मंगल ग्रह पर फिर दिखा अजीब सा लंबा बादल, जानिए क्या है इसका अनोखापन

मंगल ग्रह पर फिर दिखा अजीब सा लंबा बादल, जानिए क्या है इसका अनोखापन
मंगल ग्रह पर यह बादल बड़े अनोखेपन लिए है जिसका वैज्ञानिक दो साल से आने का इंतजार कर रहे थे.

वैज्ञानिकों को मंगल ग्रह (Mars) पर एक अजीब सा बादल (Wired Cloud) दिखता है जो नियमित रूप से, मंगल के एक खास इलाके के ज्वालामुखी (Volcano) के ऊपर ही बनता है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: August 1, 2020, 2:59 PM IST
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मंगल के ज्वालामुखी पर यह अजीब बादल कई बार बन चुका है. इस नियमित रूप से बनने वाले बादल को वैज्ञानिकों ने एक नाम तक दे दिया है. यह बादल न केवल एक खास जगह बनता है बल्कि खास मौसम में और उस मौसम के हर दिन कुछ घंटों के लिए बनता है और अगले दिन फिर बन जाता है. आर्सिया मान्स एलोंगेटेड क्लाउड ( Arsia Mons Elongated Cloud, or AMEC) नाम का यह बादल वैज्ञानिकों के लिए शोध का विषय बना हुआ है.

ज्वालामुखी के ऊपर बनता है यह बादल
यह अजीब बादल मंगल के ज्वालामुखी के ऊपर ही बनता है लेकिन इसका इस ज्वालामुखी से इस बात के अलावा कोई संबंध नही हैं. यह ज्वालामुखी मंगल के मशहूर ओलम्पिस मोन्स पर्वत के दक्षिणपूर्व इलाके में स्थित है. इस ज्वालामुखी के ऊपर आते जाते इस बादल का निर्माण यह ज्वालामुखी नहीं करता. वैज्ञानिकों ने इस बादल के बारे में यूरोपीय स्पेस एजेंसी के मार्स ऑर्बिटर (Mars Orbiter) के जरिए हासिल की है.

पहले से इंतजार था इस बादल का
चूंकि वैज्ञानिक इस बादल के आने के समय का इंतजार कर रहे थे और हाल ही में उनका इंतजार खत्म हुआ है. स्पेन के यूनिवर्सिटी ऑफ द बास्क कंट्री के पीएचडी उम्मीदवार और इस अध्ययन के प्रमुख लेखक जोर्ज हरनान्डेज-बर्नाल ने यूरोपीय स्पेस एजेंसी के बयान में कहा, “हम इस अजीब परिघटना की अध्ययन कर रहे हैं और कुछ समय पहले से इस बादल के बनने की उम्मीद कर रहे थे.”





हर समय इसी मौसम में बनते हैं ये बादल
हरनान्डेज-बर्नाल का कहना है, “ये लंबे बादल मंगल में हर साल उसके इस मौसम में बनते हैं. जब सूर्य दक्षिण की ओर ज्यादा दिखने लगता है और यह 80 दिनों या उससे ज्यादा के समय का मौसम होता है, जबकि हम अभी तक यह नहीं जान पाए हैं कि ये बादल हमेशा से ही इतने आकर्षक बने रहते हैं या नहीं.”

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कितना लंबा होता है मंगल का एक साल
उल्लेखनीय है कि मंगल ग्रह का एक साल पृथ्वी के एक साल जितना नहीं होता. इसका एक साल पृथ्वी के 687 दिनों का होता है. जबकि मंगल ग्रह का दिन पृथ्वी के एक दिन 37 मिनट के बराबर होता है मंगल की धुरी (Axis) भी पृथ्वी की धुरी की तरह झुकी हुई है और इसी वजह से वहां मौसमी बदलाव भी होते हैं.

कितना लंबा होता है यह बादल
इस बादल की बात की जाए तो यह करीब 1800 किलोमीटर तक लंबा होता है. इसकी पूंछ जैसी संरचना में बर्फीले पानी की मात्रा ज्यादा होती है. जबकि यह एक ज्वालामुखी के ऊपर होता है. फिर भी इसके बनने के पीछे ज्वालामुखी नहीं बल्कि स्थानीय हवाओं के यहां के भूभागों से अंतरक्रिया के कारण हैं.

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यूरोपीय स्पेस एजेंसी के मार्स ऑर्बिटर ने इस बादल की तस्वीरें ली हैं.


सुबह के समय ही रहता है यह बादल
यह बादल सुबह के बनता है कुछ घंटों के लिए रहता है और फिर गायब हो जाता है. इसके बाद यह अगले दिन सुबह फिर से आ जाता है. मार्स एक्सप्रेस के खास विजुअल मॉनीटरिंग कैमरे ने इसकी तस्वीरें ली हैं. इससे पहले इन बादलों को साल 2018 के सितंबर और अक्टूबर के महीनों में देखा गया था. उसके बाद से ये अब दिखाई देने शुरू हुए हैं. इस समय मंगल के उत्तरी गोलार्द्ध में दिन छोटे होते हैं जबकि दक्षिणी गोलार्द्ध में दिन लंबे होते हैं. आर्सिया मोन्स मंगल की भूमध्य रेखा के दक्षिण में स्थित है.

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वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि इस अजीब से बादल के अध्ययन करने से वे यह समझने में कामयाब रहेंगे कि यह कब से बन रहा है और यह केवल सुबह के समय ही क्यों बनता है.
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