क्या होता है जब किसी राज्य में राष्ट्रपति शासन लग जाता है?

भारत के राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद.

भारत के राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद.

महामारी (Pandemic) के चलते राष्ट्रपति शासन लगाए जाने की संभावना पर क्या असर पड़ सकता है? कितने समय के लिए राष्ट्रपति शासन किसी राज्य में लगाया जा सकता है? ये भी जानें कि पुडुचेरी में क्यों ऐसे हालात (Puducherry Political Crisis) बन गए हैं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: February 25, 2021, 12:48 PM IST
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पुडुचेरी में तीन महीने बाद ही विधानसभा चुनाव (Puducherry Assembly Elections 2021) होने थे, लेकिन उससे पहले ही कांग्रेस सरकार (Congress Govt) गिर जाने के कारण ऐसी स्थिति बन गई कि राष्ट्रपति शासन लगने की नौबत आ गई है. केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर (Prakash Javdekar) के बयान के मुताबिक पुडुचेरी के मुख्यमंत्री ने इस्तीफा दिया और किसी पार्टी ने नई सरकार बनाने के लिए कोई दावा ही नहीं किया. इस स्थिति में केंद्रशासित प्रदेश (Union Territory) के लेफ्टिनेंट गवर्नर की सिफारिश पर केंद्र सरकार (Central Govt) ने राष्ट्रपति के पास प्रस्ताव भेज दिया है कि विधानसभा भंग कर दी जाए. राष्ट्रपति के आदेश के बाद राष्ट्रपति शासन लग जाएगा.

अस्ल में, इस्तीफा देने वाले पुडुचेरी सीएम वी नारायणसामी ने भाजपा समेत विपक्षी पार्टियों पर आरोप लगाया कि उन्होंने सत्तारूढ़ गठबंधन के विधायक तोड़े, जिससे सरकार गिरने की नौबत आई. 26 सदस्यों वाली विधानसभा में कांग्रेस व डीएमके के छह विधायकों के इस्तीफे के बाद गठबंधन के पास बहुमत नहीं रहा. अब जानने की बात यह है कि राष्ट्रपति शासन अगर किसी राज्य में लग जाता है तो इसका मतलब और नतीजा क्या होता है.

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कब लगता है राष्ट्रपति शासन?
सबसे पहले तो यही जानना चाहिए कि किन स्थितियों में राष्ट्रपति शासन लगाया जा सकता है. खास ​पॉइंट्स में जानिए खास बातें :

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पुडुचेरी के सीएम नारायणसामी ने इस्तीफा दिया.


* राज्य के राज्यपाल ने जो समय तय किया हो, उसके भीतर अगर राज्य की विधानसभा मुख्यमंत्री के तौर पर किसी नेता को न चुन पाए.
* राज्य की सत्ता में यदि गठबंधन सरकार है और विधानसभा में अगर यह गठबंधन अपना बहुमत खो दे, या फिर गर्वनर द्वारा दिए गए समय के भीतर सीएम सदन में बहुमत साबित न कर सकें.
* बहुमत न होने की स्थिति में अविश्वास प्रस्ताव पारित हो जाने के बाद अगर प्राकृतिक आपदा, महामारी या युद्ध जैसे कारणों के चलते अगर चुनाव करवाना संभव न हो, तो राष्ट्रपति शासन लग सकता है.

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राष्ट्रपति शासन लग जाए तो क्या होता है?
* देश के राष्ट्रपति की ओर से राज्यपाल के हाथों में राज्य की कमान आ जाती है. राज्य के मुख्य सचिव और अन्य सलाहकारों या प्रशासकों की मदद से राज्यपाल ही राज्य का प्रशासन आदि संभालता है.
* राष्ट्रपति के पास यह शक्ति भी है कि वो ऐलान करे कि राज्य की विधानसभा की शक्तियां राष्ट्रपति शासन के दौरान संसद के पास जा सकें. यानी राज्य के लिए कानूनी और नीतिगत फैसले संसद में होते हैं.
* राष्ट्रपति या तो विधानसभा को भंग कर सकते हैं या फिर सस्पेंड. अब अगर यह स्थिति भी बने कि संसद का सत्र न चल रहा हो तो ऐसे राज्य के लिए कोई कानून या नीति राष्ट्रपति ही लागू कर सकते हैं.

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जनप्रतिनिधियों के पास क्या विकल्प होते हैं?
सत्तारूढ़ गठबंधन के टूटने या फिर विधानसभा के त्रिशंकु हो जाने के हालात में ऐसा नहीं है कि राज्य की सियासी पार्टियों के रास्ते बंद हो जाएं. राष्ट्रपति शासन के दौरान किसी भी समय कोई भी राजनीतिक पार्टी गवर्नर के पास जाकर सदन में अपना बहुमत साबित करने का प्रस्ताव दे सकती है और बहुमत के आधार पर सरकार बना सकती है. दूसरी तरफ, राष्ट्रपति शासन वाले राज्य में चुनाव आयोग नए सिरे से चुनाव करवा सकता है.

क्या राष्ट्रपति शासन से लोगों पर असर पड़ता है?
रोज़मर्रा के जीवन पर असर नहीं पड़ता. लेकिन राष्ट्रपति शासन लग जाने पर राज्य में नई नीतियां और नए कानून नहीं बनते. सरल शब्दों में बड़े फैसले नहीं हो पाते लेकिन प्रशासन चलता रहता है. इस दौरान राज्य में कोई प्रोजेक्ट भी पास होने की संभावना भी न के बराबर ही रहती है.

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पुडुचेरी भारत के नक्शे पर.


कितने वक्त का होता है राष्ट्रपति शासन?
संविधान के आर्टिकल 356 के मुताबिक राष्ट्रपति शासन की मीयाद 6 महीने हो सकती है. लेकिन, यह समयसीमा तीन साल तक चरणबद्ध ढंग से बढ़ सकती है. राष्ट्रपति शासन को हटाने के लिए संसद की मंज़ूरी नहीं चाहिए होती. वहीं, 1978 का 44वां संविधान संशोधन कहता है कि राष्ट्रपति शासन की अवधि को 1 साल से ज़्यादा बढ़ाए जाने के लिए बड़े कारण चाहिए होते हैं.

इसका मतलब यह है कि या तो देश में घोषित इमरजेंसी के हालात हों या फिर चुनाव आयोग यह प्रमाणित करे कि अपरिहार्य मुश्किलों के चलते संबंधित राज्य में चुनाव करवाए जाने की स्थिति नहीं है, तब कहीं जाकर 1 साल से ज़्यादा समय के लिए राष्ट्रपति शासन लगाया जा सकता है.
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