौत की सजा- अलग-अलग देशों में दिए गए मृत्युदंड की तुलना में चीन में मौत की सजा ज्यादा सुनाई जाती है. साल 2005 में पूरी दुनिया में दी गई मौत की सजा से चार गुना ज्यादा सजा चीन में सुनाई गई थी. तब 1770 लोगों को गोली मारकर मौत की सजा दी गई थी. वहीं साल 2014 में चीन में 607 लोगों को मृत्युदंड दिया गया. ये आंकड़ें एमनेस्टी इंटरनेशनल की रिपोर्ट के मुताबिक हैं. असल आंकड़े इससे कहीं ज्यादा माने जा रहे हैं लेकिन चीन के सख्त कानून किसी को भी अपने देश में तांकझांक की इजाजत नहीं देते.

    पाइरेसी दर- सॉफ्टवेयर पाइरेसी के मामले में भी चीन अव्वल नंबर पर शुमार किया जाता है. ऐसा माना जाता है कि वहां 78 फीसदी सॉफ्टवेयर पाइरेटेड होते हैं. 2003 में, वहां सॉफ्टवेयर चोरी की दर 92 प्रतिशत थी. 2011 में BSA Global Software Piracy की रिसर्च में बताया गया था कि दुनिया भर में औसत सॉफ्टवेयर चोरी की दर 42 प्रतिशत थी. जबकि चीन में पायरेटेड सॉफ्टवेयर के 77 प्रतिशत उपयोग हुआ.

    चीन में फेसबुक, ट्विटर और यूट्यूब पर पाबंदी है


    सोशल मीडिया पर पाबंदी- चीन में फेसबुक, ट्विटर और यूट्यूब पर पाबंदी है. इसे वहां की कम्युनिस्ट पार्टी ने बंद किया था. वहां पर गूगल ने भी साल 2010 अपनी सेवाएं देना बंद कर दिया था. वहां की कम्युनिस्ट पार्टी ने इंटरनेशनल सोशल प्लेटफॉर्म्स को अपने मुल्क में बंद करने को Great Firewall of China (GFW) नाम दिया था.

    गुफाओं में रहते हैं चीन के लोग- चीन में वर्तमान में लोग गुफाओं में रहते हैं. इन गुफाओं को चीनी भाषा में Yaodong कहा जाता है. Yaodong में रहने वाले लोद शांक्सी प्रान्त में रहते हैं. इनकी तादाद लगभग 3 करोड़ (30 million) बताई जाती है. ये आंकड़े nydailynews के मुताबिक हैं. Green Architecture Research Center के डायरेक्टर Liu Jiaping का मानना है कि ये गुफाएं एनर्जी एफिशिएंट हैं, जिसकी वजह से यहां रहने वालों की शारीरिक और मानसिक सेहत काफी अच्छी रहती है. यही वजह है कि यहां के निवासी इन जगहों को छोड़ना नहीं चाहते हैं.

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    Tags: China, Corona, Corona Virus, Religion, Social media

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