जानिए पिछले 8 साल में क्या हासिल किया Curiosity Rover ने

जानिए पिछले 8 साल में क्या हासिल किया Curiosity Rover ने
क्योरिसीटी रोवर ने हाल ही में मंगल ग्रह पर 8 साल पूरे किए हैं. (फोटो नासा)

नासा के क्यूरियोसिटी रोवर (Curiosity Rover) ने मंगल ग्रह (Mars) पर अपने 8 साल पूरे करते हुए ऐसे अहम प्रमाण एकत्र किए है जिनसे कई खास और पुख्ता जानकारी मिली है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: August 7, 2020, 9:22 PM IST
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हाल ही में नासा (NASA) ने मंगल ग्रह (Mars) के लिए अपना एक और रोवर (Rover) प्रक्षेपित किया है. नासा का एक रोवर पहले से ही वहां सक्रिय हैं और ऐसे में नया रोवर भेजना में नासा का मकसद दूरगामी है. लेकिन ऐसा नहीं है कि पुराना रोवर काम का नहीं रहा. नासा के क्यूरियोसिटी रोवर (Curiosity Rover) ने हाल ही में मंगल ग्रह पर अपने 8 सक्रिय साल पूरे किए हैं और यह अब भी अपनी पूरी क्षमता से काम कर रहा है. इस मौके पर नासा इस रोवर की उपलब्धियों की एक सूची जारी की है.

पूरी क्षमता से काम कर रहा है क्यूरियोसिटी
नवंबर 2011 में प्रक्षेपित किए गया गया यह रोवल मंगल के 154 किलेमीटर चौड़े गाले क्रेटर पर 5 अगस्त 2012 को उतरा था. उसके बाद से ही यह लगातार सुचारू रूप से काम कर रहा है. इससे पहले नासा का ऑपर्च्युनिटि रोवर भी 15 साल तक काम करने के बाद बंद हुआ था. क्यूरियोसिटी रोवर का 8 साल तक काम कर जाना नासा अपने लिए एक बड़ी उपलब्धि के तौर पर ले रहा है.

कभी रहा होगा पानी
इसमें सबसे पहली उपलब्धि इस बात की पुष्टि करना रही कि इस बात के पुख्ता प्रमाण मिले कि मंगल पर कभी लगातार पानी बहा करता था. मंगल पर सबसे ज्यादा उम्मीद और शिद्दत जिस खोज की रही है वह यही कि वहां पानी और ऑक्सीजन की मौजूदगी के बारे में कोई जानकारी मिले. क्यूरियोसिटी ने वहां गोल चिकने छोटे-छोटे पत्थर पाए हैं जिनसे यह पता चलता है कि वहां कभी पानी बहा करता था जिनसे ये पत्थर ऐसा आकार ले सके. ऐसा शायद एक अरब साल पहले या उससे भी पहले रहा होगा.



सतह पर सूक्ष्म जीवन
क्यूरियोसिटी ने दूसरी सबसे अहम जानकारी मंगल पर जीवन की अनुकूलता के संबंध में दी. सबसे क्यूरोसिटी ने ही इस बात की पुष्टि की कि मंगल पर ऐसे हालात है जो वहां की सतह पर सूक्ष्म जीवन का समर्थन कर सकते हैं. इसमें उसे वहां के येलोनाइफ बे से खोदे गए नमूने में  सल्फर, नाइट्रोजन, ऑक्सीजन, फॉस्फोरस और कार्बन की मौजूदगी मिलना प्रमुख है.

पिछले महीने तीन देशों ने मंगल पर अपने अभियान भेजे हैं. (प्रतीकात्मक तस्वीर, Reuters)


जैविक अणुओं की मौजूदगी
सैम्पल ऐनालिसिस एट मार्स यानिक कि सैम (SAM) उपकरण ने मंगल पर जैविक अणुओं (organic Molecules) की कई उन नमूनों में मौजूदगी पाई है जो मंगल के माउंड शार्प और उसके आसपास के मौदानों से जमा किए गए थे.

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मीथेन गैस की मौजूदगी
क्या मंगल पर मीथेन गैस भी है, इस सवाल का सकारात्मक जवाब भी क्यूरियोसिटी रोवर ने ही दिया है.सैम उपकरण में लगा ट्यूनेबल लेसर स्पैक्ट्रोमीटर ने मंगल के वायुमंडल में मीथेन गैस की मौजूदगी के संकेत पाए हैं.

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वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि मंगल की सतह के नीचे जीवन होने की ज्यादा संभावना है. (प्रतीकात्मक तस्वीर)


विकिरण का इंसान के सेहत पर असर
मंगल ग्रह की पृथ्वी की तरह कोई मैग्ननेटिक फील्ड नहीं हैं जिससे वहां पर हानिकारक किरणों के पहुंचने में कोई रुकावट नहीं होती है.  क्यूरियोसिटी ने पाया है कि मंगल पर जो विकिरण पहुंचता है वह हमारे एस्ट्रोनॉट्स की सहन शक्ति के बाहर के स्तर का है.

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पिछले कुछ सालों में सैम ने यह पाया है कि मंगल के वायुमंडल में हाइड्रोडन, कार्बन और ऑर्गोन के भारी आइसोटोप्स की मौजूदगी है. पिछले आठ सालों में क्यूरियोसिटी ने 23 किलोमीटर का सफर मंगल के पथरीले इलाकों में किया है. इसने मंगल ग्रह पर कुल 27 गड्ढे किए हैं. यह रोवर केवल दो साल के लिए भेजा गया था, लेकिन यह अब तक काम कर रहा है.
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