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फांसी के बाद क्या होता है उस रस्सी का, जिससे दी जाती है मौत की सजा

News18Hindi
Updated: December 11, 2019, 4:57 PM IST
फांसी के बाद क्या होता है उस रस्सी का, जिससे दी जाती है मौत की सजा
ब्रिटेन में फांसी के बाद फंदा जल्लाद को दे दिया जाता था

ब्रिटेन में जब तक फांसी जारी रही, तब तक वहां के जल्लादों के बारे में ये बात कही जाती थी कि वो फांसी की रस्सी के छोटे टुकड़े करके उसे बेच देते थे, उसे लोग खुशी खुशी खरीदते थे. कोलकाता में जल्लाद नाटा मल्लिक ने ऐसा ही करके पैसा कमाया.

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  • Last Updated: December 11, 2019, 4:57 PM IST
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वर्ष 2012 में निर्भया गैंगरेप और मर्डर के बाद अब उसके चारों गुनहगारों को फांसी की सजा का दिन नजदीक आ गया है. खबरें आ रही हैं कि इसके लिए ट्रायल शुरू हो चुका है. फांसी की रस्सियां आ चुकी हैं लेकिन क्या आपको मालूम है कि फांसी के बाद क्या होता है उस रस्सी का, जिससे फंदा बनाकर सजायाफ्ता शख्स को उससे लटकाया जाता है.

इस रस्सी को लेकर कई तरह के अंधविश्वास प्रचलित हैं. दरअसल ब्रिटेन में जब फांसी दी जाती थी तो इस रस्सी को जल्लाद को दे दिया जाता था. ना जाने कैसे ये बात ब्रिटेन में प्रचलित हो गई कि अगर कोई इस रस्सा का टुकड़ा घर पर रख ले या उसका लॉकेट पहन ले तो उसकी किस्मत बदल सकती है.

इतिहास में ये उल्लेख मिलता है कि ब्रिटेन में जल्लाद इन रस्सी के टुकड़े करके उसे बेच देते थे और लोग खुशी खुशी उन्हें खरीदते थे. हालांकि 1965 में ब्रिटेन में फांसी पर रोक लगा दी गई.

कारागार के स्टाफ में बांट दी जाती थी

आमतौर पर भारत में ये रस्सी जल्लाद को ही दे दी जाती है या जल्लाद इसे ले जाता है. कई देशों में इस रस्सी को कई छोटे टुकड़ों में काटकर कारागार के डेथ स्क्वॉड को दे दिया जाता है, जिसमें बड़े अधिकारियों से लेकर निचले स्तर तक के गार्ड तक शामिल रहते हैं.

कई जेलों में फांसी की रस्सी काटकर पूरे जेल स्टाफ में बांट दी जाती है


भारत में इस रस्सी को लेकर और कहीं बेशक अब तक अंधविश्वास नहीं सुना गया लेकिन वर्ष 2004 में जब नाटा मल्लिक जल्लाद ने रेप और मर्डर के दोषी धनंजय चटर्जी को फांसी पर लटकाया था तो उसने इस रस्सी के टुकड़ों से बहुत कमाई की थी.मल्लिक फांसी की रस्सी से लॉकेट बेचने लगा
दरअसल बंगाल में ना जाने कैसे ये अंधविश्वास फैल गया कि फांसी की रस्सी का लॉकेट पहनने से किस्मत पलट जाती है. अगर आपके पास नौकरी नहीं है तो रोजगार मिल जाता है. अगर कर्ज में दबे हैं तो इससे छुटकारा मिल जाएगा. बेहतर दिन शुरू हो जाएंगे. व्यापार में घाटा हो रहा है तो किस्मत बदल जाती है.

जब ये आप कोलकाता में फैलने लगी तो नाटा मल्लिक के घर के आगे लॉकेट की रस्सी लेने वालों की भीड़ लगने लगी.

कोलकाता के नाटा मल्लिक ने जब वर्ष 2004 में धनंजय को फांसी दी तो उसने फांसी के फंदे की रस्सी को छोटे टुकड़ों में काटकर बेचा


कोलकाता के डेथ पेनल्टी एसोसिएशन ने इसे अंधविश्वास तो कहा ही. साथ ही ये भी कहा कि जल्लाद को ऐसा करने का कोई अधिकार नहीं है. कोलकाता के मंदिरों में भी इसका बहुत विरोध हुआ.

वो फांसी देने के बाद रस्सी साथ ले आता था
इसके बाद भी नाटा मल्लिक ने जमकर ऐसी रस्सियां बेचीं. एक लॉकेट की रस्सी उसने करीब 2000 रुपये तक बेची. उसके पास पुरानी फांसी दी गईं रस्सियां भी थीं. इसकी लॉकेट वो 500 रुपये में बेचता था. मल्लिक ने अपने घर के बाहर एक तौलिए को फांसी की गांठ की शक्ल में टांग रखा था.

इस रस्सी को कई बार जला भी दिया जाता है. कई बार जब बहुत विवादित कैदी या बड़े आतंकवादी को फांसी दी जाती है तो उसकी रस्सी को भी तुरंत नष्ट कर दिया जाता है.

 

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First published: December 11, 2019, 4:43 PM IST
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