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CAA पर क्या है अमेरिका का नजरिया, क्या ट्रंप के भारत दौरे पर होगी इसकी चर्चा

News18Hindi
Updated: February 22, 2020, 9:49 AM IST
CAA पर क्या है अमेरिका का नजरिया, क्या ट्रंप के भारत दौरे पर होगी इसकी चर्चा
क्या डोनाल्ड ट्रंप अपने भारत दौरे पर उठाएंगे सीएए का मुद्दा

शुक्रवार को व्हाइट हाउस ने एक बयान जारी कर कहा है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) अपने भारत दौरे में प्रधानमंत्री मोदी (PM Modi) के सामने धार्मिक आजादी का मुद्दा उठाएंगे..

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  • Last Updated: February 22, 2020, 9:49 AM IST
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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) के भारत दौरे को लेकर खूब चर्चा चल रही है. ट्रंप के स्वागत की तैयारियां, उनके स्वागत में उमड़ने वाली भीड़, पीएम मोदी (PM Modi) और ट्रंप का रोड शो, इसको लेकर की जा रही सुरक्षा व्यवस्था. इन सबके बीच सवाल उठ रहा है कि इस दौरे में ट्रंप और पीएम मोदी के बीच क्या चर्चा होती है?

भारत की विपक्षी पार्टियां लगातार नागरिकता संशोधन कानून (CAA) को मुद्दा बनाए हुए है. अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इस कानून को लेकर चर्चा हो रही है. इसके पक्ष और विपक्ष दोनों ही स्तरों पर विरोध प्रदर्शन हुए हैं. इसलिए ऐसी चर्चा है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और पीएम मोदी की मुलाकात में सीएए का मुद्दा उठ सकता है.

ट्रंप अपने भारत दौर पर उठाएंगे धार्मिक आजादी का मुद्दा
हालांकि इसके साथ ही व्हाइट हाउस की तरफ से ये भी कहा गया कि अमेरिका भारतीय लोकतंत्र और उसकी परंपराओं की इज्जत करता है.



व्हाइट हाउस के एक सीनियर अधिकारी ने बताया है कि डोनाल्ड ट्रंप साझा लोकतंत्र और धार्मिक आजादी के मुद्दे को उठाएंगे. वो पब्लिक मीटिंग के साथ पीएम मोदी के साथ निजी बातचीत में भी इसपर चर्चा करेंगे. खासकर वो धार्मिक आजादी के मुद्दे को ज्यादा तवज्जो देंगे, जो कि इस वक्त काफी अहम है.

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अपनी भारत यात्रा को लेकर उत्साहित हैं. उन्होंने अमेरिकी जनता के सामने भी इस दौरे के महत्व को बताया है. अमेरिकी जनता के सामने उन्होंने कहा है कि किस तरह भारत में उनके स्वागत की तैयारियां चल रही हैं. करोड़ों लोग उनके स्वागत के लिए तैयार हैं. ट्रंप प्रधानमंत्री मोदी को अपना दोस्त बताते रहे हैं. ऐसे में उम्मीद यही की जा रही है कि वो सरकार को परेशानी में डालने वाले सवाल से बचेंगे. लेकिन दौरे से ठीक पहले जिस तरह के संकेत मिल रहे हैं, उसमें कुछ भी कहना मुश्किल है.

सीएए को लेकर अमेरिका ने जताई है अपनी चिंता
व्हाइट हाउस के एक अधिकारी ने शुक्रवार को इस बारे में कहा है कि ‘हम दोनों ही देश अपनी सहयोग से दुनिया के मूल्यों और कानून का राज कायम रखने की कोशिश कर रहे हैं. हम भारतीय लोकतंत्र और उसकी संवैधानिक संस्थाओं की इज्जत करते हैं. हम भारत को उन परंपराओं को जारी रखने को उत्साहित करेंगे. लेकिन वहां जो मुद्दे उठाए जा रहे हैं, हम उनके लिए भी फिक्रमंद हैं.’

इसपर आगे बात करते हुए व्हाइट हाउस के अधिकारी ने कहा कि 'मुझे लगता है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रधानमंत्री मोदी के साथ बातचीत में इस मुद्दे को उठाएंगे. हम लोकतांत्रिक परंपराओं के निर्वाह और धार्मिक अल्पसंख्यकों के सम्मान की परंपरा को जारी रखने के लिए भारत की तरफ देख रहे हैं.'

अधिकारी ने एक सवाल के जवाब में कहा कि धार्मिक आजादी, धार्मिक अल्पसंख्यकों के लिए सम्मान और सभी धार्मिक समुदायों के लिए एक तरह की व्यवस्था का अधिकार भारतीय संविधान ने दिया है. इसलिए ये वो बातें हैं, जो राष्ट्रपति के लिए अहम हैं. वो जरूर इन्हें उठाएंगे.

अमेरिका में सीएए के पक्ष और विपक्ष में हुए हैं प्रदर्शन
भारत में नागरिकता संशोधन कानून के लागू होने के वक्त से ही अमेरिका इसपर चिंता जाहिर करता रहा है. हालांकि अब तक उसने इस पर सधी हुई प्रतिक्रिया दी है. सीएए लागू होते वक्त एक अमेरिकी राजनयिक सैम ब्राउनबैक ने कहा था कि भारत की सबसे बड़ी ताकत उसका संविधान है. एक लोकतंत्र के तौर पर हम भारतीय संस्थाओं का सम्मान करते हैं. लेकिन हम नागरिकता कानून को लागू करने को लेकर चिंतित हैं. हमें लगता है कि भारत अपनी संवैधानिक जिम्मेदारियों का निर्वाह करेगा, जिसमें धार्मिक आजादी भी शामिल है. हालांकि इसके बाद भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर और रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने इसे लेकर अमेरिका से बातचीत भी की थी.

अमेरिका में सीएए के विरोध और पक्ष दोनों स्तर पर प्रदर्शन हुए हैं. अमेरिका में बड़ी संख्या में रहने वाले भारतीय मूल के लोगों ने सीएए का समर्थन किया है और इसके सपोर्ट में प्रदर्शन किए हैं. दिसंबर के आखिरी हफ्ते में न्यूयॉर्क के मशहूर टाइम्स स्कॉयर पर भारतीय मूल के लोगों ने एक कार्यक्रम आयोजित कर सीएए का समर्थन किया था. उन्होंने इसे भारत सरकार का एतिहासिक कदम बताया था. हालांकि इसी तरह के प्रदर्शन वहां सीएए के विरोध में भी हुए हैं.

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First published: February 22, 2020, 9:49 AM IST
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