इतिहास में हर महामारी के बाद दिखा है तेजी का दौर, क्या इस बार होगा ऐसा?

महामारी (Pandemic) के दौरान मंदी के बाद एक तेजी का दौर आता है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)

महामारी (Pandemic) के दौरान मंदी के बाद एक तेजी का दौर आता है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)

इतिहास (History) गवाह है कि हर महामारी (Pandemic) के बाद के समय में एक तेजी के दौर (Booms) देखने को मिले हैं. ऐसे में कोविड-19 महामारी के बाद भी आर्थिक तेजी देखने की उम्मीद की जा रही है.

  • Share this:

ापिछले डेढ़ साल से दुनिया कोविड-19 महामारी (Covid-19 Pandemic) को हराने के लिए जंग लड़ रही है. एक तरफ इस महामारी से बचने और उबरने के लिए वैक्सीनेशन पर जोर दिया जा रहा है वहीं दूसरी तरफ इससे आई आर्थिक चुनौतियों (Economic Challenges) से निपटने के उपायों पर भी जोर आजमाइश हो रही है. इतिहास गवाह है कि हर महामारी के बाद के समय मानव इतिहास के लिए नए आयाम खोलता है जो उसके लिए वरदान साबित (Boom) होता है. ऐसा ही कुछ उम्मीद साल 2021 में भी की जा रही है.

क्या होता रहा है महामारी के बाद

अब से पहले जब भी महामारी के बाद के समय किसी भी लिहाज से बहुत अच्छा समय आया है उसमें कई खास बातें होती हैं. जहां लोग घर से बाहर निकलना चाहकर खर्च करना चाहते हैं, कुछ अनिश्चितता जरूर रहती है. इसके साथ ही ऐसे मौकों पर आर्थिक संरचना में क्रांतिकारी बदलाव देखने को मिले हैं. महामारी के बाद राजनैतिक अस्थिरता बढ़ती लगती है.

पहले भी हुआ है ऐसा
जब कोई नई महामारी फैलती हो तो वह समय डॉक्टरों के लिए चुनौती भरा होता है और आम लोगों में भी निराशा से उबरने की एक बेकरारी दिखाई देती है.1830 के दशक में जब फ्रांस में हैजा फैला, महामारी के बाद लोगों में अपेक्षाएं बहुत बढ़ी दिखी. बड़े राजनैतिक बदलाव देखे गए.  प्लेग के बाद ब्रिटेन और फ्रांस में औद्योगिक क्रांति की नींव डली.

तो क्या भारत में भी

ऐसे में सवाल उठता है कि क्या हमारे देश में महामारी के बाद एक बहुत अच्छा समय देखने को मिलेगा. दुनिया के बहुत से देशों ने वैक्सीनेशन में तेजी दिखाई है और वे अपने यहां पाबंदियां हटाने की तैयारी में हैं. बहुत से अर्थशास्त्रियों और राजनेताओं के लिए यह समय अभी स्पष्ट नहीं है. लेकिन इतिहास इन हालात के बारे में बहुत कुछ कह रहा है.



Health, History, Covid-19, Coronavirus, Pandemic, Covid-19 Pandemic, Post Pandemic, Booms, economy, Economic Booms,
कोविड महामारी (Covid-19) के बाद के आर्थिक तेजी का दौर दिख सकता है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)

लोग खर्च करते हैं

इतिहास में विश्व युद्ध, महामारी जैसे कई मौके आए हैं जहां दुनिया भर के सकल घरेलू उत्पादन ने वापसी की है. इससे पता चलता है कि लोग खर्च करना पसंद करते हैं,  आपदा व्यापार को नवाचार के लिए प्रोत्साहित करती है और राजनैतिक अस्थिरता आती है. लोगों को पहले खर्च करने के मौके नहीं मिलते हैं 1870 के दशक के पहले हिस्से में जब चेचक महामारी फैली थी तब ब्रिटेन की घरेलू बचत दोगुनी हो गई थी. इसी तरह प्रथम विश्व युद्ध के दौरान जापान की बचत दर दोगुनी हो गई थी.

खून के पतला और गाढ़ा होने से क्या होता है नुकसान, कोविड-19 से क्या है इसका संबंध

हमेशा नहीं हुआ ऐसा लेकिन

महामारी खत्म होते ही रोजगार बढ़ता है, लेकिन तुरंत ही तेजी नहीं आती. 1920 में स्पेनिश फ्लू के बाद अमेरिका में ऐसा नहीं हुआ था, अमेरिका में विश्व युद्ध के बाद लोगों ने केवल 20 प्रतिशत ही खर्च किया था. 1949 में अर्थव्यवस्था मंदी में चली गई थी. लेकिन यह भी तय है कि हर बार व्यापार जगत में नई तरीके ईजाद किए गए जिससे या तो नए उत्पाद आए या उनके लिए कोई नया सिस्टम.

Indias GDP growth
इतिहास गवाह है कि हर महामारी के बाद आर्थिक तेजी (Economic Boom) का दौर आया है.

नए मौके नई तरीके

ऐसे मौकों पर लोगों ने पैसे कमाने के नए तरीके ही नहीं सीखे., बल्कि कई तरह की नई सेवाएं भी देखने को मिली है. इतिहासकारों का मानना है कि ब्लैक डेथ के बाद यूरोपीय लोगों ने दुनिया के बाहर के इलाकों को खोजना शुरू कर दिया. एक शोध के मुताबिक सौ साल पहले 1919 में स्टार्टअप की संख्या में बहुत तेजी आई थी. इसी दौर के बाद अमेरिका में मजदूरी भत्ता भी बढ़ गया था.

राजनैतिक अस्थिरता?

हर मुश्किल दौर के बाद बहुत से देशों में राजनैतिक अस्थिरता देखने को मिली है. बुरा दौर झेलने के बाद लोग बदलाव चाहते हैं और यह राजनीति में भी दिखाई देता है. महामारी कई बार उसके पहले की असमानता को देखने को मजबूर करती है और महामारी के बाद इससे संबंधित अस्थिरता उभरने लगती है. एक आईएमएफ को शोध के मुताबिक ऐसा महामारी के दो साल तक दिखाई देता है. साल 2013-16 के बीच पश्चिम अफ्रीका में इबोला महामारी के बाद हिंसा 40 प्रतिशत बढ़ गई थी. ब्रिटेन को द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान हिटलर से बचाने वाले विस्टन चर्चिल को भी युद्ध के बाद चुनाव में हार का समाना करना पड़ा था.

Covid-19 बीमारी को शरीर में बढ़ने से रोक सकती हैं हारमोन दवाएं- शोध

बेशक महामारी ने हमारे देश के हालात को बहुत प्रभावित किया है जिसमें सबसे ज्यादा नुकसान आर्थिक तौर से हुआ है. लेकिन महामारी के बाद क्या होगा इसका अनुमान लगाने की स्थिति में शायद अभी कोई नहीं है. यह समय ही बताएगा कि क्या इस बार भी ऐसा हो पाएगा.

अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज