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क्या हैं स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशें, जिनकी मांग NDA के सहयोगी भी कर चुके?

पंजाब व हरियाणा के किसानों पर पुलिसिया कार्रवाई का विरोध हो रहा है- सांकेतिक फोटो
पंजाब व हरियाणा के किसानों पर पुलिसिया कार्रवाई का विरोध हो रहा है- सांकेतिक फोटो

देश में हरित क्रांति (green revolution in India) के जनक प्रोफेसर एमएस स्वामीनाथन (M. S. Swaminathan) की अगुवाई वर्ष 2004 में एक आयोग बनाया गया था, जिसने किसानों की स्थिति में सुधार के लिए कई सिफारिशें की थीं. उन्होंने एमएसपी के लिए भी एक खास फार्मूला दिया था.

  • News18Hindi
  • Last Updated: December 2, 2020, 9:04 AM IST
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पंजाब व हरियाणा के किसानों पर पुलिसिया कार्रवाई का विरोध हो रहा है. इस बीच बार-बार स्वामीनाथन आयोग का नाम आ रहा है. कई पार्टियों और संगठनों ने आयोग की सिफारिशों को लागू करने की गुहार लगाई. यहां तक कि खुद एनडीए के घटक दल राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (RLP) ने भी ये मांग रखी. इसके अलावा भी जब कभी किसानों की बात होती है, आयोग का जिक्र आता है.

प्रोफेसर एमएस स्वामीनाथन को देश में हरित क्रांति (Green Revolution) का जनक कहा जाता है. उन्होंने देसी किस्मों को विदेशी नस्ल के अनाजों के साथ संकर कर नई किस्में बनाईं, जो कम समय में बेहतर उत्पादकता देती थीं.

स्वामीनाथन ने देसी किस्मों को विदेशी नस्ल के अनाजों के साथ संकर कर नई किस्में बनाईं - सांकेतिक फोटो (Pixabay)




उन्हीं की कोशिशों से भारत भुखमरी से ऊपर उठकर कई तरह के खाद्यान्नों का निर्यातक देश बन गया. स्वामीनाथन ने खेती के पुराने तरीकों को छोड़कर आधुनिक तकनीक अपनाने की बात की, जिसका इस्तेमाल 60 के दशक के आखिर में देश में कुछ हद तक शुरू हुआ.
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हरित क्रांति के साथ ही स्वामीनाथन ने किसानों के जीवन स्तर को ऊंचा उठाने के लिए भी कई बातें कही थीं. असल में साल 2004 के दौरान किसानों की आर्थिक दशा को सुधारने और अनाज की पैदावार बढ़ाने के लिए केंद्र ने स्वामीनाथन से संपर्क किया. उनकी अध्यक्षता में नेशनल कमीशन ऑन फार्मर्स समिति का गठन हुआ. इसी कमेटी को स्वामीनाथन आयोग के नाम से जाना जाता है.

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कमेटी ने साल 2006 में सौंपी अपनी फाइनल रिपोर्ट में कई सिफारिशें की थीं. बीच-बीच में इन्हें लागू करने की बात होती है लेकिन अब तक कोई भी सरकार इसे पूरे तरीके से लागू नहीं कर सकी है. आयोग की सिफारिशों में एक है जमीन का सही बंटवारा. इसके तहत सरप्लस जमीन को भूमिहीन किसान परिवारों को बांटना मुख्य है.

हरित क्रांति के जनक प्रोफेसर एमएस स्वामीनाथन ने किसानों के लिए कई सिफारिशें दीं


आयोग की सिफारिशों में राज्य स्तरीय किसान कमीशन बनाने, सेहत सुविधाएं बढ़ाने और वित्त-बीमा की स्थिति मजबूत करने की भी बात की गई.

सिफारिश के तहत न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) औसत लागत से 50 फीसदी ज्यादा रखने की बात की गई  ताकि छोटे किसानों को फसल का उचित मुआवजा मिल सके. किसानों की फसल के न्यूनतम सर्मथन मूल्य कुछ ही फसलों तक सीमित न रहें. गुणवत्ता वाले बीज किसानों को कम दामों पर मिलें.

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आयोग की एक काफी बड़ी सिफारिश महिला किसानों के लिए किसान क्रेडिट कार्ड बनवाना थाकिसानों के लिए कृषि जोखिम फंड बनाया जाए, ताकि प्राकृतिक आपदाओं के आने पर उन्हें मदद मिल सके. ये भी काफी अहम बात मानी जा रही है. फिलहाल तक होता ये आया है कि सूखा और बाढ़ में फसल पूरी तरह बर्बाद होने के बाद किसानों के पास कोई खास आर्थिक मदद नहीं पहुंचती है और बीज आदि में पैसे लगा चुका किसान कर्जों में दबकर आत्महत्या जैसा कदम उठाने को मजबूर हो जाता है.

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गांवों में किसानों की मदद के लिए विलेज नॉलेज सेंटर या ज्ञान चौपाल बनाने की बात भी कही गई. इससे  किसान ट्रेडिशनल और तकनीकी दोनों ही तरह का ज्ञान बांट सकेंगे. एक-दूसरे की मदद भी कर सकेंगे. इससे पारंपरिक ढंग से खेती कर रहे किसानों को भी आधुनिकीकरण के लिए प्रेरित किया जा सकेगा.

मिट्टी की जांच व संरक्षण भी सिफारिशों में है. इसके लिए मिट्टी के पोषण से जुड़ी कमियों को सुधारा जाए. मिट्टी की टेस्टिंग वाली लैबों का बड़ा नेटवर्क तैयार करना होगा और सड़क के जरिए जुड़ने के लिए सार्वजनिक निवेश को बढ़ाने पर जोर दिया जाए.
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