जानें क्या है LGBTQIA का मतलब और क्या कहता है रेनबो फ्लैग ?

क्या आप जानते हैं कि LGBT में Q के जुड़ने के बाद अब I और A भी जुड़ गया है. आखिर LGBTQIA का मतलब क्या है?

News18Hindi
Updated: September 7, 2018, 6:21 PM IST
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Updated: September 7, 2018, 6:21 PM IST
सुप्रीम कोर्ट ने आईपीसी की धारा-377 की क़ानूनी वैधता पर फ़ैसला देते हुए कल कहा कि आपसी सहमति से दो समलैंगिकों के बीच बनाए गए संबंध को आपराधिक कृत्य नहीं माना जाएगा. चीफ़ जस्टिस दीपक मिश्रा ने फ़ैसला सुनाते हुए कहा कि समलैंगिकता अपराध नहीं है. समलैंगिको के भी वही मूल अधिकार हैं जो किसी सामान्य नागरिक के हैं. सबको सम्मान से जीने का अधिकार है.

लेकिन क्या आप जानते हैं कि LGBT में Q के जुड़ने के बाद अब I और A भी जुड़ गया है. आखिर LGBTQIA का मतलब क्या है?

L फॉर लेस्बियन
महिला के समान लिंग के प्रति आकर्षण को लेस्बियनिस्म कहा जाता है. लेस्बियन सेक्स में दोनों पार्टनर महिला ही होती हैं.

G फॉर गे
अगर किसी पुरुष का समान लिंग के प्रति आकर्षण हो तो उसे गे कहा जाता है. इसमें दोनों पार्टनर पुरुष ही होते हैं. बहुत बार पूरे समलैंगिक समुदाय को भी ‘गे’ कहकर पुकारा जाता है.

B फॉर बाईसेक्शुअल
जिस पुरुष या महिला का समान और विपरीत लिंग के प्रति आकर्षण होता है उसे बाइसेक्शुअल कहा जाता है. पुरुष और महिला दोनों ‘बाईसेक्शुअल’ हो सकते हैं

T फॉर ट्रांसजेंडर
जब व्यक्ति का शरीर पुरुष का लेकिन महिला जैसा महसूस हो और शरीर महिला का लेकिन पुरुष जैसा महसूस हो तो वह ट्रांसजेंडर की कैटेगरी में आता है. जन्म के समय मिले यौनांग से अलग भाव के कारण भी ऐसा होता है. मर्ज़ी का लिंग चुनने के लिए कुछ लोग लिंग परिवर्तन कराते हैं. लड़कियों वाले हार्मोंस से पुरुषों के स्तन उभर आते हैं. लड़कियां भी चिकित्सा का सहारा लेकर पुरुष बनती हैं.



Q फॉर ‘क्वीयर’
क्वीयर वो हैं जो खुद को LGBT से परे देखते हैं. ‘क्वीयर’ के ‘Q’ को ‘क्वेश्चनिंग’ भी कहा जाता है क्योंकि वो जो अपनी शारीरिक चाहत अभी भी तय नहीं कर पाए हैं.

I फॉर इंटरसेक्स
जो शारीरिक यौनांग से न पुरुष है न महिला वह इंटेरसेक्शुअल है.

A फॉर एसेक्शुअल
जिसे पुरुष और महिला दोनों के साथ सेक्स में रूचि नहीं है वह एसेक्शुअल होता है.

A फॉर ऐलाए
ऐलाए उन लोगों के लिए इस्तेमाल होता है जो LGBTQIA का हिस्सा नहीं है लेकिन उनके अधिकारों का समर्थन करता है.

