क्या होते हैं एक्जिट पोल..अब पता लगेगा कि कितने सही निकले ये

अब जबकि पांच राज्यों में वोटों की गिनती का काम जारी है तो पता लगेगा कि एक्जिट पोल के दावे कितने सही रहे

Sanjay Srivastava | News18Hindi
Updated: December 11, 2018, 9:21 AM IST
क्या होते हैं एक्जिट पोल..अब पता लगेगा कि कितने सही निकले ये
सांकेतिक तस्वीर
Sanjay Srivastava | News18Hindi
Updated: December 11, 2018, 9:21 AM IST
पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों में वोट डाले जाने के बाद 07 दिसंबर की शाम एक्जिट पोल के जरिए जमकर ये दावा किया गया कि कौन सा सियासी दल कहां जीत रहा है और कौन कहां पीछे होगा. अब जबकि वोटिंग काउंटिंग का काम जारी है तो ये देखना होगा कि एक्जिट पोल के परिणाम कितने खरे उतरे. हर एक्जिट पोल के नतीजे ने काउंटिंग से पहले अलग तरह से आंकलन किया था.

राजस्थान को लेकर सभी चुनावी सर्वे एकमत हैं कि वहां कांग्रेस को फायदा हो सकता है कि मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और तेलंगाना को लेकर असमंजस की स्थिति है. कोई भी सर्वे एजेंसी इसका सही सही आकलन पेश करती नहीं लग रही.  पांचों राज्यों के असली चुनावी नतीजे तो 11 दिसंबर को सामने आएंगे, तभी ये पता लगेगा कि एक्जिट पोल में जो दावे किए गए, वो कितने खरे उतरे हैं.

ऐसे में ये सवाल उठना स्वाभाविक है कि ये एग्जिट पोल्स क्या होते हैं और चुनाव परिणामों को लेकर वो जो अनुमान लगाते हैं, वो कितने सटीक होते हैं.

1. एग्जिट पोल्स क्या होते हैं और वो कैसे किए जाते हैं?

- एग्जिट पोल्स वोट करके पोलिंग बूथ के बाहर आए लोगों से बातचीत या उनके रुझानों पर आधारित हैं. इनके जरिए अनुमान लगाया जाता है कि नतीजों का झुकाव किस ओर है. इसमें बड़े पैमाने पर वोटरों से बात की जाती है. इसे कंडक्ट करने का काम आजकल कई ऑर्गनाइजेशन कर रहे हैं.

2. एग्जिट पोल्स को टेलिकास्ट करने की अनुमति वोटिंग खत्म होने के बाद ही क्यों दी जाती है. इससे पहले क्यों नहीं?
- जनप्रतिनिधित्व कानून 1951 की धारा 126 ए के तहत वोटिंग के दौरान ऐसी कोई चीज नहीं होनी चाहिए जो वोटरों के मनोविज्ञान पर असर डाले या उनके वोट देने के फैसले को प्रभावित करे. वोटिंग खत्म होने के डेढ़ घंटे तक एग्जिट पोल्स का प्रसारण नहीं किया जा सकता है. और ये तभी हो सकता है जब सारे चुनावों की अंतिम दौर की वोटिंग भी खत्म हो चुकी हो.
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मतदान करने के बाद महिलाएं (फाइल फोटो)


3. क्या एग्जिट पोल्स हमेशा सही होते हैं?
- नहीं, ऐसा बिल्कुल नहीं है. अतीत में ये साबित हुआ है कि एग्जिट पोल्स ने जो अनुमान लगाए, वो गलत साबित हुए. भारत में एग्जिट पोल का इतिहास बहुत सटीक नहीं रहा है. कई बार एग्जिट पोल नतीजों के बिल्कुल विपरीत रहे हैं.



4. ओपिनियन पोल्स और एग्जिट पोल्स के बीच अंतर क्या है?
- ओपनियन पोल्स वोटिंग से बहुत पहले वोटरों के व्यवहार और वो क्या कर सकते हैं, ये जानने के लिए होता है. इससे ये बताया जाता है कि इस बार वोटर किस ओर जाने का मन बना रहा है. वहीं एग्जिट पोल्स हमेशा वोटिंग के बाद होता है.

5. ये कब शुरू हुए?
माना जाता है कि ये 1967 में सामने आए. एक डच समाजशास्त्री और पूर्व राजनीतिज्ञ मार्सेल वान डेन ने देश में चुनाव के दौरान एग्जिट पोल्स किया. हालांकि ये भी कहा जाता है कि इसी साल अमेरिका में ऐसा पहली बार एक राज्य के चुनावों के दौरान किया गया था. वैसे एग्जिट पोल्स जैसे अनुमान की बातों का 1940 में होना कहा जाता है.

6. इनका विरोध क्यों हो रहा है?
- क्योंकि आमतौर पर ये न तो बहुत वैज्ञानिक होते हैं और न ही बहुत ज्यादा लोगों से बातकर उसके आधार पर तैयार किए जाते हैं. इसीलिए अमूमन ये हकीकत से अक्सर दूर होते हैं. कई देशों में इन पर रोक लगाने की मांग होती रही है. भारत में वर्ष 2014 के लोकसभा चुनावों में चुनाव आयोग ने इस पर रोक लगा दी थी. दुनियाभर में अब ज्यादातर लोग इन्हें विश्वसनीय नहीं मानते.

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