Explained: क्या होता है उस देश का, जो दिवालिया हो जाए?

आर्थिक मोर्चे पर संकट में पड़ा पाकिस्तान पूरी तरह से कंगाल हो चुका है- सांकेतिक फोटो (pixabay)

आर्थिक मोर्चे पर संकट में पड़ा पाकिस्तान पूरी तरह से कंगाल हो चुका है- सांकेतिक फोटो (pixabay)

गंभीर आर्थिक संकट से जूझता पाकिस्तान अब दिवालिया होने की कगार पर (Pakistan on edge of bankruptcy) है. लेकिन उसके बाद इस देश का क्या होगा?

  • News18Hindi
  • Last Updated: February 3, 2021, 6:47 AM IST
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कोरोना संक्रमण ने वैसे तो लगभग सभी देशों की अर्थव्यवस्था पर असर डाला लेकिन पाकिस्तान की हालत खुलकर सामने आ गई. पहले से ही आर्थिक मोर्चे पर संकट में पड़ा ये देश पूरी तरह से कंगाल हो चुका है. यहां तक कि मुस्लिम राष्ट्र होने के नाते पाक को लगातार मदद दे रहे अमीर देश जैसे सऊदी अरब और यूएई भी इससे अपना बकाया साफ करने को कह चुके हैं.

कैसे हैं पाकिस्तान के हालात

हालात ऐसे हैं कि कई देशों के कर्ज वापसी की मांग पर पाकिस्तान ने नए सिरे से कर्ज लेकर अपना ऋण उतारा. इधर दुनियाभर के देशों में कर्ज देकर घुसपैठ करने के लिए कुख्यात चीन तक पाकिस्तान में खरबों डॉलर निवेश कर चुका. इंफ्रास्ट्रक्टचर के नाम पर ये निवेश चीन ने अपने व्यापारिक फायदे के लिए किया था लेकिन पाकिस्तान में बलूच तनाव के कारण इंफ्रा का काम भी ठप पड़ा है. ऐसे में निकट भविष्य में चीन भी पाकिस्तान में बड़ा निवेश करेगा या फिर कर्ज देगा, ऐसी कोई संभावना नहीं दिख रही.

imran khan
कई देशों के कर्ज वापसी की मांग पर पाकिस्तान ने नए सिरे से कर्ज लेकर अपना ऋण उतारा

सभी देश कभी न कभी कर्ज से परेशान रहे

पाकिस्तान अकेला नहीं, कई बार कई देश दिवालिया हो चुके हैं. बल्कि इकनॉमिस्ट की मानें तो लगभग सारे ही देश एक बार इस कगार पर पहुंच चुके हैं कि वे कर्ज में सिर से पैर तक डूब चुके हों. तो आखिर ऐसे देशों का क्या होता है? इस बात को समझने के लिए एक बार ग्रीस के बारे में जानते हैं.

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ग्रीस का नाम बार-बार आता है

माना जाता है कि 377 ईसा पूर्व भी ग्रीस कर्ज में डूब गया था. उस समय के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं लेकिन हाल में ही ग्रीस दोबारा दिवालिया हुआ. ये साल 2015 की बात है. अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष को 12 हजार करोड़ रुपए न चुका पाने के कारण ग्रीस को दिवालिया घोषित कर दिया गया. बाद में हालात सुधर गए. पर्यटन ने इसमें बड़ी राहत दी. हालांकि अब भी ग्रीस पर निवेशक ज्यादा पैसे लगाने से डरते हैं.

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ओलंपिक में उड़ाए पैसे

साल 2004 में ओलंपिक के दौरान आयोजन सफल बनाने पर भी ग्रीस ने बेतहाशा पैसे उड़ाए और लगातार कर्ज लेता गया. बता दें कि खेलों की तैयारियों से लेकर समापन तक में केवल 7 सालों के भीतर ग्रीस ने 12 अरब डॉलर से भी ज्यादा पैसे खर्च किए थे. राजकोष में कमी आने पर भी डरे हुए ग्रीस ने यूरोपियन यूनियन से सच छिपाया और हालत दिवालिया होने तक चली गई थी.

