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भारत-पाक टकराव पर क्या रहीं देश के मुस्लिम संगठनों की राय

News18Hindi
Updated: March 2, 2019, 6:52 PM IST
भारत-पाक टकराव पर क्या रहीं देश के मुस्लिम संगठनों की राय
भारत और पाकिस्तान के रिश्तों पर अमूमन खुलकर अपनी राय रखने वाले इस मर्तबे चुप क्यों हैं?

भारत और पाकिस्तान के रिश्तों पर अमूमन खुलकर अपनी राय रखने वाले इस मर्तबे चुप क्यों हैं?

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भारत और पड़ोसी देश पाकिस्तान के बीच उभरे मौजूदा तनाव पर भारत के मुस्लिम संगठनों की राय मिली-जुली रही. एक तरफ जमीयत उलेमा-ए- हिंद, मिली काउंसिल जैसे संगठनों ने चुप्पी साध रखी है. ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने अपने ट्विटर अकांउट पर 11 जनवरी के बाद से कोई भी जानकारी ट्वीट नहीं की है. जबकि ट्रिपल तलाक समेत कई मामलों पर यह बोर्ड खुलकर अपनी रखने के लिए जाना जाता है. इसी तरह जामा मस्जिद के शाही इमाम सैयद अहमद बुखारी भी मसले पर कोई मंतव्य जाहिर नहीं करते.

ऑल इंडिया मुस्लिम मजलिस-ए-मशवरात के अध्यक्ष हालिया तनाव पर खुलकर कुछ नहीं कहता. इस संस्‍थान की तरफ से सोशल मीडिया में कुछ वीडियो और तस्वीरें शेयर की गई हैं. इनमें पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान की विंग कमांडर अभिनंदन को भारत लौटने पर उनकी तारीफ की गई है. साथ ही पुलवामा हमले में भारत सरकार की खामियों की ओर ध्यान इंगित किया गया है. हालांकि वे एक अंग्रेजी लेख भी शेयर करते हैं, जिसमें यह बताया है कि आखिर क्यों चीन मुसलमानों में दिलचस्पी रखता है. ख्वाजा अजमेर शरीफ दरगाह के मुखिया भी हालिया तनाव पर कुछ नहीं कहते.

हालंकि जमात-ए-अहले हदीस आतंकवाद के खिलाफ एक सभा की. साथ ही सभा में शांति की तरफ बढ़ने की तकरीरें रखी गईं. इसी तरह ऑल इंडिया वेलफेयर पार्टी ने भी पीएम मोदी के पक्ष में पोस्टर लगाते हुए उनके एयर स्ट्राइक के कदम की प्रशंसा की.

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इसी तरह सहारनपुर प्रसिद्ध इस्लामिक शिक्षण संस्थान दारुल उलूम देवबंद ने भी भारत-पाक के बीच मौजूदा तनाव पर चिंता जाहिर की. साथ ही 1940-1950 के लौट आने के विषय में कहा.



राजनैतिक पार्टी ऑल इंडिया मजलिस ए इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी आमतौर पर देश के समकालिक मुद्दों पर मुखर रहते हैं. उन्होंने पुलवामा हमले को भारत की राजनैतिक और इंटेलिजेंस की कमी बताया. बाद में उन्होंने पाकिस्तान को जेनेवा संधि की याद दिलाते हुए कैप्टन अभिनंदन के साथ किसी भी तरह का बुरा बर्ताव ना करने की हिदायत दी.अपने एक हालिया भाषण में उन्होंने कहा, "मेरे मुसलमान होने पर शायद तुम्हें शक होगा कि ये वफादार है या एंटीनेशनल है. मगर सुनो मेरी एक बात को, अगर बीजेपी ये कह रही है कि मेरा बूथ सबसे मजबूत, मैं कह रहा हूं कि मेरी सरहद मजबूत तो मेरा देश मजबूत."

राजनेताओं में महबूबा मुफ्ती मामले पर अपने बयानों को लेकर आलोचनाएं झेल रही हैं. फिलहाल वे अपने पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ मौजूदा हालातों के बाद बैन किए गए मु‌स्लिम संगठन जमात-ए-इस्लामी पर लगे बैन को लेकर प्रदर्शन कर रही हैं. मौजूदा हालातों को लेकर वे केंद्र सरकार कई तरह के आरोप लगा रही हैं.

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जबकि जम्मू कश्मीर के नेता उमर अब्दुल्ला व फारुख अब्दुल्ला दोनों ने ही लगातार पाकिस्तान के प्रति कड़ा रुख इख्तियार करते हुए लगातार पूरे मसले पर मुखर हैं. उन्होंने विंग कमांडर अभिनंदन को लेकर भी कई ट्वीट किए. साथ ही उन्होंने पीएम मोदी को इस दौर में चुनावी रैलियां ना करने की भी हिदायत दी.

प्रतीकात्मक


सत्ता पक्ष के नेता मुख्तार अब्बास नकवी और शाहनवाज हुसैन ने लगातार ट्वीट के माध्यम से देशप्रेम और देश के लिए जज्बा दिखाने की बात की. साथ ही वे अपने चुनावी कार्यक्रमों के बारे में भी नियमितता से बोलते रहे.

विपक्ष नेता गुलाम नबी आजाद सोशल मीडिया पर नहीं हैं. लेकिन वे कांग्रेस के बयानात के वक्त अपनी समहति जाहिर करते रहे. लेकिन मसले पर उन्होंने अलग से कुछ नहीं कहा. अहमद पटेल देश के आम नागरिकों की तरह पुलवामा हमले के भावुक क्षणों में भावुक और अभिनंदन के लौटने पर गर्व महसूस करते हैं.

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जबकि सपा नेता अबू आसिम आजमी लगातार मामले पर राजनैतिक टिप्पणी करते हुए पूरे मामले में पीएम मोदी को दोषी ठहराते हैं. हालांकि अभिनंदन के लौटने पर कुछ नहीं कहते. आजम खान इसे संवेदनशील मसला बताते हैं और इस पर राजनीति ना करने की हिदायत देते हैं.

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First published: March 2, 2019, 6:52 PM IST
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