समलैंगिक झंडे के अलग-अलग  रंगों का क्या अर्थ है ?
मूल रूप से आठ रंगों वाला हाथ से सिला- गुलाबी, लाल, नारंगी, पीला, हरा, फ़िरोज़ा, नीला, और बैंगनी - इंद्रधनुष ध्वज समलैंगिक व्यवहार के लिए एक साधारण प्रतिक्रिया से कहीं अधिक हो गया. यह एलजीबीटी गर्व के लिए एक सार्वभौमिक प्रतीक बन दुनिया भर में फैल गया. चूंकि ध्वज की लोकप्रियता बढ़ी, इसकी डिजाइन मांग को पूरा करने के लिए अनुकूलित की गई थी, और 1979 तक, छह रंग का संस्करण समलैंगिक गौरव के लिए आधिकारिक प्रतीक बन गया.

लाल का अर्थ है जीवन.
नारंगी का अर्थ है उपचार.
पीले का अर्थ है सूरज की रोशनी.
हरे का अर्थ है प्रकृति
नीला का अर्थ है शांति.
बैंगनी का अर्थ आत्मा.

LGBT कम्युनिटी पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला न्याय के लिए संघर्षरत लोगों के लिए उम्मीद की किरण : एमनेस्टी
(सांकेतिक तस्वीर)


समलैंगिकता के अलग अलग पहलु क्या हैं ?

भावनाएं - ये तय करता है कि सामने वाले व्यक्ति, चाहे जो भी उसका जेंडर हो, उसके लिए आपकी भावनाएं कैसी हैं. क्या आपको पूरी तरह मालूम है कि आप उसकी और आकर्षित हैं. या आप कन्फ्यूज़्ड हैं? या आपको यह भी तय नहीं है कि आप होमोसेक्शुअल हैं या बाईसेक्शुअल? आपका जेंडर बहुत बात भावनाएं तय करती हैं कि आप किसी के लिए कैसा महसूस करते हैं.

व्यवहार -  हो सकता है कि बच्चे कम उम्र में समलैंगिक यौन संबंधों के साथ प्रयोग करें लेकिन जीवन में बाद में समलैंगिक संबंध कभी नहीं बनाएं क्योकि उसे वो व्यवहार नहीं पसंद आए. ऐसे कई लोग हैं जिन्होंने कभी अपने समलैंगिक आकर्षण पर काम नहीं किया यानि उनका व्यवहार कभी समलैंगिक नहीं रहा.

पहचान - हमपर पहचान की संस्कृति बेहद हावी रहती है. हर एक लेबल और श्रेणी के साथ पहचान का एक अलग स्तर आता है. लेकिन यह पहचान कर पहचान का स्तर कहीं भी यह यौन पहचान के दायरे में एक नहीं हो पता. कोई समलैंगिक समुदाय को एक नज़र से देख सकता है   या एलजीबीटीक्यूआई की नजर से.

जीवन जीने का तरीका - होमोसेक्सुअल होना या न होना ज़रूरी नहीं है. ज़रूरी ये है कि उसके साथ के लोगों से व्यवहार और तौरतरीका कैसा है.

किन देशों में समलैंगिकता को स्वीकार कर लिया गया है

भारत,बेल्जियम, कनाडा, स्पेन, दक्षिणअफ्रीका, नॉर्वे, स्वीडन, आइसलैंड, पुर्तगाल, अर्जेंटीना, डेनमार्क, उरुग्वे, न्यूजीलैंड, फ्रांस, ब्राजील, इंग्लैंड, स्कॉटलैंड, लग्जमबर्ग, फिनलैंड, आयरलैंड, ग्रीनलैंड, कोलंबिया, जर्मनी, माल्टा भी समलैंगिक शादियों को मान्यता दे चुके हैं.  दुनिया के 26 देश ऐसे हैं जो समलैंगिकता को कानूनन सही करार चुके हैं. पिछले साल ही ऑस्ट्रेलिया की संसद ने भारी बहुमत से इसे मान्यता दी थी. ऑस्ट्रेलिया के 150 सदस्यों के संसद में सिर्फ 4 सदस्यों ने समलैंगिक शादियों के खिलाफ वोट किया था.
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