ग्रीस के दिवालिया के पीछे उसका लगातार कर्ज लेना रहा- सांकेतिक फोटो (pixabay)

देशों और कंपनियों के साथ अलग व्यवहार

इतने बड़े घाटे के बाद भी ग्रीस को दुनिया के सभी देशों ने निकालकर फेंक नहीं दिया. और न ही वहां की सरकार को जेल में डाल दिया. लेकिन कंपनी या किसी शख्स के साथ ऐसा नहीं होता. उनके मामले में होता ये है कि कर्जदाता उनकी कीमती संपत्ति को अपने नाम कर लेते हैं. वहीं देश के दिवालिया होने पर देश के भीतर की संपत्ति पर तो कर्जदाता अपना दावा नहीं कर पाते लेकिन विदेश में अगर कोई संपत्ति हो, तो उसपर जरूर अपना दावा कर सकते हैं.

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पाकिस्तान की फॉरेन प्रॉपर्टी पर तलवार

पाकिस्तान की बात करें तो हाल ही में एक खनन मामले में एक अदालत ने पाकिस्तान पर बड़ा जुर्माना लगाया. अब खस्ताहाल पाकिस्तान जुर्माने की रकम तो शायद ही भर सके, ऐसे में हो सकता है कि विदेशी कंपनियां पाकिस्तान की विदेश में बनी प्रॉपर्टी पर कब्जा कर लें. जैसे पाकिस्तान के पास अमेरिका के न्‍यूयॉर्क शहर में रूजवेल्‍ट होटल है. ये होटल बेहद आलीशान है. कुल 1015 कमरों वाले इस होटल की साल 2015 में अनुमानित कीमत 636 मिलियन डॉलर मानी गई थी.

अमेरिका के अलावा पेरिस में भी पाकिस्तान का एक होटल है. स्क्राइब नाम से ये होटल भी काफी शानदार है. इन दोनों होटलों की नीलामी को रोकने के लिए इमरान सरकार को काफी जोर लगाना होगा या फिर अदालत की तय की हुई जुर्माना राशि देनी होगी.

दिवालिया होने पर देश के साथ नुकसान ये होता है कि बाजार में उसकी साख खत्म हो जाती है- सांकेतिक फोटो (pixabay)

क्रेडिट खत्म हो जाता है

दिवालिया होने पर देश के साथ सबसे बड़ा नुकसान ये होता है कि बाजार में उसकी साख खत्म हो जाती है. उसके देश में विकास के नाम पर कोई भी देश पैसे लगाने से डरता है. यहां तक कि इंटरनेशनल बैंक भी उधार देने से पहले कई तरह की छानबीन करते हैं. पैसे लौटाने की मियाद भी घटा दी जाती है क्योंकि डर रहता है कि एक बार कंगाली में पहुंच चुका देश कहीं फिर पैसे खत्म न कर दे.

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कई बार दिवालिया घोषित करने के अलावा चारा नहीं 

खुद को दिवालिया घोषित करना किसी खास हालात में फायदेमंद भी हो सकता है, जैसा अर्जेंटिना के मामले में हुआ था. नब्बे के दशक में ये देश बुरी तरह से आर्थिक संकट में फंसा था. कर्ज लौटाने की तमाम कोशिशें भी हुईं लेकिन काफी भारी रकम के कारण ऐसा नहीं हो सका. तब अर्जेंटिना ने खुद को दिवालिया घोषित कर दिया. ये उसकी प्रतिष्ठा पर बड़ी चोट थी. इसके बाद लगभग दशकभर अर्जेंटिना में फॉरेन इनवेस्टर रकम लगाने से डरते थे. लेकिन कर्ज माफी का उस देश के पास इसके अलावा कोई जरिया भी नहीं था. इस बात का जिक्र अमेरिकी लेखक पॉल ब्लूस्टिन ने अपनी किताब And the Money Kept Rolling In में किया है.

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