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जानिए क्या है अफ्रीकी स्वाइन फीवर, जिसके केस भारत में मिले पहली बार

असम और अरुणाचल प्रदेश में खतरनाक अफ्रीकी स्वाइन फीवर (African Swine Fever) के मामले सामने आए हैं. अब तक इस फीवर से देश में हजारों सुअरों की मौत हो चुकी है. वैश्विक स्तर पर ये आंकड़ा लाखों में है.

असम और अरुणाचल प्रदेश में खतरनाक अफ्रीकी स्वाइन फीवर (African Swine Fever) के मामले सामने आए हैं. अब तक इस फीवर से देश में हजारों सुअरों की मौत हो चुकी है. वैश्विक स्तर पर ये आंकड़ा लाखों में है.

असम और अरुणाचल प्रदेश में खतरनाक अफ्रीकी स्वाइन फीवर (African Swine Fever) के मामले सामने आए हैं. अब तक इस फीवर से देश में हजारों सुअरों की मौत हो चुकी है. वैश्विक स्तर पर ये आंकड़ा लाखों में है.

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    कोरोना वायरस महामारी के बीच भारत में एक नई बीमारी के मामले सामने आए हैं. देश के उत्तर-पूर्वी हिस्से के सबसे बड़े राज्य असम में अफ्रीकी स्वाइन फीवर का असर हजारों सुअरों पर पड़ रहा है. बीते फरवरी महीने से अब तक राज्य में इस बीमारी की वजह से 2900 सुअरों की मौत हो चुकी है. हालांकि इस बीमारी का कोई असर इंसानों पर नहीं पड़ता लेकिन बड़ी संख्या में सुअरों की मौत इससे हो सकती है. या फिर एहतियात के लिए सुअरों को मारना पड़ सकता है. अफ्रीकी स्वाइन फीवर के मामले भारत में पहली बार रिपोर्ट किए गए हैं.

    सितंबर 2019 में इस बीमारी की वजह चीन में बड़ी संख्या में सुअरों की मौत हुई थी. गौरतलब है कि चीन दुनिया में सुअर के मांस का सबसे बड़ा एक्सपोर्टर और उपभोक्ता है. सुअरों में फैलते इस रोग को देखते हुए चीनी प्रशासन ने बड़ी संख्या में सुअरों को मार दिया था. यही वजह है कि बीते महीनों के दौरान चीन में सुअर के मांस के मूल्य में दोगुने से ज्यादा की वृद्धि हो गई थी.

    एशिया में कैसे हुई इस बीमारी की शुरुआत
    यूनाइटेड नेशन फूड एंड एग्रीकल्चर ऑर्गेनाइजेशन के अनुसार अफ्रीकी स्वाइन फीवर के हालिया आउटब्रेक का असर चीन, मंगोलिया, वियतनाम, कंबोडिया, म्यांमार, फिलिपिन्स, रिपब्लिक ऑफ कोरिया और इंडोनेशिया में पड़ा है. चीन में इस फीवर का पहला आउटब्रेक अगस्त 2018 में हुआ था. इसके बाद से अब तक देश में तकरीबन 10 लाख सुअरों को मारा जा चुका है. वहीं वियतनाम में इस बीमारी का आउटब्रेक फरवरी 2019 में हुआ था. तब से अब तक देश में 60 लाख सुअर मारे जा चुके हैं.



    अधिकारियों का मानना है कि अफ्रीकी स्वाइन फीवर भारत में सबसे पहले तिब्बत में आया फिर अरुणाचल प्रदेश से असम पहुंचा है. गौरतलब है कि भारत में सबसे ज्यादा सुअरों की संख्या असम में ही है. इंडियन एक्सप्रेस पर प्रकाशित एक स्टोरी के मुताबिक असम के कृषि एवं पशुपालन मंत्री अतुल बोरा ने कहा है-तिब्बत की सीमा अरुणचाल से लगती है. संभव है ये वहां से अरुणाचल होते हुए फिर असम आया है.

    हालांकि अभी तक ये जानकारी पुष्ट नहीं है कि ये बीमारी भारत कैसे पहुंची. असम में एनिमल हेल्थ के डिप्टी डायरेक्ट प्रदीप गोगोई के मुताबिक इस वायरस के वाहक जंगली सुअर भी हो सकते हैं. अभी तक इसे कोई स्पष्ट जानकारी नहीं कि ये असम कैसे पहुंचा.

    बीते महीने असम सरकार ने सुअरों के स्लॉटर और बिक्री पर रोक लगा दी थी. सैंपल भोपाल स्थित National Institute of High Security Animal Diseases (NIHSAD) को भेजे गए थे. इंस्टिट्यूट ने बाद में कंफर्म कर दिया कि इन सैंपल में अफ्रीकी स्वाइन फीवर के लक्षण हैं. अरुणाचल प्रदेश के भी दो जिलों के सुअरों में इस बीमारी के लक्षण मिले हैं. राज्य में अब तक इस बीमारी से 1 हजार सुअर मर चुके हैं. World Organisation for Animal Health (WOAH) के मुताबिक 2018 से 2019 तक ये बीमारी 3 यूरोपीय और 23 अफ्रीकी देशों में फैली है.



    क्या होता है अफ्रीकी स्वाइन फीवर
    अफ्रीकी स्वाइन फीवर एक वायरल बीमारी है जिसका असर जंगली और पालतू सुअरों में होता है. इस बीमारी में तेज बुखार के बाद दिमाग की नस फटने की वजह से सुअरों की मौत हो जाती है. इस रोग के होने के बाद सुअरों के बचने का प्रतिशत तकरीबन ना के बराबर होता है. इसमें मृत्यु दर 100 प्रतिशत मानी जाती है. ये रोग एक से दूसरे सुअर के डायरेक्ट कॉन्टैक्ट में आने से फैलता है. साथ ही अगर किसी संक्रमित सुअर ने कुछ खाकर छोड़ दिया हो और उसे कोई दूसरा स्वस्थ सुअर खा ले, तो भी ये रोग जाता है. ये रोग पहले के स्वाइन फीवर से अलग है. हालांकि लक्षणों में समानता है. इसी वजह से पहले वाले स्वाइन फीवर के लिए तैयार की गई वैक्सीन अफ्रीकन स्वाइन फीवर से ग्रसित सुअरों पर असर नहीं डाल रही है.

    ये बीमारी सुअरों के लिए बेहद खतरनाक है लेकिन अभी ये अन्य जानवरों में नहीं फैल रही है. अभी तक इसकी कोई वैक्सीन नहीं तैयार हुई है. इसी वजह से सरकारें संक्रमित सुअरों को मार देने का आदेश दे रही हैं. जिससे अन्य स्वस्थ सुअरों को बचाया जा सके.

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