क्या है हॉलीडे वेट गेन, और क्यों एक्सपर्ट इसे लेकर चिंता जता रहे हैं?

वजन बढ़ने की अकेली वजह ज्यादा खाना नहीं है- सांकेतिक फोटो (Pixabay)
वजन बढ़ने की अकेली वजह ज्यादा खाना नहीं है- सांकेतिक फोटो (Pixabay)

अक्टूबर से लेकर दिसंबर के तीन महीनों में वजन (weight gain from October until December) पूरे साल की अपेक्षा सबसे ज्यादा बढ़ता है. इसे हॉलीडे वेट गेन (holiday weight gain) कहते हैं, जो घटने में कम से कम पांच महीने लेता है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: November 1, 2020, 3:24 PM IST
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सर्दियों में वजन तेजी से बढ़ता है. इसे हॉलीडे वेट गेन कहते हैं जिसकी वजह सिर्फ आम दिनों से ज्यादा खाना नहीं, बल्कि इसकी कई और वजहें भी हैं. अब एक स्टडी ने भी हॉलीडे वेट गेन पर मुहर लगा दी है. कॉर्नेल यूनिवर्सिटी में हुई इस स्टडी के अनुसार अक्टूबर से वजन बढ़ना शुरू हो जाता है जो दिसंबर तक चलता है. तीन महीने में बढ़े इस वजन को कम करने में लगभग पांच महीने लग जाते हैं.

क्या कहती है स्टडी
कॉर्नेल यूनिवर्सिटी के फूड एंड ब्रांड लैब के साथ फिनलैंड और फ्रांस के वैज्ञानिकों ने मिलकर ये स्टडी की. इसमें अलग-अलग देशों के 3 हजार लोगों को शामिल किया गया. स्टडी में शामिल सारे लोगों की रोज की डाइट देखने के साथ उनका वजन लिया गया. इसमें देखा गया कि अक्टूबर से वजन बढ़ना शुरू हो जाता है जो दिसंबर में क्रिसमस और नए साल के दौरान दोगुनी तेजी से बढ़ता है. जनवरी से वजन कम होना शुरू होता है लेकिन इस अतिरिक्त फैट को घटने में पांच महीने लग जाते हैं.

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इसके रिजल्ट न्यू इंग्लैंड जर्नल ऑफ मेडिसिन में छपे, जिसके अनुसार हर देश के बड़े त्यौहार के दौरान ऐसा होता है लेकिन सर्दियों में लगभग सभी देशों में हॉलीडे वेट गेन होता है. इंटरनेशनल जर्नल ऑफ ओबेसिटी में भी पाया गया कि अक्टूबर से दिसंबर अंत तक कमर का घेरा तेजी से बढ़ता है. ये बताता है कि कम तापमान में शरीर का फैट स्टोरेज बढ़ जाता है.



वजन बढ़ने की एक वजह है सीजनल एफेक्टिव डिसऑर्डर (एसएडी)- सांकेतिक फोटो (Pixabay)


इसलिए बढ़ता है वजन
वजन बढ़ने की अकेली वजह ज्यादा खाना नहीं है. इसकी कई अन्य वजहें भी हैं. इसकी एक वजह है सीजनल एफेक्टिव डिसऑर्डर (एसएडी). ये अवसाद का एक प्रकार है जो सर्दियों से जुड़ा हुआ है. सर्दी में सूरज की रोशनी और धूप कम होने की वजह से ज्यादातर लोगों में कम-ज्यादा प्रतिशत में ये अवसाद दिखता है. सूरज की रोशनी की कमी का हॉर्मोन्स से ताल्लुक है जो हमारे मूड को कंट्रोल करते हैं. इसी अवसाद में हमारी शारीरिक एक्टिविटी कम हो जाती है और वजन बढ़ने लगता है.

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सर्दियों में रात लंबी हो जाती है यानी सोने का वक्त बढ़ जाता है. इसका असर हमारे बॉडी क्लॉक पर पड़ता है, जितना हम सोएंगे, हमारा शरीर उतना ही आलसी होना. यानी 8 घंटे से ज्यादा नींद लेना हमारे बढ़े हुए वजन के रूप में दिखता है.

जरूरी भी है ज्यादा खाना
अब बारी आती है खाने की. ठंड में मेटाबॉलिज्म बढ़ जाता है. इसका बढ़ना यानी शरीर को गर्म रखने के लिए खाने की डिमांड बढ़ना. सर्दी में हम इसी वजह से ज्यादा खाने लगते हैं. त्योहार से भी खाने का संबंध है. एक के बाद एक कई त्योहार जैसे दिवाली, क्रिसमस और फिर नया साल इसी तीन-चार महीने के भीतर आते हैं जिसमें डाइट बढ़ी रहती है. इन सबका मिला-जुला असर हॉलीडे वेट गेन है.

ठंड में मेटाबॉलिज्म बढ़ जाता है. इसका बढ़ना यानी शरीर को गर्म रखने के लिए खाने की डिमांड बढ़ना- सांकेतिक फोटो (Pixabay)


स्टडी के अनुसार तीन महीनों में बढ़ा ये वजन घटाने में पांच महीने लग जाते हैं. हालांकि स्टडी ये भी बताती है कि इसे महीनेभर में ही कम किया जा सकता है. Eat what you love, love what you eat की लेखिका और डायटीशियन मिशेल मे के अनुसार इसके बाद डाइटिंग पर कतई न जाएं क्योंकि इससे कई बीमारियां हो सकती हैं. इसकी बजाए खाने में कैलोरी कम करके प्रोटीन की मात्रा बढ़ाएं.

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कोई भी सफेद चीज न खाएं, जैसे चावल, वाइट ब्रेड, चिप्स, मिठाइयां और नमक. यही चीजें वॉटर वेट यानी अतिरिक्त फैट के रूप में दिखती हैं. इससे बचें. हर दिन व्यायाम करें, बजाए एक दिन या एकाएक बहुत ज्यादा मेहनत करने के. इन कुछ तरीकों से 21 दिनों में बढ़ा हुआ वजन घटकर लगभग आधा रह जाएगा.

ये हैं कुछ और तरीके

  • जब आपके पास हाई-फैट और हाई-कैलोरी का विकल्प हो तो हमेशा हाई-फैट चुनें क्योंकि फैट गलने में कैलोरी से कम वक्त लेता है.

  • चाय पीनी ही हो तो कैफीनयुक्त चाय की बजाए हर्बल चाय पिएं जिसमें अदरक, शहर, मिंट, इलायची, दालचीनी जैसी चीजें हों.

  • केक और आइसक्रीम के बीच कोई एक चीज चुननी हो तो आइसक्रीम ही खाएं क्योंकि इसमें कैल्शियम ज्यादा रहती है, जबकि केक में ऐसा कोई पोषक तत्व नहीं.

  • सर्दी में कभी भी डाइट शुरू न करें क्योंकि इस दौरान तेज मेटाबॉलिज्म के कारण शरीर को गर्म रखने के लिए ज्यादा ऊर्जा की जरूरत पड़ती है.

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