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रक्तदान के बाद कहां जाता है ब्लड और किस प्रक्रिया से होती है इसकी जांच

सांकेतिक तस्वीर

सांकेतिक तस्वीर

जानिए ब्लड डोनेट करने के बाद उसका क्या होता है...कितने दिनों तक इन्हें संभालकर रखा जाता है

    कभी सोचा है रक्त दान यानी ब्लड डोनेट करने के बाद उसका क्या होता है. शुरुआत करते हैं ब्लड डोनेशन के लिए जाने से. रक्तदान करने की जगह पर पहुंचने और वहां से निकलने में तकरीबन एक घंटा लग जाता है. पर ब्लड देने का प्रोसेस सिर्फ 8-10 मिनट का होता है.

    एक बार के ब्लड डोनेशन में 470 मिलीलीटर खून लिया जाता है. डोनेट करने के लिए अपने आस-पास के बल्ड बैंक को लोकेटर की मदद से  AABB’s blood bank पर सर्च कर सकते हैं. इसके लिए रिक्वायरमेंट्स कुछ इस तरह हैं-

    1-ब्लड देने वाले के शरीर में कम से कम 110 पाउंड्स खून, उम्र 16 साल हो.
    2-पहली बार बल्ड देने वाले को दो आइडेंटिटी प्रूफ देने होंगे.
    3-हेल्थ से जुड़ी कोई परेशानी हो या देश से बाहर यात्रा की हो तो ब्लड बैंक में अपॉइंटमेंट लेने से पहले बताएं.
    4-पहले भी ब्लड डोनेट कर चुके हैं तो डोनर कार्ड भी मांगा जा सकता है.
    5-डोनेशन से पहले ब्लड-बैंक की तरफ डोनर की हेल्थ, लाइफस्टाइल, बीमारी वगैरह के बारे में पूछा जाएगा.
    6-उसके बाद पल्स, टेंपरेचर और ब्लड प्रेशर चेक होगा.
    7-फिर उंगली से एक बूंद ब्लड लेकर चेक किया जाएगा कि आपका ब्लड आयरन डोनेट करने के लिए पूरा है या नहीं.

    ब्लड डोनेशन
    प्री-डोनेशन फॉर्मेलिटी के बाद बेड पर लिटाकर, बाज़ू एंटीसेप्टिक से साफ किया जाएगा.
    इसके बाद ब्लड डोनेट करते हुए, एक यूनिट ब्लड लिया जाएगा. जिसमें 8 से 10 मिनट लगेंगे.

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    प्लेटेलेट्स डोनेशन
    अगर प्लेटेलेट्स डोनेट कर रहे हों तो इसमें apheresis मशीन लगाई जाएगी. ये मशीन दोनों बाज़ुओं में लगती है. इस मशीन से बहुत कम ब्लड लिया जाता है. फिर उससे प्लेटलेट्स निकालकर बाकी ब्लड दूसरे बाज़ू के ज़रिए वापस चढ़ा दिया जाता है. ये प्रोसेस दो घंटे के अंतराल के बाद फिर से भी दोहराया जा सकता है.

    डोनेशन के बाद
    ब्लड डोनेशन के तुरंत बाद हर डोनर को रिफ्रेशमेंट को तौर पर जूस या चाय-बिस्किट वगैरह मिलता है.
    अगले 24 घंटे तक डोनर को फिजिकल एक्सरसाइज या वजन न उठाने की सलाह दी जाती है.

     blood donation journey को समझने के लिए वीडियो देखें-
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    डोनेशन के बाद खून का क्या होता है
    स्टेप 1
    प्रोसेसिंग के लिए देने से पहले ब्लड को लैब में टेस्ट ट्यूब्स में भरकर ठंडी जगह पर रखा जाता है. डोनेट किए ब्लड को ब्लड सेंटर ले जाया जाता है. हॉस्पिटल को देने से पहले एक लंबे प्रोसेस के ज़रिए टेस्ट किया जाता है.

    स्टेप 2
    प्रोसेसिंग सेंटर में डोनेशन की सारी जानकारी कम्प्यूटर्स में स्कैन कर रखी जाती है. ब्लड क्लिनिंग प्रोसेस की शुरुआत में ब्लड को साथ में घुमाया (centrifuges) जाता है, जिसके बाद उसकी तीन लेयर बनती हैं. जिन्हें रेड सेल्स, प्लेटलेट्स और प्लाज़मा में बांटा जाता है. तीनों हिस्सों में बंटे ब्लड को एक-एक अलग अलग यूनिट की तरह रखा जाता है.  ये वैसी ही यूनिट होती है, जिसे डॉक्टर्स पेशेंट को चढ़ाने के लिए इस्तेमाल करते हैं.

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    स्टेप 3
    ब्लड यूनिट आने के बाद उसके टेस्ट्स किए जाते हैं. जिसमें ब्लड टाइप/ग्रुप से लेकर डिज़ीज़ इंफेक्शन चेक किए जाते हैं. टेस्ट रिजल्ट आने में 24 घंटे लगते हैं. रिजल्ट ब्लड सेंटर को डीटेल में इन्फॉर्म किए जाते हैं.

    स्टेप 4
    टेस्ट रिजल्ट के बाद, ब्लड चढ़ाने के मुताबिक लेबल लगाकर स्टोर कर दिया जाता है. रेड सेल्स को रेफ्रिजिरेटर्स में 6ºC पर 42 दिनों के लिए रखा जाता है. प्लेटलेट्स एगिटेटर्स में रूम टेंपरेचर पर पांच दिनों के लिए रखी जाती हैं. प्लाज़ाम फ्रीजर्स में एक साल के लिए भी रखे जा सकते हैं.

    स्टेप 5
    हॉस्पिटल की तरफ से की गई मांग के मुताबकि, ब्लड सप्लाई हफ्ते के सातों दिन, चौबीसों घंटे होती है. हॉस्पिटल्स खुद भी कुछ यूनिट ब्लड रखते हैं.

    स्टेप्स 6 (ट्रैन्स्फ्यूश़न- ब्लड चढ़ाया जाना)
    यदि पेशेंट को खून चढ़ाने की जरूरत होती है तो सबसे पहले उसका ब्लड ग्रुप/टाइप पता किया जाता है. यदि पेशेंट को आयरन या एनिमिया डेफीशिएंसी हो तो रेड ब्लड सेल्स चढ़ाए जाते हैं. जिससे मरीज के शरीर में हीमोग्लोबीन और आयरन लेवल बढ़ता है. उससे शरीर में ऑक्सीजन की मात्रा में इजाफा होता है.
    प्लेटलेट्स की ज़रूरत हो तो वही चढ़ाई जाती हैं.
    प्लाज़मा ट्रैन्स्फ्यूश़न कम परिस्थितियों में किया जाता है, जिसमें लीवर फेलियर, गंभीर इन्फेक्शन या सीरियस बर्न शामिल है.

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    Tags: Eat healthy, Health Explainer, Health News, Healthy Diet, World Blood Donor Day

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