क्यों फटते हैं बादल और लाते हैं भारी तबाही?

उत्तर भारत (North India) में बादल फटने (Cloudburst) से हुई तबाही की खबरों के बीच जानें कि बादल कैसे फटता है और इससे क्यों बड़ी तबाही होती है. बादल फटने की कुछ प्रमुख घटनाओं के बारे में भी जानें.

News18Hindi
Updated: August 19, 2019, 3:17 PM IST
क्यों फटते हैं बादल और लाते हैं भारी तबाही?
हिमाचल में बादल फटने से तबाही की खबर है.
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Updated: August 19, 2019, 3:17 PM IST
हिमाचल (Himachal Pradesh) और उत्तरकाशी (Uttarkashi) में बादल फटने से भारी तबाही की खबरें हैं. पहले भी इन सुर्खियों से वाबस्ता होते रहे हैं, जिसमें बादल फटने के कारण जान-माल का नुकसान होता है. लेकिन, ये बादल फटना आखिर होता क्या है? असल में, बादल फटना बारिश का चरम रूप (Heavy Rainfall) है, जिसमें कम समय में धुंआधार बारिश होती है और कभी कभी गरज के साथ ओले भी पड़ते हैं. आइए विस्तार से जानें कि बादल फटने का मतलब क्या होता है और क्यों इससे इतनी तबाही होती है.

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ऐसे बनती है बाढ़ जैसी स्थिति
सामान्यत: बादल फटने के कारण कुछ मिनट मूसलाधार से भी ज़्यादा तेज़ बारिश होती है. इस दौरान इतना पानी बरसता है कि क्षेत्र में बाढ़ जैसे हालात (Flood) बन जाते हैं. बादल फटने की घटना अमूमन पृथ्वी (Earth) से 15 किलोमीटर की ऊंचाई पर होती है. जब बारिश के दौरान लगभग 100 मिलीमीटर प्रति घंटा की दर से पानी बरसता है, तब कहा जाता है कि बादल फट गया. चंद मिनटों में 2 सेंटीमीटर से ज़्यादा बारिश होती है जिससे प्रभावित क्षेत्र (Flood Affected Area) में भारी तबाही देखी जाती है. वास्तव में, सबसे तेज़ बारिश के लिए यह भाषा का एक शब्द या फ्रेज़ है. वैज्ञानिक तौर पर ऐसा कुछ नहीं होता कि बादल किसी गुब्बारे की तरह फटता हो.

क्या है ​वैज्ञानिक नज़रिया?
मौसम विज्ञान की मानें तो जब बादलों में भारी मात्रा में आर्द्रता होती है और उनकी आसमानी चाल में कोई बाधा आ जाती है, तब अचानक संघनन बहुत तेज़ होता है. इस स्थिति में प्रभावित और सीमित इलाके में कई लाख लीटर पानी एक साथ पृथ्वी पर गिरता है, जिसके कारण उस क्षेत्र में तेज़ बहाव या बाढ़ जैसी स्थिति बन जाती है. पानी के अत्यंत तेज़ बहाव के कारण संरचनाओं और चीज़ों को भारी नुकसान होता है. भारत के लिहाज़ से समझें तो मानसून के मौसम में नमी से भरपूर बादल जब उत्तर की तरफ बढ़ते हैं तो हिमालय पर्वत एक बड़े अवरोधक के रूप में उनके रास्ते में होता है.



गर्म हवा से टकराहट भी है कारण
नमी से भरपूर बादलों के साथ जब कोई गर्म हवा का झोंका टकराता है, तब भी बादल फटने जैसी घटना हो सकती है. मौसम विज्ञान के हवाले से कहा था कि 26 जुलाई 2005 को मुंबई में जो भीषण बारिश हुई थी, उसके पीछे यही कारण था कि बादल किसी ठोस अवरोधक से नहीं, बल्कि गर्म हवा से टकराए थे.

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बादल फटने से उत्तराखंड में तबाही पहले भी होती रही है. फाइल फोटो.


बादल फटने की कुछ बड़ी घटनाएं
2005 में मुंबई की बारिश के अलावा, 18 जुलाई 2009 को पाकिस्तान (Pakistan) के कराची (Karachi) में बादल फटने से भारी तबाही हुई थी. तब सिर्फ दो घंटे में 250 मिमी बारिश दर्ज हुई थी. 6 अगस्त 2010 को जम्मू और कश्मीर (Jammu Kashmir) के लद्दाख क्षेत्र के शहर लेह में सिलसिलेवार ढंग से फटे कई बादलों के कारण लगभग पूरा पुराना लेह शहर तबाह हो गया था. इस घटना में 115 लोगों की मौत हुई थी जबकि 300 से ज़्यादा लोगों के घायल होने की खबरें थीं. आखिरकार, 2013 में 16 और 17 जून को केदारनाथ में बादल फटने से भारी तबाही हुई थी.

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First published: August 18, 2019, 10:20 AM IST
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