जानिए क्या होता है गहरे महासागर के रहस्यमयी Blue Holes, क्यों हैं ये चर्चा में

जानिए क्या होता है गहरे महासागर के रहस्यमयी Blue Holes, क्यों हैं ये चर्चा में
ब्लू होल हाल हीं खोजे गए हैं जो अपने अंदर कई रहस्य समेटे है. (फोटो साभार: मोट मरीन लैब)

हाल ही में गोताखोरों ने फ्लोरीडा (Florida) की खाड़ी में एक ब्लू होल (Blue Hole) खोजा है जिसकी वजह से ये चर्चा में हैं. अब वैज्ञानिक भी इसका अध्ययन करने की तैयारी कर रहे हैं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: August 12, 2020, 10:00 AM IST
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अगर इंसान अंतरिक्ष (Space) में करोड़ों रहस्यों अनजान हैं तो गहरे महासागरों (Oceans) के रहस्य भी कम नहीं हैं. अमेरिका के नेशनल ओशियानिक एंड एटमॉस्फियरिक एडमिनिस्ट्रेशन (NOAA) के अनुसार दुनिय के 95 प्रतिशत महासागरों और 99 प्रतिशत महासागरी तल का अन्वेषण नहीं हो सका है. सागरों की गहराइयों में आज भी ऐसे कई जीव हैं जिनके बारे में हम जान नहीं पाए हैं. इन गहराइयों में आज भी वैज्ञानिक और शोधकर्ता खोजबीन कर रहे हैं. इन्ही गहराइयों में एक रहस्यमय जगह होती है जिसे ब्लू होल (blue holes) कहा जाता है. अब वैज्ञानिक इनके बारे में गहराई से छानबीन (Exploration) करने की तैयारी में  हैं.

क्या होते हैं ये ब्लू होल्स
ब्लू होल्स गहरे समुद्र में गहरे गड्ढे होते हैं. ये देखने और आकार में धरती पर पाए जाने वाले गहरे सिंकहोल जैसे गड्ढे ही होते हैं. जो कैल्शियम कार्बोनेट की शैलों से बने होते हैं. इनके आकार और गहराई अलग अलग होते हैं. लेकिन वैज्ञानिकों का मानना है कि इनमें विविध प्रकार के जीव जंतु पाए जाते हैं जिससे परिस्थितिकी और जैवविधितता के नजरिए से बहुत खास बन जाते हैं.

अभी क्यों चर्चा में हैं ब्लू होल
पिछले सप्ताह ही गोताखोरों ने अमेरिका की फ्लोरीडा की खाड़ी की किनारे के एक बड़ा ब्लू होल खोजा है. 425 फुट गहरे इस ब्लूहोल को वैज्ञानिकों ने ग्रीन बनाना नाम दिया है. यह पानी की ऊपरी सतह के 155 फीट गहराई पर मौजूद है. NOAA ने इस बारे में विस्तार से जानकारी दी है.



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इस तरह के ब्लूहोल सौ से दो सौ फुट गहरे समुद्र में पाए जाते हैं. (प्रतीकात्मक तस्वीर)


लेकिन ब्लू होल ही क्यों
ब्लूहोल समुद्र तल में वैसी ही स्थिति में हो सकते हैं जैसे रेगिस्तान में ओएसिस (Oasis) होते है. आसपास की बंजर समुद्री जमीन में वे जैवविविधता का भंडार हो सकते हैं. जिनमें शैवाल, जलशोषक जीव, घोंघे,  समुद्री कछुए, शार्क आदि विविध प्रकार के जीव जंतुओं की बहुतायत हो सकती है. इनके पानी का अपना अलग ही रसायनशास्त्र होता है. ऐसा लगता है कि इनका जमीन के नीचे के पानी से संबंध होता है जिससे अलग अलग पानी की परतें बन जाती हैं.

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बहुत कम जानकारी है इनके बारे में
इन ब्लूहोल के बारे में बहुत कम जानकारी मिल सकी है. इन तक मुश्किल पहुंच, बहुत ही विविध स्थानों पर इनकी मौजूदगी और बहुतायत, जैसे कई वजह हैं जिनसे ये अभी तक हमारे लिए अनजान ही रहे हैं. वास्तव में पहले ब्लूहोल की जानकारी वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं को नहीं बल्कि मछुआरों और गोताखोरों को मिली थी. अब ये दोनों समूह मिल कर ही इनकी विस्तार से जानकारी हासिल कर सकेंगे.

ग्रीन बनाना ने किया हैरान
हाल ही में खोजे गए पृथ्वी के सबसे गहरे ब्लू होल ने वैज्ञानिकों को हैरान किया हुआ है. इस नए ब्लू होल का नाम ग्रीन बनाना दिया गया है. इनके अध्ययन के लिए NOAA के वैज्ञानिकों की एक टीम के साथ मोट मैरीन लैबोरेटरी  और अन्य स्थानीय वैज्ञानिक संस्थाएं मिल कर काम करने जा रही हैं.

कैसे होगा अध्ययन
पहले गोताखोर एक उपकरण का उपयोग करेंगे जिसका नाम बैनथिक लैंडर है. त्रिकोणीय प्रिज्म के आकार के इस उपकरण की मदद से पहले ब्लू होल के पानी और अवसाद नमूनों को जमा किया जाएगा. इन नमूनों के अध्ययन के जरिए वैज्ञानिक इस क्षेत्र के जीवन के बारे में जानकारी हासिल करेंगे और उनका प्लोरीडा की खाड़ी के अन्य इलाका और फ्लोरीडा एक्यूफायर सिस्टम से संबंध के बारे में भी पता लगाएंगे.

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अभी तक हमारे वैज्ञानिक महासागरों के जीवन का एक प्रतिशत ही जान सकें हैं. (प्रतीकात्मक तस्वीर)


नया अध्याय हो सकता है महासागरीय जैवविविधता में
महासागारीय जैवविविधता के बारे में जानकारी में यह ब्लू होल एक और नया अध्याय साबित हो सकते हैं. ये कैसे बने और उनमें जीवन का विकास कैसे हुआ जैसी कई जानकारी बहुत उपयोगी साबित हो सकती हैं

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हाल ही में एक 350 फुट गहरा एक अन्य ब्लूहोल खोजा गया था.  एम्बरजैक नाम के इस ब्लूहोल में दो मरे हुए छोटे दातों वाली सॉफिश भी पाई गई थीं. यह सारासोटा के पश्चिम के तट से 30 मील दूर स्थित  है.
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