• Home
  • »
  • News
  • »
  • knowledge
  • »
  • बंगाल में 52 साल बाद फिर बन रही है विधान परिषद, क्या है इसका मतलब?

बंगाल में 52 साल बाद फिर बन रही है विधान परिषद, क्या है इसका मतलब?

पश्चिम बंगाल में विधान परिषद बनाने का प्रस्ताव पास हो चुका

पश्चिम बंगाल में विधान परिषद बनाने का प्रस्ताव पास हो चुका

पश्चिम बंगाल में विधान परिषद (Vidhan Parishad) के गठन के ममता बनर्जी सरकार (Mamata Banerjee Government) के प्रस्ताव को मंजूरी मिल गई. वैसे 5 दशक पहले भी राज्य में विधान परिषद थी, जो 1969 में खत्म कर दी गई.

  • Share this:
    पश्चिम बंगाल में विधान परिषद (Vidhan Parishad in West Bengal) बनाने का प्रस्ताव पास हो चुका, हालांकि अभी इसे लोकसभा और राज्यसभा से भी पारित होना है, जिसके बाद राष्ट्रपति भी इसे मंजूर करेंगे. इसके बाद ही विधान परिषद बन सकेगी. लेकिन यहां सवाल ये आ रहा है कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) क्यों विधान परिषद बनाना चाहती हैं और इससे क्या फायदा या फिर बदलाव होगा? आइए, यहां समझें.

    ममता क्यों चाहती हैं परिषद?
    दरअसल अपने पहले कार्यकाल के दौरान भी ममता बनर्जी ने विधान परिषद का वादा किया था. इस बार भी उन्होंने ये वादा किया और माना जा रहा है कि उनके कई नेता विधान परिषद का सदस्य बनाए जाने का इंतजार कर रहे हैं. ऐसे में अगर टीएमसी ने वादाखिलाफी की तो नेता नाराज भी हो सकते हैं. यही कारण है कि ममता पर परिषद बनाने का दबाव है.



    कब तक बन सकेगा?
    इसमें कई पेंच हो सकते हैं, जिसके कारण परिषद का गठन काफी समय लेता है. ऐसा असम के मामले में भी हुआ था, तब वहां विधानसभा ने परिषद बनाने का प्रस्ताव पारित कर दिया लेकिन फिर मामला राज्यसभा में जाकर अटक गया. यही राजस्थान के साथ भी हुआ था.

    Vidhan Parishad West Bengal
    बंगाल में लगभग 5 दशक पहले भी विधान परिषद रह चुकी है


    पहले भी रही है परिषद
    बंगाल में लगभग 5 दशक पहले भी विधान परिषद रह चुकी है. इसकी शुरुआत आजादी से पहले साल 1935 में ही हो चुकी थी, जब पश्चिम बंगाल को विधानसभा और विधान परिषद में बांटा गया था. आजादी के बाद साल 1952 में भी बंगाल में ये व्यवस्था जारी रही. इसमें विधानसभा में 240 जबकि विधान परिषद में 51 सदस्य थे. परिषद को अगस्त 1969 में खत्म कर दिया गया था.

    क्या है विधान परिषद?
    भारत के संविधान के अनुच्छेद 168 के तहत इसका गठन होता है. इसमें मेंबरों की संख्या विधानसभा के एक तिहाई से ज्यादा नहीं हो सकती. स्टेट अगर विधान परिषद बनाना चाहे तो विधानसभा के तिहाई सदस्यों के सपोर्ट के साथ प्रस्ताव केंद्र में भेजता है. इसके बाद मंजूरी की प्रक्रिया होती है.

    कैसे होता है चुनाव?
    इसके मेंबरों में से एक तिहाई, राज्य विधानसभा के सदस्यों द्वारा चुने जाते हैं. बाकी तिहाई को नगर पालिका और जिला बोर्ड के सदस्य चुनते हैं. कुछ सदस्यों का चुनाव ग्रेजुएट मतदाता करते हैं, वहीं बाकी सदस्यों का चुनाव उस स्टेट के शिक्षक करते हैं. बंगाल में अभी 294 विधानसभा सीटें हैं, इसलिए अगर विधान परिषद का गठन होता है तो उसमें 98 सीटें हो सकती हैं.

    Vidhan Parishad West Bengal
    पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी (Photo- moneycontrol)


    किन राज्यों में है विधान परिषद?
    फिलहाल देश के 6 राज्यों में विधान परिषद है. इनमें आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, तेलंगाना, महाराष्ट्र, बिहार और उत्तर प्रदेश है. पहले जम्मू-कश्मीर में भी विधान परिषद हुआ करती थी, लेकिन केंद्रशासित राज्य होने के बाद से उसकी मान्यता चली गई.

    क्यों बीजेपी बंगाल में परिषद का विरोध कर रही है?
    बीजेपी का मानना है कि विधान परिषद के माध्यम से राजनीतिक रूप से खारिज हो चुके लोगों को पिछले दरवाजे सदन में भेजने की कोशिश हो रही है. इसे बैकडोर पॉलिटिक्स कहा जाता है. इसके अलावा बीजेपी ने जो दूसरी वजह गिनाई, उसके मुताबिक विधान परिषद बनने से राजकोष पर दबाव बढ़ेगा.

    क्या परिषद बनने से केवल टीएमसी को फायदा होगा?
    एक सवाल ये भी आ रहा है, लेकिन ऐसा नहीं है. हां, ये सही है कि अगर पश्चिम बंगाल में विधान परिषद बनी तो उसमें ज्यादा सदस्य टीएमसी के होंगे लेकिन बीजेपी के भी सदस्यों को भी जगह मिल सकेगी.

    पढ़ें Hindi News ऑनलाइन और देखें Live TV News18 हिंदी की वेबसाइट पर. जानिए देश-विदेश और अपने प्रदेश, बॉलीवुड, खेल जगत, बिज़नेस से जुड़ी News in Hindi.

    विज्ञापन
    विज्ञापन

    विज्ञापन

    टॉप स्टोरीज