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Explainer : क्या है AFSPA यानि अफस्पा, जिसे पू्र्वोत्तर राज्यों में घटाया गया

Explainer : क्या है AFSPA यानि अफस्पा, जिसे पू्र्वोत्तर राज्यों में घटाया गया

AFSPA एक्ट अंग्रेजों ने 1942 में भारत की स्वाधीनता की लड़ाई को कुचलने के लिए बनाया था.

AFSPA एक्ट अंग्रेजों ने 1942 में भारत की स्वाधीनता की लड़ाई को कुचलने के लिए बनाया था.

कई दशक पहले उत्तर पूर्व के राज्यों में लागू किए गए AFSPA यानि अफस्पा को केंद्र सरकार ने घटा लिया है. गृहमंत्री अमित शाह ने एक ट्वीट करके ये जानकारी दी. ये एक्ट सेना को पूर्वोत्तर राज्यों के अशांत इलाकों में विशेष अधिकार देता था, जिसे लेकर पिछले दशकों में कई बार विरोध और विवाद भी हुआ. जानते हैं कि क्या ये है नियम, क्यों हटाया गया.

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    करीब 64 साल बाद केंद्र सरकार ने पूर्वोत्तर के असम, नागालैंड, और मणिपुर राज्यों में अफस्पा के क्षेत्र को घटा दिया है. हालांकि नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार पिछले कुछ समय से अफस्पा को हटाने के संकेत दे रही थी. उन्होंने मणिपुर के विधानसभा चुनावों के दौरान भी इसे हटाने की बात कही थी. इसे पूरी तरह तो नहीं हटाया गया है लेकिन इन तीन राज्यों में कई जिलों को इस एक्ट की हद से बाहर कर दिया है.

    अफस्पा हटाने की जो वजह केंद्र सरकार ने बताई है, वो ये है कि पूर्वोत्तर में सुरक्षा की दृष्टि से बेहतर हो रही है और यहां हो रहा विकास भी काफी बेहतर है. असम में  23 जिलों से पूर्ण रूप से और एक जिले से आंशिक रूप से सशस्त्र बल विशेषाधिकार अधिनियम (अफस्पा) हटाया गया है.

    साथ ही नागालैंड के 07 जिलों के 15 पुलिस थाना क्षेत्रों से इसे खत्म किया गया है. मणिपुर में 06 जिले राहत पाने वालों में हैं, जहां 15 पुलिस थाना इलाकों में इस एक्ट का प्रभाव हटाया गया है. लेकिन अरुणाचल में अभी जहां लागू है, वहां लागू रहेगा

    क्या है अफस्पा
    45 साल पहले भारतीय संसद ने “अफस्पा” यानी आर्म्ड फोर्स स्पेशल पावर एक्ट 1958 को लागू किया, जो एक फौजी कानून है, जिसे “डिस्टर्ब” क्षेत्रों में लागू किया जाता है, यह कानून सुरक्षा बलों और सेना को कुछ विशेष अधिकार देता है.

    ये विशेष अधिकार किस तरह के होते हैं
    जहां अफस्पा लागू होता है, वहां सशस्त्र बलों के अधिकारी को जबरदस्त शक्तियां दी जाती हैं. ये इस तरह हैं

    • चेतावनी के बाद, यदि कोई व्यक्ति कानून तोड़ता है, अशांति फैलाता है, तो उस पर मृत्यु तक बल का प्रयोग कर किया जा सकता है
    • किसी आश्रय स्थल या ढांचे को तबाह किया जा सकता है जहां से हथियार बंद हमले का अंदेशा हो.
    • किसी भी असंदिग्ध व्यक्ति को बिना किसी वारंट गिरफ्तार किया जा सकता है. गिरफ्तारी के दौरान उनके द्वारा किसी भी तरह की शक्ति का इस्तेमाल किया जा सकता है.

    लंबे समय से नार्थ ईस्ट के राज्यों मेे अफस्पा हटाने के लिए मांग होती रही है. इसे लेकर तकरीबन हर ही वहां के राज्यों में प्रदर्शन होते रहे हैं.

    • बिना वारंट किसी के घर में अंदर जाकर उसकी तलाशी ली जा सकती है. इसके लिए जरूरी बल का इस्तेमाल किया जा सकता है.
    •  वाहन को रोक कर उसकी तलाशी ली जा सकती है.
    • सेना के अधिकारियों को उनके वैध कामों कानूनी कवच प्रदान किया जाता है.
    • सेना के केवल केंद्र सरकार हस्तक्षेप कर सकती है.

    पूर्वोत्तर राज्यों में कब लागू किया गया
    अफस्पा को एक सितंबर 1958 को पूर्वोत्तर भारत के राज्यों में लागू किया गया था. पूर्वोत्तर राज्यों में हिंसा रोकने के लिए इसे लागू किया गया था.

    इसके अलावा कौन से राज्य इसकी जद में हैं
    पंजाब और चंडीगढ़ भी इसके दायरे में आए. हालांकि 1997 में इस कानून को वहां खत्म कर दिया गया. जम्मू और कश्मीर में ये जरूर 1990 से जारी है.

    नागालैंड में 06 जिलों के 15 थाना क्षेत्रों से इसको हटा लिया गया है. वहां कुछ इलाकों में ये अभी लागू है लेकिन उम्मीद है कि अगर शांति की स्थिति बनी रही तो आने वाले समय में बाकि इलाकों को भी अफस्पा से राहत मिल सकती है.

    अफस्पा के तहत आने वाले राज्य
    ये राज्य अफस्पा के दायरे में रहे हैं–

    • असम (इसके कुछ इलाकों से अफस्पा हटा दिया गया है, कुछ में लागू है)
    • नागालैंड (06 जिलों से अफस्पा हटा)
    • मणिपुर (06 जिलों से अफस्पा हटा, लेकिन कुछ में लागू)
    • अरुणाचल प्रदेश (काफी हद तक हटा लिया गया, लेकिन कुछ इलाकों में लागू)
    • जम्मू और कश्मीर

    किसी राज्य को कब डिस्टर्ब घोषित किया जाता है
    धार्मिक, नस्लीय, भाषा, क्षेत्रीय समूहों, जातियों, समुदायों के बीच मतभेद या विवादों के कारण राज्य या केंद्र सरकार एक क्षेत्र को “डिस्टर्ब” घोषित कर सकती है.

    इसे कैसे और कब लागू किया जा सकता है

    • राज्य या केंद्र सरकार के पास किसी भी भारतीय क्षेत्र को “डिस्टर्ब” घोषित करने का अधिकार है.
    • अधिनियम की धारा (3) के तहत, राज्य सरकार की राय का होना जरूरी है कि क्या एक क्षेत्र “डिस्टर्ब” है या नहीं. अगर ऐसा नही है तो राज्यपाल या केंद्र द्वारा इसे खारिज कर सकती है.
    • अफस्पा अधिनियम की धारा (3) के तहत राज्य या संघीय राज्य के राज्यपाल को बजट की आधिकारिक सूचना जारी करने के लिए अधिकार देता है, जिसके बाद उसे केंद्र के नागरिकों की सहायता करने के लिए सशस्त्र बलों को भेजने का अधिकार प्राप्त हो जाता है.
    • (विशेष न्यायालय) अधिनियम 1976 के अनुसार, एक बार “डिस्टर्ब” क्षेत्र घोषित होने के बाद कम से कम 3 महीने तक वहाँ पर स्पेशल फोर्स की तैनाती रहती है.

    अफस्पा की आलोचना क्यों 
    पिछले कुछ वर्षों में अफस्पा की काफी आलोचना हुई है. 31 मार्च, 2012 को संयुक्त राष्ट्र ने भारत से कहा कि लोकतंत्र में अफस्पा का कोई स्थान नहीं है इसलिए इसको रद्द कर दिया जाए.
    – ह्मयूम राइट्स वॉच ने भी इसकी आलोचना की है, बकौल उसके इसका दुरुपयोग हो रहा है.
    – अफस्पा पर मानवाधिकार संगठन, अलगाववादी और राजनीतिक दल सवाल उठाते रहे हैं. उनका तर्क है कि इस कानून से मौलिक अधिकारों का हनन होता है. इस कानून के कुछ सेक्शन पर भी विवाद है.

    अफस्पा के पक्ष में क्या दलील है
    कश्मीर जैसे राज्य में आतंकवादी गतिविधियों में क्यों कमी नहीं रही है. लिहाजा बगैर अफस्पा भारतीय सशस्त्र सेनाएं आतंकवादियों के सामने सिर झुका लेंगी. भारतीय सशस्त्र बल पहले ही अपने कई कुशल अधिकारियों और पुरुषों को खो चुका है. केवल यह अधिनियम जीवन को अधिक हानि पहुंचाए बिना आतंकवाद को रोकने में मदद करने के लिए उनके पास अफस्पा नामक एक कवच है. इस अधिनियम के द्वारा आंतकवाद से होने वाली हानियों को रोका जा सकता है.

    अंग्रेजों ने भी लागू किया था अफस्पा
    सबसे पहले ब्रिटिश सरकार ने भारत छोड़ों आंदोलन को कुचलने के लिए AFSPA को अध्यादेश के जरिए 1942 में पारित किया था.

    meghalaya, afspa

    मेघालय से अफस्पा पहले ही हटाया जा चुका है. अब वहां कानून की स्थिति काफी बेहतर है और शांतिपूर्ण है.

    मेघालय से इसे क्यों हटाया गया
    मेघालय की सुरक्षा स्थिति में उल्लेखनीय सुधार को देखते हुए वहां से अफस्पा हटाया गया है. वहां पिछले कुछ सालों में आमतौर पर हिंसा की बहुत कम घटनाएं हुई हैं और आमतौर पर शांति है.

    नागालैंड में लागू है कानून 
    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उपस्थिति में नगा विद्रोही संगठन एनएससीएन-आईएम के महासचिव थुंगलेंग मुइवा के बीच 3 अगस्त 2015 को एक फ्रेमवर्क समझौते पर हस्ताक्षर हुए थे. इसके बाद सरकार ने नागालैंड से अफस्पा को हटाने का आश्वासन दिया था. अब काफी हद तक हटा लिया है. हालांकि नागालैंड के कुछ इलाकों में ये लागू रहेगा लेकिन इसकी समीक्षा होती रहेगी.

    Tags: AFSPA, Army, Assam, Manipur, Nagaland, North East

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